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दस किलो अनाज

चुनावी शोर में यह नहीं भूलना चाहिए कि देश पर कितना कर्ज हो गया है। मुफ्त घोषणाओं में लगी हर पार्टी को अर्थव्यवस्था के प्रति सजग रहना होगा। अनेक लोगों के लिए चुनाव विचारधारा, समस्या और मुद्दों को...

दस किलो अनाज
Monika Minalहिन्दुस्तानWed, 15 May 2024 11:44 PM
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चुनावी शोर में यह नहीं भूलना चाहिए कि देश पर कितना कर्ज हो गया है। मुफ्त घोषणाओं में लगी हर पार्टी को अर्थव्यवस्था के प्रति सजग रहना होगा।
अनेक लोगों के लिए चुनाव विचारधारा, समस्या और मुद्दों को परखने का मौका है, तो बहुत से लोग मुकम्मल तौर पर बस यह जानना चाहते हैं कि उन्हें क्या मिलेगा? इसी कड़ी में भाजपा की घोषणा है कि आने वाले पांच वर्ष तक 80 करोड़ लोगों को पांच किलो अनाज मुफ्त मिलता रहेगा, इससे आगे बढ़ते हुए कांग्रेस ने घोषणा की है कि इंडिया ब्लॉक की सरकार अगर बनी, तो पांच के बजाय दस किलो अनाज मुफ्त दिया जाएगा। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने संयुक्त प्रेसवार्ता में यह महत्वपूर्ण घोषणा की है। मतदान के चार चरण बाद की गई इस घोषणा का आने वाले तीन चरणों पर अब क्या असर होगा, यह देखने वाली बात है। क्या ऐसी घोषणा इंडिया ब्लॉक की ओर से पहले नहीं हो सकती थी या क्या किसी आशंका की वजह से अब घोषणा की गई है? वजह चाहे जो हो, इस वादे का महत्व है। प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना की शुरुआत कोरोना महामारी और लॉकडाउन की वजह से की गई थी और अब यह योजना सभी राजनीतिक दलों या सरकारों के लिए मजबूरी बन गई है। 
विपक्ष में ऐसे लोग भी हैं, जो प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना के आलोचक रहे हैं। दो वजहों से इस योजना को निशाने पर लिया जाता है। पहली वजह बताई जाती है, लोगों को रोजगार चाहिए, मुफ्त अनाज नहीं। दूसरी, जब देश में गरीबों की संख्या घट गई है, तब वे कौन 80 करोड़ लोग हैं, जिन्हें मुफ्त अनाज की जरूरत पड़ रही है? वैसे, इसमें शक नहीं कि इस योजना की शुरुआत 2020 में एक साल के लिए हुई थी, मगर अब पांचवां साल शुरू होने वाला है। यह योजना देश की एक सफलतम योजना है और बड़ी संख्या में ऐसे लोग हैं, जो इसका लाभ ले रहे हैं। महामारी का असर पीछे छूट गया है, पर वास्तव में ज्यादातर लाभार्थी यह नहीं चाहेंगे कि यह योजना बंद हो जाए। अत: इंडिया ब्लॉक ने अगर पांच किलो मुफ्त अनाज को दस किलो करने का वादा किया है, तो किसी को आश्चर्य नहीं होना चाहिए। हां, इंडिया ब्लॉक अगर यह घोषणा पहले करता, तो शायद उसे ज्यादा सियासी लाभ मिलता। 
यह बात अलग है कि मुफ्त अनाज योजना का आर्थिक दबाव देश और उसके लोगों पर ही पडेगा। मुफ्त की योजनाओं को शुरू करना और चलाते रहना आसान नहीं है। अगर मुफ्त देना इतना ही आसान होता, तो तमाम राज्य सरकारें दिल्ली सरकार की तरह मुफ्त बिजली और पानी की सुविधा दे रही होतीं। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में ही दिल्ली की सीमा में किसी का बिजली बिल शून्य आता है, तो उससे बमुश्किल पचास कदम दूर उत्तर प्रदेश में चार हजार रुपये! मतलब, मुफ्त योजनाएं असंख्य लोगों के लिए जरूरत और सियासी मजबूरी हैं, पर उनमें तार्किकता होनी चाहिए। मुफ्त योजनाएं अच्छी होती हैं और अच्छी लगती भी हैं, पर उनका असर जब महंगाई के रूप में लौटता है, तब नाराजगी नहीं होनी चाहिए। आज हर पार्टी को पता है कि देश पर कितना कर्ज है और घोषणाओं में लगी हरेक पार्टी को अर्थव्यवस्था के प्रति सजग रहना होगा। साल 2022 की बात करें, तो भारत पर जीडीपी के हिसाब से 81 प्रतिशत ऋण था, जबकि जापान पर 260.1 प्रतिशत और अमेरिका पर 121.3 प्रतिशत। ऋण तब बुरा नहीं है, जब उसका सदुपयोग सुनिश्चित हो। ऋण हों या मुफ्त की योजनाएं, अगर देश खुशहाल हो रहा हो, तो स्वागत है। 

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