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दो नई सरकारें

एन चंद्रबाबू नायडू ने आज चौथी बार आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेकर एक नए दौर की शुरुआत की, वहीं ओडिशा में मोहन चरण मांझी ने मुख्यमंत्री पद को सुशोमित कर एक नया इतिहास लिख दिया है। आंध्र...

दो नई सरकारें
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Monika Minalहिन्दुस्तानThu, 13 Jun 2024 12:32 AM
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एन चंद्रबाबू नायडू ने आज चौथी बार आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेकर एक नए दौर की शुरुआत की, वहीं ओडिशा में मोहन चरण मांझी ने मुख्यमंत्री पद को सुशोमित कर एक नया इतिहास लिख दिया है। आंध्र प्रदेश में जहां तेलुगु देशम पार्टी के नेतृत्व में भाजपा की सहयोगी भूमिका से गठबंधन सरकार बनी है, तो वहीं ओडिशा में भाजपा ने अकेले दम पर सरकार बनाई है। चंद्रबाबू नायडू भारत में सूचना-प्रौद्योगिकी के नाम पर पहचान रखने वाले नेता हैं। मुख्यमंत्री के रूप में जब उन्हें मौका मिला, तो उन्होंने हैदराबाद को ‘आईटी हब’ के रूप में बदल दिया, अब जब वह फिर मुख्यमंत्री बने हैं, तब उन्हें आईटी क्षेत्र में एक नई क्रांति के लिए काम करना चाहिए। भारत में, वह भी आंध्र प्रदेश जैसे राज्य में आईटी के क्षेत्र में ज्यादा निवेश, नवाचार व सरकारी स्तर पर ज्यादा सहूलियत की जरूरत है। चंद्रबाबू को एक नया आंध्र बनाने के लिए काम करना चाहिए। अमरावती में राजधानी बनाने की योजना पर वह बेशक काम करें, पर उन्हें रोजगार और प्रदेश के बुनियादी विकास के लिए ज्यादा सोचना चाहिए। 
आंध्र प्रदेश के नए मंत्रिमंडल में संभावना के अनुरूप ही तेदेपा के 21 विधायकों, जन सेना के तीन विधायको और भाजपा के एक विधायक को शपथ दिलाई गई है। खास यह भी है कि आंध्र में इस बार पहली बार चुनाव जीतने वाले आठ विधायकों को मंत्री बनाया गया है। पहली बार चुनाव जीते लोकप्रिय अभिनेता पवन कल्याण ने भी सहर्ष मंत्री पद स्वीकार किया है, जिससे कला क्षेत्र में भी हलचल है। वैसे चंद्रबाबू नायडू भी महान अभिनेता एनटी रामाराव की विरासत ही संभाल रहे हैं। चंदबाबू ने कसम खाई है कि वह राज्य में केवल एक राजधानी बनाएंगे, तो उन्हें ध्यान रखना होगा कि भ्रष्टाचार के दाग न लगें। नई राजधानी का निर्माण एक बड़ी योजना है, उसे ईमानदार हाथों से पूरा होना चाहिए। चंद्रबाबू के लिए एक बड़ी चुनौती अपने किए वादे को पूरा करना है। ज्यादातर विश्लेषक यही मानते हैं कि पिछली बार भी वह अपने वादे न निभाने की वजह से ही हारे थे। दरअसल, दक्षिण में भांति-भांति की मुफ्त योजनाएं घोषित होती हैं, जिनको पूरा करना व्यावहारिक रूप से आसान नहीं होता। जनता ने चंद्रबाबू की राजनीति पर भरोसा जताया है और इस भरोसे का कायम रखना नए मुख्यमंत्री की जिम्मेदारी है। 
उधर, ओडिशा के भी कायाकल्प का मौका भारतीय जनता पार्टी को मिला है। नवीन पटनायक के समय यह राज्य लगभग ठहर गया था, हर तरह के संसाधनों के बावजूद ओडिशा उतना आगे नहीं बढ़ पाया, जितना उसके कुछ अन्य पड़ोसी राज्य बढ़ गए। छत्तीसगढ़ बहुत आगे बढ़ गया, बंगाल भी ठीक स्थिति में है, बिहार की जीडीपी भी तेजी से बढ़ रही है, मगर ओडिशा का हाल बुरा था, तो लोगों ने लगभग ढाई दशक बाद नवीन पटनायक को किनारे कर दिया। अब बागडोर भाजपा के हाथों में है, तो इसका सीधा अर्थ है कि ओडिशा के लोग तेज तरक्की चाहते हैं। ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण मांझी के लिए चुनौतियां कम नहीं हैं। अगर केंद्र सरकार का पूरा साथ मिला, तो ओडिशा वाकई बड़ी तेजी से देश की मुख्यधारा में आ सकता है। भाजपा में ओडिशा को लेकर उत्सव का माहौल है, पार्टी में जगन्नाथ शब्द इन दिनों बहुत प्रिय हो गया है। पार्टी के नेता अगर मानते हैं कि उन्हें भगवान जगन्नाथ की भूमि की सेवा का अवसर मिला है, तो यह अवसर हाथ से जाना नहीं चाहिए।