hindustan editorial column of 21 september 2019 - मंदी पर प्रहार DA Image

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मंदी पर प्रहार

यह पहला सबसे बड़ा और शायद सबसे कड़ा प्रहार है। शुक्रवार को केंद्र सरकार ने जिस तरह से कंपनी कर में कटौती की, वह बताता है कि सरकार अब मंदी को मात देने पर तुल गई है। आधारभूत कंपनी कर को सीधे 30 फीसदी से घटाकर 22 फीसदी कर देने से एक तरफ तो देश में कारोबार कर रही कंपनियों को बड़ी राहत मिलेगी और वे इससे हुई बचत का नए निवेश में इस्तेमाल कर सकेंगी। दूसरी तरफ, इस कटौती ने भारतीय बाजार को विदेशी निवेशकों के लिए और आकर्षक बना दिया है। इस समय अमेरिका और चीन के बीच में जिस तरह का कारोबार युद्ध चल रहा है, उसमें दुनिया की कई कंपनियां चीन से अपना ध्यान हटा रही हैं। ऐसे में जरूरी था कि अपने बाजार में कुछ नया आकर्षण पैदा किया जाए। नई घोषणा से कुछ हद तक इसकी उम्मीद की जा सकती है। इसके साथ ही सरकार ने नई घरेलू कंपनियों पर लगने वाले कंपनी कर को घटाकर 15 फीसदी कर दिया है। यह घरेलू निवेश को बढ़ावा देने के लिए एक बड़ा कदम हो सकता है। इतना ही नहीं, सरकार ने विदेशी संस्थागत निवेश पर पिछले बजट में लगाए गए कर को भी वापस ले लिया है, साथ ही कंपनी के शेयरों की वापसी खरीद यानी ‘बाइबैक’ पर लगा कर भी खत्म कर दिया है। जाहिर है, इससे एक तो संस्थागत विदेशी निवेशकों को राहत मिलेगी और दूसरे, उन कंपनियों के लिए भी आसानी होगी, जो खुद अपने शेयरों को बाइबैक करना चाहती हैं। 

इन फैसलों का दीर्घकालिक असर क्या होगा, इसकी अभी भविष्यवाणी भले न की जा सके, लेकिन फिलहाल तो बाजार ने इसका पूरे धूम-धड़ाके से स्वागत किया है। वित्त मंत्री की इस घोषणा के बाद पूरे देश के शेयर बाजारों में आसमानी उछाल दिखाई दी। मुंबई शेयर बाजार के संवदेनशील सूचकांक ने तो इतनी ऊंची छलांग लगाई, जितनी उसने पिछले एक दशक के किसी भी एकदिवसीय कारोबार में नहीं लगाई थी। बाजार के लिए सबसे बड़ी बात तो यही है कि सरकार अब लगातार और निर्णायक तौर पर कुछ करती दिख रही है। इस लड़ाई में जिस तरह से रिजर्व बैंक भी शामिल हुआ है, उसे सरकार के प्रयासों से जोड़कर देखें, तो भारत मंदी के खिलाफ एक एकीकृत रणनीति अपनाता हुआ दिख रहा है। इस सिलसिले में इसके ठीक एक दिन पहले की गई घोषणाएं भी कम महत्वपूर्ण नहीं हैं। कर्ज न चुका सकने की स्थिति में मध्यम, लघु और सूक्ष्म उद्योगों को छह महीने की राहत देना इस सिलसिले में किया गया एक उल्लेखनीय फैसला है। दूसरी तरफ, देश के 400 जिलों में लोन मेले लगाने का फैसला भी काफी महत्व रखता है। इससे निचले स्तर पर मांग पैदा करके मंदी को मात देने का रास्ता खुल सकता है।

मंदी का असर सभी जगह कम या ज्यादा महसूस हो रहा है। यह भी कहा जा रहा है कि स्थिति इतनी भयावह भी नहीं कि अर्थव्यवस्था पर भारी संकट मंडराने लगे। यह जरूर है कि जो उद्योग बंद हुए या जिनके रोजगार छिने, उनके लिए संकट खड़ा हुआ है। अच्छी बात यह है कि मंदी के आधार को नया विस्तार मिले, इसके पहले ही सरकार पूरी तरह सक्रिय होती दिखाई दे रही है। मंदी का असर हमें अचानक ही दिखने लगता है, लेकिन इससे निपटने के लिए उठाए गए कदम धीरे-धीरे असर दिखाते हैं। यह सबके लिए धैर्य धारण करने का समय है।

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  • Web Title:hindustan editorial column of 21 september 2019