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अराजकता पर लगाम

किसी भी सोशल मीडिया मंच के दुरुपयोग को रोकना न केवल अनिवार्य, बल्कि अनुकरणीय भी है। किसान आंदोलन के समाधान में जुटी भारत सरकार ने इस आंदोलन के मद्देनजर सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ के दुरुपयोग पर आपत्ति...

अराजकता पर लगाम
Monika Minalहिन्दुस्तानThu, 22 Feb 2024 10:56 PM
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किसी भी सोशल मीडिया मंच के दुरुपयोग को रोकना न केवल अनिवार्य, बल्कि अनुकरणीय भी है। किसान आंदोलन के समाधान में जुटी भारत सरकार ने इस आंदोलन के मद्देनजर सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ के दुरुपयोग पर आपत्ति जताई थी और अनेक अकाउंट व पोस्ट को हटाने का फरमान सुनाया था। जाहिर है, आदत से मजबूर एक्स ने कुछ इंतजार कराने के बाद ही भारत सरकार के आदेश की पालना की है। हालांकि, एक्स आपत्तिजनक खातों को केवल भारत के लिए प्रतिबंधित करेगा, शेष दुनिया में ये खाते व पोस्ट नजर आते रहेंगे। लगे हाथ एक्स ने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का हवाला देते हुए इस कार्रवाई से अपनी वैचारिक असहमति भी जता दी है। क्या एक्स की यह टिप्पणी आपत्तिजनक नहीं है? क्या यह प्रश्न नहीं उठता कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता चीन या रूस जैसे देशों में कहां चली जाती है? 20 से ज्यादा देश हैं, जहां एक्स प्रतिबंधित है। हर देश को अपनी हित-चिंता का हक है, अत: भारत सरकार की चिंता भी जायज है। 
अधूरे मन से ही सही, एक्स को झुकना पड़ा है। लोग भूले नहीं हैं कि कर्नाटक उच्च न्यायालय ने पिछले साल 2021 टेकडाउन आदेशों को चुनौती देने वाली ट्विटर या एक्स की याचिका खारिज कर दी थी और समय पर कार्रवाई करने में नाकाम रहने के लिए अमेरिकी कंपनी पर 50 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया था। इस बार भी कार्रवाई के भय की वजह से ही आदेशों की पालना की है। हालांकि, उसे भारत की उदारता का स्वत: आदर करना चाहिए। यहां उदारता का अर्थ अनुशासनहीनता कतई नहीं है। वाकई इधर, एक्स पर कई टिप्पणियां ऐसी देखी गई हैं, जिनमें अपने निहित स्वार्थ की पूर्ति के लिए सरकार पर प्रहार किए गए हैं। कोई भी सरकार इस बात को स्वीकार नहीं करेगी कि उसके खिलाफ किसी सोशल मंच पर अविश्वास को बढ़ाया जाए। ऐसी टिप्पणियां भी सामने आई हैं, जिनमें हिंसा भड़काने या लोगों को उकसाने की साजिश साफ झलकती है। पिछले किसान आंदोलन के समय ही दिल्ली के लाल किले पर जो हिंसक हमला हुआ था, उसे कौन भूल सकता है? वैसी ही किसी साजिश को अंजाम देने की कोई कोशिश समय रहते नाकाम की जाए, तो इसमें बुराई नहीं है। देश में सेवाएं दे रहे तमाम सोशल मीडिया मंचों को साफ तौर पर यह संदेश देना चाहिए कि भड़काने की कोई साजिश स्वीकार्य नहीं होगी। किसी भी तरह की मांग केवल लोकतंत्र और संविधान के दायरे में हो, यह सुनिश्चित करने में कोई बुराई नहीं है।
सोशल मीडिया में ऐसी अनेक टिप्पणियां दिख जाती हैं, जिनके लिए कारावास की सजा हो सकती है या जुर्माना लग सकता है। जहां तक एक्स का सवाल है, तो यह कंपनी पहले ही 50 लाख रुपये के जुर्माने से बचने के लिए अदालत में गुहार लगा रही है। हालांकि, ऐसे मामलों में अदालतों को जल्दी फैसला लेना चाहिए। सोशल मीडिया कंपनियों की मनमानी पर लगाम लगनी ही चाहिए। ऐसे मंचों पर अपने विचार रखने वालों को पता होना चाहिए कि कोई भी कानून या समाज या देश विरोधी टिप्पणी भारी पड़ सकती है। सरकार के आदेश पर 42 एक्स खातों और 49 लिंक को प्रतिबंधित किया गया है, पर क्या इतना ही पर्याप्त है? सोशल मंचों के दुरुपयोग को रोकने के साथ-साथ लोगों की नाराजगी को दूर करने की कोशिशें भी मुस्तैदी से होनी चाहिए। नफरत फैलाने वाले या सामाजिक सद्भाव से खेलने वाले जिस किसी दल या संगठन के हों, प्रतिबंध और दंड के हकदार हैं। 

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