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नीट से न्याय

नीट या मेडिकल प्रवेश परीक्षा विवाद को सुलझाने की कवायद जारी है, इसी कड़ी में सर्वोच्च न्यायालय ने शुक्रवार को नीट-यूजी परीक्षा के आयोजन को चुनौती देने वाली सात याचिकाओं को स्वीकार कर लिया। खास यह कि...

नीट से न्याय
Monika Minalहिन्दुस्तानFri, 14 Jun 2024 11:06 PM
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नीट या मेडिकल प्रवेश परीक्षा विवाद को सुलझाने की कवायद जारी है, इसी कड़ी में सर्वोच्च न्यायालय ने शुक्रवार को नीट-यूजी परीक्षा के आयोजन को चुनौती देने वाली सात याचिकाओं को स्वीकार कर लिया। खास यह कि एक याचिका में इस बार के नीट-यूजी परीक्षा की सीबीआई जांच की मांग की गई है। न्यायालय ने केंद्र सरकार के अलावा राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी या एनटीए से भी जवाब मांगा है और अगली सुनवाई 8 जुलाई को बडे़ फैसले की उम्मीद है। अब तक के घटनाक्रम से यह तो बिल्कुल साफ हो गया है कि इस बार की प्रवेश परीक्षा में कुछ बड़ी कमियां रह गई हैं। इस बात के भी स्पष्ट संकेत हैं कि परीक्षा के साथ कोई न कोई गंभीर खिलवाड़ हुआ है। यह सुखद है कि एनटीए ने भी ग्रेस मार्क्स के खेल पर ध्यान दिया है और 1,563 छात्रों को फिर टेस्ट में बैठना पड़ेगा। टेस्ट का यह फैसला न्यायोचित है, जिन बच्चों के साथ ग्रेस मार्क्स की वजह से नाइंसाफी हुई है, उन्हें अब न्याय मिलने की संभावना बढ़ गई है। 
बहरहाल, पूरी परीक्षा को नकार देने की कवायद ठीक नहीं है। लाखों विद्यार्थियों ने बहुत संसाधन और समय लगाकर परीक्षा दी है, उनके साथ न्याय होना चाहिए। अक्सर ऐसा होता है कि जो विद्यार्थी उत्तीर्ण नहीं होते, वे फिर से परीक्षा की मांग करते हैं, पर यहां किसी भी परीक्षा को न्यायोचित ढंग से ही देखना चाहिए। यहां भावना के ज्यादा मायने नहीं हैं। परीक्षा नियम-कायदे का मामला है, उसकी गुणवत्ता के साथ किसी भी तरह का समझौता किसी अन्याय से कम नहीं है। बहरहाल, कहीं न कहीं कुछ अन्याय हुआ है, तभी तो जगह-जगह उच्च न्यायालयों में परीक्षा को चुनौती दी गई है और एनटीए उचित ही चाहता है कि तमाम मामलों की सुनवाई एक ही जगह सर्वोच्च न्यायालय में हो। कोई आश्चर्य नहीं, एनटीए की ऐसी ही मांग पर संबंधित पक्षों को नोटिस जारी किया गया है। इस पर भी 8 जुलाई को सुनवाई होगी। न्यायमूर्ति विक्रम नाथ व न्यायमूर्ति संदीप मेहता की अवकाश पीठ को पूरी कड़ाई के साथ प्रश्नपत्र लीक और कदाचार की सुनवाई करनी पड़ेगी। एक बड़ा खतरा यह है कि अगर कदाचार का सहारा लेने वाले माफिया अभी बच गए, तो मेडिकल प्रवेश परीक्षा पर हमेशा के लिए दाग लग जाएगा। यह संभव है कि इस कदाचार में एनटीए के भी कुछ लोग लिप्त रहे हों, अत: एनटीए की जांच पैनल पर कितना भरोसा किया जाए, यह फैसला अदालत को ही करना चाहिए। यह मांग शायद उचित है कि जांच अदालत की निगरानी में होनी चाहिए। 
अपने देश में मेडिकल की पढ़ाई का खर्च कई निजी संस्थानों में करोड़ों रुपये में पहुंच गया है। ऐसे में, सरकारी मेडिकल कॉलेजों में पढ़ाई के लिए जद्दोजहद तेज होती जा रही है। ध्यान रहे, मेडिकल प्रवेश परीक्षा 5 मई को 4,750 केंद्रों पर आयोजित की गई थी और लगभग 24 लाख विद्यार्थियों ने इसमें भाग लिया था। सबसे बड़ा शक तो यही है कि परिणाम 14 जून को घोषित करने के बजाय 4 जून को घोषित किए गए, उस दिन देश में मतगणना चल रही थी। क्या सफेदपोश लोगों ने यह सोचा कि चुनावी नतीजों के हो-हल्ले में उनका अपराध छिप जाएगा? क्या इसमें बड़े कोचिंग संस्थानों की भूमिका है? क्या अब अदालती जंग के पीछे भी चंद कोचिंग संस्थानों की प्रतिद्वंद्विता काम कर रही है? नीट से जुड़े अनेक बड़े सवाल हवा में तैर रहे हैं और सारी उम्मीदें सर्वोच्च अदालत पर टिकी हैं। 

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