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आगे देखने का समय

जनता ने तीसरी दफा भरोसा जताया है, तो भाजपा को राष्ट्रहित के नए विच के साथ सामने आना चाहिए। उसे देखना होगा कि किन मुद्दों पर लोगों में नाराजगी है। भारत में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच वोटों का...

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Monika Minalहिन्दुस्तानWed, 05 Jun 2024 10:48 PM
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भारत में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच वोटों का अंतर काफी हद तक मिट चुका है। देश के दो प्रमुख राष्ट्रीय दलों- भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस को अगर देखें, तो जहां सत्तारूढ़ भाजपा का वोट प्रतिशत घटा है, वहीं कांग्रेस का बढ़ा है। पहले बात भाजपा की करें, तो पिछले लोकसभा चुनाव में भाजपा को 37.3 प्रतिशत मत मिले थे, जिसमें इस बार एक प्रतिशत से कुछ ज्यादा की कमी आई है, पर सीटों की संख्या में तगड़ी गिरावट है। दूसरी ओर, 99 सीट जीतने वाली कांग्रेस का वोट प्रतिशत 19.5 प्रतिशत से बढ़कर 21.2 प्रतिशत हो गया है। वोट शेयर में बढ़त दो प्रतिशत भी नहीं है, लेकिन कांग्रेस की सीटों की संख्या लगभग दोगुनी हो गई है। अगर हम राज्यवार जाएं, तो उत्तर प्रदेश में एनडीए और विपक्षी गठबंधन के मतों में अंतर एक प्रतिशत भी नहीं रह गया है, जबकि महाराष्ट्र में तो वोटों के मामले में इंडिया ब्लॉक मामूली अंतर के साथ एनडीए से आगे निकल गया है। पिछली बार उत्तर प्रदेश में विपक्षी गठबंधन कम से कम 11 प्रतिशत वोटों से पीछे था। वोटों के आंकड़े आने वाले दिनों में स्पष्ट होंगे, लेकिन यह तय है कि विपक्ष ने वोटों की एक बड़ी खाई को पाट दिया है। 
कांटे की यह टक्कर आखिर क्या इशारा कर रही है? शायद दलों के बीच का अंतर घट रहा है। आम आदमी पार्टी को ही अगर हम देखें, तो बड़े दावे के साथ यह पार्टी राजनीति में आई थी। इस बार भी चुनाव अभियान बहुत जोर-शोर से चलाया गया था, पर अपने राज्य पंजाब में वह महज तीन सीट पर जीत दर्ज कर सकी है। पिछली बार पंजाब विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी ने विपक्ष पर बिल्कुल झाड़ू फेर दिया था। शायद आम आदमी पार्टी में लोगों को कुछ खास नहीं दिखा। दिल्ली में भी पार्टी ने बहुत मेहनत की थी, चुनाव प्रचार के लिए अरविंद केजरीवाल विशेष जमानत के साथ बाहर आए थे। अंतर पैदा करने के वादे के साथ वह आए थे, लेकिन अब बाकी सहयोगी दलों जैसे ही लगने लगे हैं। ध्यान देने की बात है कि लोक-कल्याणकारी या जनहित या मुफ्त उपहार के अनेक वादे लगभग हर पार्टी ने किए हैं। इन पार्टियों के घोषणापत्र में बहुत ज्यादा अंतर नहीं रह गया है, जिसके नतीजे हम साफ देख रहे हैं।
अब भविष्य के लिए राजनीतिक दलों के पास क्या योजनाएं हैं? कांग्रेस ने बडे़ वादे किए थे, क्या वह अपने वादों को अपने द्वारा शासित राज्यों में लागू करेगी? राम मंदिर और अनुच्छेद 370 जैसे वादे पूरे करने के बाद भाजपा को समान आचार संहिता के अलावा भी बड़े ठोस सपने देखने होंगे? जनता ने एनडीए पर अगर तीसरी दफा भरोसा जताया है, तो विशेष रूप से भाजपा को राष्ट्रहित के नए विचारों के साथ सामने आना चाहिए। ईमानदारी से यह देखना होगा कि किन मुद्दों पर लोगों में नाराजगी है। यह संकेत मिल रहा है कि एनडीए का तीसरा कार्यकाल आर्थिक सुधारों पर केंद्रित हो सकता है। आम आदमी को राहत देने के लिए कदम उठाने पड़ेंगे। रोजगार जहां तक संभव है और जितनी जल्दी संभव है, देने में ही भलाई है। नौकरीपेशा और मध्यम वर्ग के लोगों के लिए कुछ ठोस करना होगा। यह सुरक्षा और सुरक्षा बलों के लिए भी सोचने का समय है। लोगों ने इशारा कर दिया है कि वे तमाम पार्टियों और सरकार को अच्छी राजनीति और अच्छी सेवा करते देखना चाहते हैं।  

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