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यात्रियों की चिंता

उत्तराखंड में केदारनाथ धाम के हेलीपैड पर जिस तरह से एक हेलीकॉप्टर को आपातकालीन ढंग से उतारा गया, उससे चार धाम यात्रा को लेकर चिंताएं और बढ़ गई हैं। हेलीकॉप्टर में पायलट सहित सात लोग सवार थे और बताया...

यात्रियों की चिंता
Monika Minalहिन्दुस्तानFri, 24 May 2024 08:59 PM
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उत्तराखंड में केदारनाथ धाम के हेलीपैड पर जिस तरह से एक हेलीकॉप्टर को आपातकालीन ढंग से उतारा गया, उससे चार धाम यात्रा को लेकर चिंताएं और बढ़ गई हैं। हेलीकॉप्टर में पायलट सहित सात लोग सवार थे और बताया जा रहा है कि यान में तकनीकी खराबी आ गई थी। यह घटना एक संकेत है कि हम यात्रा के माध्यमों और संसाधनों का जरूरत से ज्यादा उपयोग करने लगे हैं। धार्मिकता के साथ पर्यटन और पर्यटन के साथ व्यावसायिकता जब जुड़ जाती है, तब इसी तरह की अति सामने आने लगती है। बताया जा रहा है कि हेलीकॉप्टर के पिछले मोटर में तकनीकी समस्या आ गई थी, अगर यह तकनीकी समस्या रखरखाव के अभाव या यान के जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल की वजह से सामने आई है, तो यह गंभीर मामला है। जांच चल रही है, तो सच भी सामने आना चाहिए और सबसे जरूरी है, सेवा में सुधार और लोगों को ऐसी सेवाओं की गुणवत्ता के प्रति आश्वस्त करना। बहरहाल, पायलट की तारीफ करनी चाहिए कि उसने संयम बरतते हुए हादसे को टाल दिया। 
देश ही नहीं, पूरी दुनिया में हिमालय की गोद में बसे चार धामों का विशेष महत्व है। यह यात्रा अक्षय तृतीया के दिन 10 मई को शुरू हो चुकी है और 15 नवंबर तक चलेगी। यहां यह बहुत दुखद बात है कि शुरुआती 12 दिन में 42 लोग यात्रा के दौरान अपनी जान गंवा चुके हैं। ज्यादातर लोगों को हार्ट अटैक की वजह से जान गंवानी पड़ी है। यह एक अलग चिंता का विषय है, जिस पर तीर्थयात्रियों के साथ ही सरकार को विचार करना चाहिए। क्या स्वास्थ्य के पैमाने पर खरे लोगों को ही चार धाम यात्रा में नहीं आने देना चाहिए? विशेष रूप से हृदय रोग की समस्या से ग्रस्त लोगों को ऐसी यात्रा से बचना चाहिए। पहले के समय में लोग ऐसी कठिन यात्रा से बचते थे, पर जैसे-जैसे यात्रा की सुविधाओं का विकास हुआ, वैसे-वैसे यात्रियों की संख्या बढ़ती चली गई। यमुनोत्री, गंगोत्री, केदारनाथ और बद्रीनाथ, इन चार जगहों की यात्रा अभी भी आसान नहीं है। जो लोग बिना तैयारी या अपने को पहाड़ों के अनुरूप ढाले बिना आते हैं, उन्हें बहुत परेशानी होती है। जो लोग शरीर से मजबूत या संघर्षशील होते हैं, वे तो मुश्किलों का सामना कर लेते हैं, पर जो कमजोर होते हैं, वे यहां आकर बीमार पड़ जाते हैं। पहाड़ों में सड़कों का विकास तो हुआ है, पर चिकित्सा सुविधा पर्याप्त नहीं है। चिकित्सा सुविधाओं पर सरकार को गौर करना चाहिए और यात्रियों को भी ऐसी सुविधाओं के प्रति सचेत रहते हुए आचरण करना चाहिए।
ध्यान रहे, इस वर्ष देश-विदेश के 26 लाख से अधिक यात्रियों ने यात्रा के लिए पंजीकरण कराया है। इसमें से बड़ी संख्या में लोग अप्रैल-मई के बीच और बाकी लोग अक्तूबर-नवंबर के बीच अपनी यात्रा पूरी करेंगे। आमतौर पर यात्रा के पहले सत्र में ही ज्यादा से ज्यादा लोग चार धाम के दर्शन कर लेना चाहते हैं, क्योंकि इस समय ज्यादा ठंड नहीं होती है और मैदानी इलाकों में चिलचिलाती धूप का प्रकोप रहता है। क्या चार धाम यात्रा और यात्रियों की संख्या पर अंकुश रहना चाहिए? वाकई संख्या सीमित करना जरूरी होता जा रहा है, लेकिन व्यावसायिकता का दबाव आडे़ आता है। बड़ी संख्या में ऐसे छोटे व्यवसायी हैं, जो साल भर से इस यात्रा का इंतजार करते हैं। यात्रियों की ज्यादा संख्या का मतलब है, ज्यादा कमाई, पर अब समय आ गया है कि यात्रियों के जीवन की ज्यादा चिंता की जाए। 

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