Hindustan Editorial on 20 december - नया रिश्ता DA Image
21 फरवरी, 2020|12:12|IST

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नया रिश्ता

कहा जाता है कि राजनय में जब दो देश एक-दूसरे के लिए उपयोगी साबित होते हैं, तो दोस्ती की शुरुआत होती है। तब किसी देश की खूबियां देखी जाने लगती हैं और उसका महत्व समझ में आने लगता है। भारत और अमेरिका के बीच दोस्ती का यह रिश्ता इन दिनों काफी तेजी से पनप रहा है। मंगलवार को अमेरिकी सरकार द्वारा जारी नेशनल सिक्योरिटी स्टे्रटजी इसी रिश्ते के आगे बढ़ने का दस्तावेज है। यह पहली बार हुआ है कि अमेरिकी सरकार के किसी महत्वपूर्ण नीतिगत दस्तावेज में भारत को एक ग्लोबल पावर यानी विश्व शक्ति के रूप में पहचाना गया है। अभी तक भारत का उल्लेख दक्षिण-पूर्व एशिया की क्षेत्रीय ताकत और कभी-कभी तो उभरती हुई क्षेत्रीय ताकत के रूप में होता था। और भारत के बारे में अक्सर जो कहा जाता था, उसका अर्थ होता था कि भारत अभी बदलाव की प्रक्रिया में है, पर यह ऐसा नहीं है, जिसका पूरी तरह उपयोग हो सके। लेकिन पहली बार कहा गया है कि भारत लगभग पूरी तरह बदल गया है। इसकी एक व्याख्या यह भी हो सकती है कि भारत इस समय ऐसी स्थिति में आ गया है कि अमेरिका उसका इस्तेमाल कर सके। लेकिन अगर हम दस्तावेज के विस्तार में जाएं, तो इसके कई दूसरे और ज्यादा महत्वपूर्ण अर्थ खुलते हैं।

यह दस्तावेज काफी समय से कही जा रही इस बात पर भी मुहर लगाता है कि नए विश्व समीकरण में भारत और अमेरिका ऐसी जगह पर खड़े हैं, जहां दोनों के हित एक-दूसरे से मिलते हैं। यानी इसका एक अर्थ यह भी हुआ कि अगर अमेरिका भारत का इस्तेमाल कर सकता है, तो कई मोर्चे ऐसे भी हैं, जिन पर वह भारत के लिए उपयोगी साबित होने वाला है। अब पाकिस्तान को ही लें, काफी लंबे समय बाद लगने लगा है कि अपने नजरिये के मामले में अमेरिका भी वहीं आकर खड़ा हो गया है, जहां भारत काफी समय से खड़ा है। यह दस्तावेज पाकिस्तान से खुलकर कहता है कि वह अपने यहां से सभी तरह के आतंकवादियों को खत्म करे। जबकि अभी तक यह दबे-छिपे स्वीकार किया जाता था कि पाकिस्तान में आतंकवादियों को पाला-पोसा जाता है, लेकिन वहां रणनीति यह मानकर बनाई जाती थी कि पाकिस्तान शांति-प्रक्रिया में एक केंद्रीय भूमिका निभाएगा। इसके अलावा, अफगानिस्तान में भूमिका के लिए भी पाकिस्तान को लताड़ा गया है। भारत के लिए यह भी काफी महत्वपूर्ण है। भारत के लिए एक और महत्व का मुद्दा इस दस्तावेज में है, और वह है चीन का आक्रामक विस्तारवाद। चीन को लेकर भारत और अमेरिका की चिंताएं लगभग एक सी हैं। इसीलिए इसमें भारत, जापान और ऑस्ट्रेलिया के साथ सामरिक समीकरण बनाने की भी बात की गई है। 

हालांकि हमें इस सच को भी स्वीकार कर लेना चाहिए कि भारत और अमेरिका इस समय इतिहास के ऐसे मोड़ पर खड़े हैं, जहां दोनों के हित और दोनों का नजरिया आपस में काफी कुछ मिलता है। दोनों की विश्व दृष्टि इस समय तकरीबन एक सी ही है। कुछ साल पहले तक स्थिति इसके विपरीत सी ही थी और चीजें आगे भी बदल सकती हैं। अमेरिका तो इस क्षण के लिए भारत के अधिकतम उपयोग की रणनीति बना ही रहा है, भारत भी उसके अधिकतम उपयोग के रास्ते तलाशे। इसका अर्थ यह नहीं है कि भारत अमेरिकी हथियारों का सबसे बड़ा खरीदार बन जाए, बल्कि इसका फायदा तभी होगा, जब हम इस मौके का इस्तेमाल आर्थिक और सामरिक रूप से एक बड़ी ताकत बनकर अपने पांवों पर खड़े होने के लिए करें। दुनिया की राजनीति में सामरिक दोस्ती बड़ी भूमिका निभाती है, लेकिन यह स्वावलंबन का विकल्प नहीं हो सकती।

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  • Web Title:Hindustan Editorial on 20 december