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27 नवंबर, 2020|5:01|IST

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महिलाओं की मजबूती

कोरोना वायरस क्या लैंगिक भेदभाव कर रहा है? एक शोध ने तो यही इशारा किया है कि कोरोना से महिला और पुरुष संक्रमित तो समान रूप से हो रहे हैं, पर जान गंवाने वालों में पुरुषों की संख्या लगभग दोगुनी है। महिलाओं के ठीक होने की संभावना अधिक है। विज्ञान पत्रिका नेचर  में प्रकाशित शोध ने मोटे तौर पर यह बता दिया है कि कोविड-19 के मामले में महिलाओं की रोग प्रतिरोधक क्षमता ज्यादा है। हर उम्र की महिलाएं कोरोना से लड़ने में पुरुषों की तुलना में ज्यादा कामयाब हो रही हैं। स्वास्थ्य क्षमता का यह पैटर्न कमोबेश हर देश में समान है। 
अमेरिका में वेक फॉरेस्ट बैपटिस्ट मेडिकल सेंटर के शोधकर्ताओं ने स्त्रियों की इस मजबूती के लिए विशेष हार्मोन एस्ट्रोजेन को जिम्मेदार माना है। यह हार्मोन हृदय में मौजूद एंजियोटेंसिन-कन्वर्टिंग एंजाइम2 (एसीई2) के स्तर को कम कर देता है, जिससे महिलाओं में कोविड-19 का खतरा घट जाता है। शोध समीक्षा के प्रमुख लेखक प्रोफेसर लीन स्नेबन ने कहा है, ‘हम जानते हैं, कोरोना वायरस हृदय को प्रभावित करता है और हम यह भी जानते हैं कि महिलाओं में हृदय रोग के मामले में एस्ट्रोजेन सुरक्षात्मक भूमिका अदा करता है, इसलिए सबसे अधिक संभावना है कि लिंगों के बीच यही हार्मोनल अंतर खास हो जाता है।’ शोधकर्ताओं के मुताबिक, एसीई2 हृदय, धमनियों, गुर्दे और आंतों में कोशिका झिल्ली से जुड़ा होता है, कोविड-19 के लिए जिम्मेदार वायरस को यही आत्मसात करता है। एसीई2 ही वायरस को कोशिकाओं के अंदर ले जाने में मदद करता है। स्त्रियों में एस्ट्रोजेन पाया जाता है, जो एसीई2 के स्तर को कम कर देता है और महिलाओं में कोरोना वायरस के खतरे पर लगाम लगाता है। बेशक, इस शोध से कोरोना के उपचार में सहायता मिल सकती है। इससे औषधि विकास में भी मदद मिलेगी। एसीई2 एवं एस्ट्रोजेनिक हार्मोन पर आगे और शोध की जरूरत है, ताकि कोरोना के अलावा भी अन्य संक्रामक रोगों के मामले में इसके प्रभाव को जांचा जा सके। क्या मानव शरीर में एस्ट्रोजेनिक हार्मोन का विकास अलग से किया जा सकता है? क्या इस हार्मोन के विकास से पुरुषों की क्षमता भी बढ़ाई जा सकती है? शोधकर्ताओं को इस दिशा में काम करना चाहिए। 
बहरहाल, भारत में जो आंकडे़ उपलब्ध हैं, उनके अनुसार, कोरोना से मरने वालों में 69 प्रतिशत पुरुष व 31 प्रतिशत महिलाएं हैं। वैसे, पुरुषों पर जो खतरा मंडरा रहा है, उसके लिए सिर्फ हार्मोन जिम्मेदार नहीं हैं। पुरुषों की गलत आदतों, नशाखोरी, मधुमेह, तनाव आदि से भी उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता कम रहती है। कई शोध हमें पहले भी बता चुके हैं कि महिलाओं की रोग प्रतिरोधक क्षमता प्राकृतिक रूप से पुरुषों की तुलना में ज्यादा होती है। स्त्रियां जहां थोड़ी-सी सावधानी से अपनी क्षमता बढ़ा सकती हैं, वहीं पुरुषों को अपनी क्षमता सुधारने के लिए ज्यादा मेहनत, लगन की जरूरत पड़ती है। वैसे विशेषज्ञ यह भी इशारा कर रहे हैं कि भारत में महिलाओं की मौत पूरी तरह से दर्ज नहीं हो रही है। प्रकृति ने भले ही स्त्रियों को ज्यादा क्षमता के साथ पैदा किया हो, लेकिन मनुष्य ने जिस समाज व्यवस्था का निर्माण किया है, उसमें स्त्रियों की क्षमता का पोषण बहुत ज्यादा जरूरी है। देश कोई भी हो, परिवार से लेकर अस्पताल तक सेवा का तंत्र अधिक से अधिक महिलाओं पर ही निर्भर है। बेशक, इस शोध से महिलाओं का मनोबल बढ़ेगा।

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  • Web Title:hindustan editorial column 31 august 2020