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28 अक्तूबर, 2020|11:19|IST

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एकजुट एनसीआर

नई दिल्ली राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के संबंध में सुप्रीम कोर्ट का निर्देश न केवल स्वागतयोग्य, बल्कि अनुकरणीय भी है। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में पिछले दिनों सीमा बंद करने संबंधी जो विवाद देखे गए थे, उसके नतीजतन हमारे स्थानीय प्रशासनों को पहले ही आगे बढ़कर कोई सर्वसम्मत रास्ता निकाल लेना चाहिए था, पर जब उदासीनता बरती, तब सुप्रीम कोर्ट की जरूरत पड़ी। अब सुप्रीम कोर्ट ने एक हफ्ते का समय दिया है और दिल्ली, हरियाणा व उत्तर प्रदेश को मिलकर एनसीआर व अंतर-राज्यीय आवागमन के संबंध में साझा नीति बनानी है। दूसरे निर्देश में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को तीनों राज्यों के साथ मिलकर एक साझा पोर्टल बनाने का फैसला लेने को कहा है। कोर्ट ने अपने निर्देश में साफ तौर पर कहा है कि एनसीआर को सतत नीति, एक नीति, एक रास्ता और एक पोर्टल की जरूरत है। यदि इन निर्देशों के अनुरूप काम हुआ, तो एनसीआर क्षेत्र का कायाकल्प हो जाएगा। 
ऐसा नहीं है कि एनसीआर की कल्पना में परस्पर परिवहन समन्वय या साझा मंच की बात नहीं थी, लेकिन निजी हाथों के जरिए जिस तेजी से इस क्षेत्र का विकास होने दिया गया, उसकी वजह से साझापन और उसकी जरूरत की चर्चा भी कहीं हाशिये पर चली गई। कभी यह सुनने में नहीं आया कि तीनों राज्यों के अधिकारियों की बैठक हो रही है, जिसमें सारे विवाद या तनाव दूर कर लिए जाएंगे। विगत तीस-चालीस वर्षों में जो भी फैसले एनसीआर को लेकर हुए हैं, वे तात्कालिक रहे हैं। कहीं कोई समस्या आई, तो उसे फौरी तौर पर सुलझा लिया गया, लेकिन मिल-बैठकर हमेशा के लिए साझा नीति तय करने का काम अभी शेष है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर ही सही, अब तीनों राज्यों को मिलकर हमेशा के लिए सीमा, सीमा बंदी, वाहन-परिवहन संबंधी समस्याओं को सुलझा लेना चाहिए। एनसीआर एक ऐसा क्षेत्र है, जहां के आवागमन को रोका नहीं जा सकता और एक याचिकाकर्ता ने उचित ही अनुच्छेद 19 का हवाला देते हुए सुप्रीम कोर्ट में गुहार लगाई है। वाकई भारत में संविधान ने लोगों को कहीं आने-जाने का अधिकार दे रखा है, जिसे सरकारें मनमाने ढंग से बाधित नहीं कर सकतीं। बाधा पैदा करने की जरूरत अगर पड़ेगी, तो उसके लिए भी एक तार्किक नीति बनाने की जरूरत है और इस दिशा में सुप्रीम कोर्ट के निर्देश का खासा महत्व है। 
इतना तय है कि एनसीआर में तरह-तरह की नीतियां नहीं चल सकतीं और यदि इस क्षेत्र को विकास का सच्चा इंजन बनना है, तो जरूरी नीतियों में एकरूपता होनी चाहिए। सुख-सुविधा-संसाधन साझा करने संबंधी फैसले भी तार्किक और मानवीय होने चाहिए। कोविड-19 की पृष्ठभूमि में अगर देखें, तो भी एनसीआर को साझा रणनीति की जरूरत है। कहीं ज्यादा मरीज होंगे, कहीं कम होंगे, पर जब नीति लागू होगी, तो उसके नियम-कायदे समान होने चाहिए। ऐसा न हो कि किसी एक राज्य के एकतरफा फैसले से दूसरे के मन में खटास पैदा हो। एनसीआर का साझा पोर्टल बने, तो उसके जरिये साझा पास या परमिट भी बने। एनसीआर में जहां तक संभव हो, तीनों राज्यों की नीतियां साझी हों। यह समय परस्पर रोष का नहीं, बल्कि मिलकर फैसला लेने का है। जो भी नीति बने, समन्वय व समय से बने और पूरी तरह से लागू हो, ताकि एनसीआर देश के दूसरे बडे़ शहरों के सामने एक मिसाल बन जाए।

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  • Web Title:hindustan editorial column 5 may 2020