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कश्मीर में बदलाव

जम्मू-कश्मीर के शासन-प्रशासन में सुधार का क्रम जारी है और इसी कड़ी में लोकसभा में दो संशोधन विधेयकों का पारित होना सुखद व स्वागतयोग्य है। देश के अनुरूप इस केंद्रशासित प्रदेश को मुख्यधारा में लाने...

कश्मीर में बदलाव
Pankaj Tomarहिन्दुस्तानWed, 06 Dec 2023 10:23 PM
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जम्मू-कश्मीर के शासन-प्रशासन में सुधार का क्रम जारी है और इसी कड़ी में लोकसभा में दो संशोधन विधेयकों का पारित होना सुखद व स्वागतयोग्य है। देश के अनुरूप इस केंद्रशासित प्रदेश को मुख्यधारा में लाने के तमाम प्रयास जरूरी हैं। जम्मू एवं कश्मीर पुनर्गठन (संशोधन) विधेयक के पारित होने से इस क्षेत्र के प्रतिनिधित्व में विस्तार होगा। कश्मीरी प्रवासी समुदाय के दो प्रतिनिधि और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) से विस्थापित लोगों का भी एक प्रतिनिधि केंद्रशासित प्रदेश की विधानसभा में नामित किया जाएगा। यह बात छिपी नहीं है कि विगत वर्षों में बड़ी संख्या में लोग जम्मू-कश्मीर से पलायन करने को मजबूर हुए हैं। यह संख्या एक से तीन लाख तक बताई जाती है। पलायन करने वालों में पंडितों की संख्या सबसे ज्यादा है। जो एक बार घाटी से निकले, तो फिर लौट न पाए। बड़ी संख्या में ऐसे कश्मीरी पंडित हैं, जो कभी कश्मीर जाने की हिम्मत नहीं कर सके। ऐसे लोगों के बीच से जब प्रतिनिधि विधानसभा के लिए नामित होंगे, तो जाहिर है, वंचितों-शोषितों को एक आधिकारिक आवाज मिलेगी, अपनी विधानसभा में उनका दर्द भी दर्ज होगा। अत: यह एक बड़ी जरूरी राजनीतिक-सामाजिक पहल है, इससे अलगाववादियों को भी मुंहतोड़ जवाब मिल सकेगा।  
इसके अलावा पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर का भी एक प्रतिनिधि जम्मू-कश्मीर विधानसभा में नामित होगा। जाहिर है, इसमें ऐसे कश्मीरी नेताओं को आवाज मिलेगी, जो पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर के हैं और कहीं बाहर रहने को मजबूर हैं। पाक अधिकृत कश्मीर को वापस लेने के संकल्प के मद्देनजर यह पहल महत्वपूर्ण है। वास्तव में, विधानसभा में कश्मीरी पंडितों और पाक अधिकृत क्षेत्र के कश्मीरियों की आवाज के बिना जम्मू-कश्मीर की बात पूरी नहीं होती थी। देखने में ये कदम छोटे लग सकते हैं, लेकिन इनका प्रभाव विशेष रूप से घाटी की राजनीति पर पड़ना तय है। अब यह सरकारों पर निर्भर करेगा कि जम्मू-कश्मीर की विधानसभा में योग्यतम प्रतिनिधित्व पहुंचे और शांति-समाधान की दिशा में काम करे। कोरी राजनीति से अलग कश्मीर के व्यापक हित के बारे में सोचने का समय है। वहां धीरे-धीरे सामान्य हो रही स्थितियों को हर प्रकार से सकारात्मक बल देना होगा। आंकड़े गवाह हैं और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने पूरे तथ्यों के साथ लोकसभा में बताया है कि पहले और आज के कश्मीर की जमीनी हकीकत में बहुत बदलाव आया है। कश्मीर में जनजीवन जैसे-जैसे सामान्य हो रहा है, उससे सरकार की भी उम्मीदें बढ़ रही हैं। 
साथ ही, जम्मू-कश्मीर आरक्षण (संशोधन) विधेयक के जरिये कश्मीर में आरक्षण का वही स्वरूप हो जाएगा, जो बाकी देश में है। देश में एक विधान, एक निशान, एक प्रधान के अनुरूप ही आरक्षण में एकरूपता जरूरी है। पिछड़ी जातियों को आरक्षण का लाभ देना जरूरी है, ताकि चंद लोगों का परंपरागत वर्चस्व टूट जाए। कश्मीर में ही बड़ी संख्या में ऐसी जातियां रही हैं, जो आरक्षण या किसी भी प्रकार की विशेष सहूलियतों से वंचित हैं, ऐसी तमाम जातियों को विधिवत आरक्षण देकर आगे बढ़ाना कश्मीर के लिए लाभप्रद है। अब पिछड़े गांवों में रहने वाले सामाजिक और शैक्षिक रूप से वंचित लोगों व नियंत्रण रेखा के करीब रहने वालों को भी आरक्षण मिल सकेगा। जाहिर है, हम नए विकासशील कश्मीर की ओर बढ़ रहे हैं।  

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