DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

अदालत का नोटिस

बिहार के मुजफ्फरपुर में फैले इंसेफलाइटिस के मामले ने अब सुप्रीम कोर्ट में भी दस्तक दे दी है। इस मामले पर अदालत में दायर जनहित याचिका की सुध लेते हुए न्यायालय ने केंद्र सरकार और बिहार सरकार को नोटिस जारी कर दिया। अब उन्हें दस दिनों के भीतर अदालत को यह बताना होगा कि प्रभावित क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवा, पोषण और स्वच्छता के लिए वे क्या कर रही हैं? एक महत्वपूर्ण बात यह है कि अदालत ने इन तीनों चीजों को लोगों का मूल अधिकार बताया है। सुप्रीम कोर्ट ने यह नोटिस उस समय जारी किया है, जब इंसेफलाइटिस से मरने वाले बच्चों की संख्या डेढ़ सौ से भी ज्यादा हो गई है। हालांकि यह भी बताया जा रहा है कि राज्य में मानसून के दस्तक देने के बाद से नए मरीज अस्पतालों में नहीं आ रहे हैं। यह कहा जा रहा था कि इस रोग के फैलाव में अन्य कारणों के अलावा भीषण गरमी एक बड़ी भूमिका निभा रही थी।

वर्षा के कारण तापमान कम होने से ही शायद स्थिति बनी हो, या यह भी हो सकता है कि इस मामले में देर से ही सही, जो कदम उठाए गए, उनका असर अब दिख रहा हो। कुछ भी हो, अस्पतालों में इंसेफलाइटिस के नए मरीजों का न आना एक राहत भरी खबर तो है। राहत का कारण चाहे जो भी हो, लेकिन इस राहत को किसी तरह से इस रोग से पूरी मुक्ति की दिशा में ले जाया जाए, अगले कुछ सप्ताह में हमें इस दिशा में गंभीरता से काम करना होगा। केंद्र और राज्य सरकार ने इस दिशा में कई कोशिशें भी शुरू की हैं। ऐसे मामलों में पिछले अनुभवों के चलते यह डर तो रहता ही है कि कहीं रोग का प्रभाव कम होते ही सरकारी प्रयासों में ठंडापन न आने लगे। ठीक यहीं पर सुप्रीम कोर्ट की सक्रियता महत्वपूर्ण हो जाती है। कोर्ट का नोटिस सरकारों पर पड़ने वाले प्रभाव को निश्चित तौर पर बढ़ाएगा।

इस मामले में देश के सर्वोच्च अदालत ने पोषण और स्वच्छता को स्वास्थ्य सेवा के बराबर ही महत्व दिया है, जो इंसेफलाइटिस के मामले में हुए सामाजिक सर्वेक्षण को देखते हुए काफी अहमियत रखता है। मुजफ्फरपुर जिले में पिछले दिनों जब इंसेफलाइटिस से ग्रसित 289 बच्चों के परिवारों का सामाजिक-आर्थिक सर्वेक्षण किया गया, तो पता चला कि इनमें से 280 बच्चों के परिवार गरीबी रेखा से नीचे गुजर-बसर करने वाले हैं। जाहिर है, इन बच्चों को पर्याप्त पोषण भी शायद ही मिलता हो और वे उस स्वच्छता से भी दूर ही होंगे, जिसे चिकित्सा की भाषा में हाईजीन कहा जाता है। जाहिर है, मुजफ्फरपुर में चुनौती सिर्फ स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने की नहीं, उससे कहीं ज्यादा बड़ी है।

जहां तक सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवा का मामला है, तो इस दिशा में बहुत कुछ किए जाने की जरूरत है। इंसेफलाइटिस एक जटिल रोग है और मुजफ्फरपुर में फैले इस रोग के बारे में अभी कुछ ठीक से पता भी नहीं, इसके कारणों को लेकर ही विशेषज्ञों में मतभेद दिख रहे हैं। इसे छोड़ दें, तो हमारे पास जो सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवा है, वह दस्त, मलेरिया और डेंगू जैसे सामान्य रोगों के रोगियों को ही पूरी तरह नहीं बचा पाती। जो स्वास्थ्य सेवा सामान्य स्थिति में मरीजों को पूरा इलाज देने में सक्षम नहीं, उससे यह उम्मीद कैसे की जाए कि वह महामारी जैसी आपात स्थितियों में लोगों का इलाज करने में कारगर साबित होगी? इस सेवा को मजबूत बनाना ही सबसे बड़ी चुनौती है।

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:Hindustan Editorial Column June 25