DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

मुंहतोड़ जवाब

सितंबर 2016 की सर्जिकल स्ट्राइक के बाद अब पुंछ के रावलकोट में पाकिस्तान की सीमा के अंदर उसके तीन जवान ढेर कर भारत ने पाकिस्तान को एक बार फिर बता दिया है कि सीमा पर अराजकता अब और बर्दाश्त नहीं होगी और उसकी कारस्तानियों का उसी की भाषा में जवाब देना भारत को आता है। यह मानने में गुरेज नहीं कि भारत की पिछली सर्जिकल स्ट्राइक में खासा नुकसान झेलने के बाद भी तमाम आनाकानी के बावजूद पाकिस्तान अपनी हरकतों से बाज नहीं आया है और सीमा पर युद्ध विराम उल्लंघन और आतंकी वारदातों को बढ़ावा देना उसका शगल बना हुआ है। ऐसे हालात में शनिवार रात की पाकिस्तानी गोलीबारी में चार भारतीय जवानों की शहादत के जवाब में सोमवार सुबह की भारतीय सैन्य कार्रवाई स्वागत योग्य है, सराहनीय भी। यह पाकिस्तानी सेना के लिए बड़ा झटका भी है। पाकिस्तान को सबक सिखाने की यह अकेली कार्रवाई नहीं थी। इससे ठीक पहले भारतीय जवानों ने जम्मू-कश्मीर के झांगर में नियंत्रण रेखा के पास एक पाकिस्तानी स्नाइपर को ढेर किया और ठीक बाद फुलवामा में लंबे समय से वांछित आतंकी नूर मोहम्मद तांत्रे उर्फ  छोटा नूरा को। छोटा नूरा का मारा जाना तो सीधे तौर पर जैश-ए-मोहम्मद, लेकिन परोक्ष रूप से पाकिस्तान में बैठे उसके आकाओं को सख्त संदेश है। घाटी में आतंकवादी ढांचे को दोबारा खड़ा करने में महज तीन फुट के इस आतंकी की बड़ी भूमिका थी और वह सेना और अद्र्धसैनिक बलों के लिए मुसीबत बन गया था। उसकी तलाश बीएसएफ कैंप पर आत्मघाती हमले सहित कई बड़े मामलों में थी। उसका मरना जैश के लिए इसलिए भी बड़ा झटका है, क्योंकि कश्मीर में उसे फिर से खड़ा करने वाला नूरा ही था।

रावलकोट की घटना पाकिस्तान की उस नापाक हरकत का जवाब है, जिसमें 23 दिसंबर को राजोरी के केरी इलाके से लगी नियंत्रण रेखा पर पाकिस्तानी सेना ने युद्धविराम का उल्लंघन किया और अकारण गोलीबारी कर एक मेजर सहित चार भारतीय जवानों को मार डाला। पाकिस्तान की इस कायराना हरकत का भारतीय सेना ने 48 घंटे के भीतर मुंहतोड़ जवाब दिया और सोमवार की रात उसकी सीमा में घुसकर उसके तीन सैनिक ढेर कर दिए। बदला चार के बदले चार का ही था,पाकिस्तानी सेना पर यकीन करें, तो इनमें से एक घायल है। 

ताजा भारतीय कार्रवाई को सबक सिखाने के अभियान की अगली कड़ी के रूप में देखे जाने की जरूरत है। भारतीय सेना का यह जवाबी कदम उस वक्त सामने आया है, जब कुलभूषण जाधव की पत्नी और मां पाकिस्तान में उनसे मिलकर लौटे ही थे और देश उनकी मुलाकात के दौरान पाकिस्तान द्वारा बरती गई अमानवीय दूरंदेशी की चर्चा में मशगूल था। पाकिस्तान ने जिस तरह एक मां और एक पत्नी के अपने बेटे और पति से बहुप्रतीक्षित मिलन के बीच शीशे की दीवार खड़ी कर न सिर्फ अपनी संवेदनहीनता का परिचय दिया, बल्कि अपना असली चरित्र भी दिखा दिया कि वह कहता कुछ है, करता कुछ और है। जिस वक्त इस मुलाकात की अंतिम तैयारियां चल रही थीं, लगभग उसी वक्त में पाकिस्तानी सैनिक सीमा पर हमारे जवानों की अकारण हत्या कर रहे थे। ऐसे में, जैसे को तैसा की तर्ज पर भारतीय सेना की कार्रवाई वर्ष के अंतिम पहर में आने वाले वक्त का आगाज भी है। आमतौर पर ऐसे में अपने सैनिक के मरने का खंडन करने वाली पाकिस्तानी सेना ने भी विलाप करते हुए ही सही, यह आरोप लगाकर कि भारतीय सेना ने युद्धविराम का उल्लंघन कर उसके तीन सैनिक मार दिए हैं, भारतीय उपलब्धि की पुष्टि ही कर दी है।

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:Hindustan Editorial on 27 december