DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

वैकल्पिक रास्ता

ऊपरी तौर पर यह योजना बहुत महाकाय भी लगती है और हैरत में डालने वाली भी, लेकिन चीन की बेल्ट ऐंड रोड इन्फ्रास्ट्रक्चर परियोजना, जिसे कई बार वन बेल्ट, वन रोड परियोजना भी कहा जाता रहा है, विवादों से कभी दूर नहीं रही। हालांकि चीन ने इसे लेकर पूरी दुनिया को, खासकर यूरोप, एशिया और अफ्रीका के देशों को बहुत से सब्जबाग भी दिखाए हैं। चीन इसके नाम पर उस पुराने सिल्क रूट को फिर से जीवित करने की बात करता है, जिससे सदियों पहले चीन से रेशम पूरी दुनिया, खासकर यूरोप में पहुंचता था। चीन इसको आधुनिक रूप देना चाहता है, ताकि दुनिया भर के देश आपस में आसानी से व्यापार कर सकें। पर इसे लेकर चीन की नीयत पर शक हमेशा से रहा है। यह माना जाता है कि पश्चिम की पिछली मंदी से चीन की अर्थव्यवस्था को जो झटका लगा था, चीन अब वैसी स्थिति से निपटने के लिए एक पक्की व्यवस्था चाहता है, ताकि वह पश्चिम पर निर्भरता कम करके दुनिया के तमाम छोटे-बड़े देशों में अपना माल खपा सके। खासकर एशिया, यूरेशिया और अफ्रीका के उन देशों में, जो अभी ज्यादा विकसित नहीं हैं। ज्यादा आपत्तिजनक यह है कि इसके नाम पर वह दुनिया में राजनीतिक आधिपत्य चाहता है। यह परियोजना उसे वह ढांचा दे देगी, जिससे वह जरूरत पड़ने पर कहीं भी हस्तक्षेप कर सके। भारत ने इसीलिए इस परियोजना का लगातार विरोध किया है। 

चीन की इस नीयत को हम उस सड़क से समझ सकते हैं, जिसे चाइना-पाकिस्तान कॉरीडोर का नाम दिया गया है। इसे बेल्ट ऐंड रोड परियोजना का पहला हिस्सा भी माना जाता है। चीन से पाकिस्तान के ग्वादर बंदरगाह तक जाने वाली यह सड़क कश्मीर के उस हिस्से से निकलती है, जो पाकिस्तान के कब्जे में है। चीन ने इसके लिए न तो भारत की भावनाओं और न ही कश्मीर पर उसके  दावे का कोई ख्याल ही रखा। हालांकि यह पहली बार नहीं हुआ। उसके पहले भी चीन उस क्षेत्र में काराकोरम मार्ग बना चुका है। फिर पिछले दिनों चीन ने जिस तरह से भूटान के नाथुला तक सड़क बनाने की कोशिश की, वह बताता है कि चीन उन तमाम जगहों पर अपनी पहुंच बना रहा है, जो भारत के लिए सामरिक रूप से महत्वपूर्ण हैं। पाकिस्तान ही नहीं, भारत को चारों ओर से घेरने के लिए चीन नेपाल, म्यांमार, श्रीलंका और मालदीव आदि देशों में इन्फ्रास्ट्रक्चर के नाम पर अपने केंद्र बना रहा है। पर इस सब का भारत के पास विकल्प क्या है? अच्छी बात यह है कि एक विकल्प अब उभर रहा है।

अब भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया मिलकर बेल्ट ऐंड रोड का एक नया विकल्प देने की तैयारी कर रहे हैं। यह सच है कि चीन की बेल्ट ऐंड रोड परियोजना का आर्थिक तर्क काफी मजबूत है। नए दौर में दुनिया को एक ऐसे इन्फ्रास्ट्रक्चर की जरूरत है, जो तमाम देशों को आपस में जोडे़। ऐसी रिपोर्ट आ रही हैं कि ये चारों देश एक नया विकल्प देने को सहमत हो गए हैं। एशिया, अफ्रीका और यूरोप के ऐसे बहुत से देश हैं, जिन्हें ऐसी किसी परियोजना की जरूरत है, लेकिन वे चीन पर भरोसा नहीं करते। इनमें कई तो ऐसे हैं, जो पिछले काफी समय से चीन की दादागिरी के शिकार रहे हैं। इन सबके लिए यह विकल्प एक अच्छी खबर हो सकता है। इसलिए भी कि इस पर किसी एक देश का आधिपत्य नहीं, बल्कि चार देशों का सहयोग होगा। 

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:Hindustan Editorial on 20 february