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शेयर बाजार में तेजी

एग्जिट पोल के नतीजों के बाद जब सोमवार को भारतीय शेयर बाजार खुले, तो सूचकांक तेजी से चढ़ने लगा। बीएसई जहां 2,000 से भी ज्यादा अंकों तक उछला, तो निफ्टी में भी लगभग उतनी ही बढ़त देखी गई। एक दिन में देश...

शेयर बाजार में तेजी
Pankaj Tomarहिन्दुस्तानMon, 03 Jun 2024 10:58 PM
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एग्जिट पोल के नतीजों के बाद जब सोमवार को भारतीय शेयर बाजार खुले, तो सूचकांक तेजी से चढ़ने लगा। बीएसई जहां 2,000 से भी ज्यादा अंकों तक उछला, तो निफ्टी में भी लगभग उतनी ही बढ़त देखी गई। एक दिन में देश के दोनों शेयर बाजार के सूचकांक का तीन-तीन प्रतिशत से ज्यादा बढ़ना बहुत मायने रखता है। पहली संभावना यही है कि बाजार में एग्जिट पोल के नतीजों के बाद केंद्र सरकार की स्थिरता को बल मिला है, जिससे निवेशकों का मनोबल बढ़ा है। विपक्षी दल चूंकि आर्थिक रूप से बड़े परिवर्तन के साथ सत्ता संभालने के इच्छुक हैं, इसलिए निवेशकों में आशंका है। ऐसे में, भाजपा के पक्ष में परिणाम आते देखे, निवेशकों का उत्साह बढ़ा हो, तो अचरज की बात नहीं। बाजार को यथास्थिति या फिर आर्थिक संबल-सहयोग की जरूरत होती है। यह माना जाता है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार के समय हर प्रकार के निवेशकों को बल मिला है, इसी का परिणाम है कि साल 2014 में बीएसई 25,000 अंकों से ज्यादा पर था और अब 76,400 अंकों से ज्यादा पर पहुंच गया है। यह वृद्धि गौरवान्वित करती है। यह संकेत करती है कि भारत में आर्थिक निवेश बढ़ रहा है।
विगत दस वर्षों में सूचकांक में तीन गुना से भी ज्यादा वृद्धि हुई है। वैसे मनमोहन सिंह सरकार के दस वर्षों में भी शेयर बाजार में लगभग तीन गुना वृद्धि हुई थी। मंदी का बुरा दौर मनमोहन सिंह की सरकार ने भी देखा और नोटबंदी व लॉकडाउन का नुकसान नरेंद्र मोदी सरकार को भी बहुत हुआ है। तमाम चुनौतियों के बावजूद बुनियादी रूप से भारतीय अर्थव्यवस्था में भारी मांग है और इसी वजह से अर्थव्यवस्था सही तरीके से संचालित हो रही है। चूंकि भारत स्वयं ही एक बढ़ता हुआ बड़ा बाजार है, इसलिए यहां शेयर बाजार में तेजी का बने रहना बहुत चौंकाता नहीं है। दूसरी ओर, केवल एग्जिट पोल की वजह से नहीं, बल्कि व्यापकता में भारतीय अर्थव्यवस्था के प्रति सकारात्मक भाव के चलते यह वृद्धि हो रही है। निवेशक एग्जिट पोल के बाद दो दिन इंतजार भी कर सकते थे, नतीजे आने के बाद निवेश ज्यादा आश्वस्तकारी होता, लेकिन ऐसा लगता है कि बहुत से निवेशकों को धन कमा लेने की जल्दी है। ऐसे में, बडे़ निवेश सलाहकार यही सलाह देते हैं कि छोटे निवेशकों को निवेश के लिए कुछ इंतजार करना चाहिए। तीन प्रतिशत से ज्यादा की लगभग ऐतिहासिक छलांग में निवेश के कुशल खिलाड़ी ही भाग लें, तो ज्यादा बेहतर है। ऐसा लगता भी है कि सोमवार की बड़ी छलांग के पीछे कुशल खिलाड़ी ही ज्यादा सक्रिय रहे हैं।
आने वाले दिन शेयर बाजार के लिए बहुत अहम होंगे। आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास की अध्यक्षता वाली मौद्रिक नीति समिति की बैठक 5 से 7 जून को होने वाली है। ज्यादा संभावना यही है कि रिजर्व बैंक रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं करेगा। रिजर्व बैंक के अनुसार, अर्थव्यवस्था अभी ठीक स्थिति में है, अत: किसी तरह का मौद्रिक जोखिम उठाना ठीक नहीं होगा। रिजर्व बैंक आज मजबूत स्थिति में है और उसने केंद्र सरकार को भी धन दिया है। रिजर्व बैंक भारतीय रुपये का समर्थन करने के लिए तरलता का ध्यान रखेगा। चुनाव खत्म होने के साथ ही तरलता की कमी दूर हो सकती है, आने वाले महीनों में सरकारी खर्च में बढ़ोतरी देखने को मिलेगी। सरकारी खर्च जब बढ़ेगा, तो फिर शेयर बाजार को संबल मिलेगा। कुल मिलाकर, इस वर्ष शेयर बाजार की बढ़त-चमक बनी रहेगी। 

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