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21 जनवरी, 2020|11:34|IST

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यही असली चेहरा

अब पाकिस्तान का कोई कदम अचरज में नहीं डालता? अचरज तो तब होगा, जब उसका कोई कदम आतंकवाद या हाफिज सईद जैसे आतंकी चेहरे या आतंकी संगठनों की मदद के खिलाफ ईमानदारी से उठेगा। तय बात है कि फिलहाल उससे ऐसी उम्मीद बेमानी है। हाफिज सईद पर जांच करने आ रही संयुक्त राष्ट्र टीम के सामने रोड़े अटकाकर उसने एक बार फिर यही साबित किया है। उसने कहा है कि 25 और 26 जनवरी को पाकिस्तान आने वाली संयुक्त राष्ट्र की विशेष जांच टीम को सईद और उसके संगठनों की सीधी जांच नहीं करने देगा। टीम को उन तक पहुंचने ही नहीं दिया जाएगा। यूएन टीम का यह दौरा इसलिए भी ज्यादा महत्वपूर्ण है, क्योंकि चंद रोज पहले ही पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शाहिद खाकान अब्बासी ने हाफिज सईद के खिलाफ कोई सुबूत, कोई केस न होने की बात कहते हुए साफ किया था कि पाकिस्तान उसके खिलाफ कुछ नहीं करने जा रहा।

सईद और उसके आतंकी संगठन जमात-उद-दावा पर मुंबई आतंकी हमलों के बाद संयुक्त राष्ट्र ने दिसंबर 2008 में प्रतिबंध लगाया था। पाकिस्तान इस बीच अंतरराष्ट्रीय मंचों पर लगातार कोशिश करता रहा कि अपने माथे से आतंकवाद का पोषक होने का दाग धो ले, पर यह आसान नहीं था। उसकी करतूतें अपने सुबूत खुद देती रहीं। अब जब प्रधानमंत्री अब्बासी खुद सईद के पाक-साफ होने का सर्टिफिकेट देते फिर रहे हैं, तो ऐसे में यूएन टीम को उस तक सीधी पहुंच देकर भला वह अपनी मुश्किलें क्यों बढ़ाना चाहेंगे? पाकिस्तान इस वक्त अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तो घिरा ही है, अंदरूनी हालात भी अनुकूल नहीं हैं। नवाज शरीफ के बाद सत्ता यूं भी डांवांडोल स्थिति में है। ऐसे में, सईद जैसे कुख्यात के खिलाफ मोर्चा खोलना उसके लिए आसान नहीं है। तब तो और, जब उसे उसने खुद पैदा किया है। यही कारण है कि उसने हाफिज के सामने पूरी तरह से सरेंडर ही नहीं किया, उसका पैरोकार बनकर खड़ा है। यह अलग बात है कि सरकार को अपने देश और अपनी पार्टी के अंदर भी आलोचनाएं झेलनी पड़ रही हैं। 

संयुक्त राष्ट्र ने जब पाकिस्तान में आतंकी संगठनों व इनके सरगनाओं पर प्रतिबंध लगाया था, तब पाकिस्तान ने मुखर होकर इसे लागू करने, हाफिज सईद को नजरबंद करने तक की बात कही थी। यह अलग बात है कि उसके दावे पर किसी को भरोसा नहीं हुआ और बाद में तो पाकिस्तान के अंदर से ही खबरें आने लगीं कि सईद अपने संगठनों के नाम बदलकर काम कर रहा है। वहां भी चिंता तब ज्यादा बढ़ी, जब खबरें आने लगीं कि सरकार ही सईद के फलाह-ए-इंसानियत फाउंडेशन को स्टॉक मार्केट में रजिस्टर कराने की जुगत में है। पाकिस्तान की यही साजिशें उसकी मुश्किल बनकर खड़ी हैं। आतंकवाद और सईद जैसे चेहरे उसके गले की ऐसी फांस हैं, जिन्हें वह न उगल पा रहा, न निगल पा रहा। भारत से लेकर अमेरिका तक उस पर दबाव अलग बढ़ाते जा रहे हैं। अमेरिकी स्टेट डिपार्टमेंट ने तो अब्बासी के बयान के बाद दोटूक कह दिया कि सईद पर मुकम्मल कार्रवाई होनी चाहिए। भारत भी लगातार घर में घुसकर मारने तक की चेतावनी देता आया है। यही कारण है कि गर्दन फंसते देख पाकिस्तान अब बेशर्मी से ‘हाफिज राग’ पर उतर आया है। देखना होगा कि यूएन टीम यदि सईद तक पहुंचे बिना लौटने को मजबूर होती है, तो अगला कदम क्या होगा? ताजा करनी तो साबित करती है कि पाकिस्तान की करनी-कथनी में कोई अंतर नहीं। सच तो यह है कि अपने आतंकी आका के दबाव में उसकी बेशर्मी तो सामने है, तय तो अब शेष विश्व को करना है। यह उसे उसकी सही जगह दिखाने का उपयुक्त अवसर है, जिसकी जमीन उसने खुद तैयार की है।

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  • Web Title:Hindustan editorial on 23 january