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घर बैठे इलाज

हिन्दुस्तान Rohit
Tue, 28 Apr 2020 08:04 PM
घर बैठे इलाज

भारत सरकार ने कोरोना से बहुत मामूली रूप से संक्रमित मरीजों को उनके घर में रखकर ही उपचार के जो दिशा-निर्देश जारी किए हैं, वे न केवल प्रशंसनीय, बल्कि अनुकरणीय भी हैं। जिन मरीजों में संक्रमण के बहुत मामूली संकेत हैं या जिनमें कोरोना के लक्षण उभरे नहीं हैं, उन्हें वाकई अस्पताल लाकर भीड़ बढ़ाने की जरूरत नहीं है। ऐसे मरीजों को उनके घर पर ही उपचार किया जा सकता है। ऐसे मरीजों के घर में एकांतवास की सहूलियत होना जरूरी है। साथ ही एक ऐसे समझदार तिमारदार की भी जरूरत पड़ेगी, जो अस्पताल से लगातार जुड़ा रहेगा। विशेष रूप से जो लोग जागरूक या सतर्क हैं, उन्हें इससे बड़ी सहूलियत हो जाएगी। आम तौर पर स्थिति के खराब होने या कोरोना के लक्षणों के उभरने के बाद ही मरीज अस्पतालों में भर्ती किए जा रहे हैं। सरकार के होम आइसोलेशन संबंधी दिशा-निर्देशों का महत्व तभी है, जब मरीज समय रहते सतर्क हो जाएं। ऐसे सतर्क मरीज को अस्पताल की सुविधाओं या भीड़ या डर से दो-चार नहीं होना पडे़गा। घर में एकांतवास में उपचार लाभ करते हुए समय पर बेहतर भोजन, दवा, पानी की सुविधा भी मिल सकेगी। 

सरकार का यह कदम अस्पतालों को मरीजों के गैर-जरूरी बोझ से बचाने के लिए भी जरूरी था। हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि ठीक हो चुके करीब 7,000 मरीजों को छोड़ दें, तो अभी भी अब भारत में संक्रमितों की संख्या करीब 22,000 पहुंच रही है, इन सबकी तिमारदारी की जिम्मेदारी अस्पतालों पर है। इन 22,000 मरीजों में से अगर दस प्रतिशत मरीज भी ऐसे हैं, जिनका उपचार उनके घर के एकांतवास में हो सकता है, तो यह एक बड़ी बात होगी। वैसे भी अस्पतालों में जिस तरह से इलाज हो रहा है, वह भी किसी एकांतवास से कम नहीं है, पर जब घर में ही इलाज चलेगा, तो मरीज के साथ उनके परिजन का भी मनोबल बना रहेगा। 
इसमें कोई शक नहीं कि इस बीमारी का खतरा कायम है, लेकिन उसका भय लगातार कम हो रहा है। हम इस बीमारी से लड़ने के तरीकों का विकास भी करते चल रहे हैं, तो यह जितना स्वाभाविक है, उतना ही जरूरी भी है। हमें मरीजों की बढ़ती संख्या के साथ केवल अस्पतालों और उपलब्ध बिस्तरों के बारे में ही नहीं सोचना है, हमें उन डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ के बारे में भी सोचना है, जो दिन-रात सेवा में जुटकर खुद को जोखिम में डाले हुए हैं। सरकार की होम आइसोलेशन की नीति से चिकित्सा समाज को भी राहत का एहसास होगा। विशेष रूप से सक्षम समाज के मरीज अस्पतालों पर बोझ नहीं बनेंगे। लेकिन होम आइसोलेशन की सुविधा की निगरानी भी बेहतर ढंग से करनी पडे़गी और इसमें स्वयं मरीजों द्वारा यथोचित सहयोग इलाज की बुनियाद होगा। इसके अलावा सरकार को व्यापक रूप से भी सोचना चाहिए, घर बैठे इलाज की सुविधा की जरूरत देश में अभी लाखों उन मरीजों को भी है, जो अन्य गंभीर बीमारियों से ग्रस्त हैं। ऐसे लाखों मरीजों को अस्पतालों ने कोरोना की वजह से घर लौटा दिया है। अब समय आ गया है कि लगभग 35 दिन के लॉकडाउन के उपरांत ऐसे मरीजों को भी घर बैठे हर संभव चिकित्सा सेवा मुहैया कराई जाए। यकीन मानिए, कोरोना से लड़ाई में ऐसे अनेक अच्छे तरीके हमें हासिल होंगे, जो भविष्य में तमाम बीमारियों से लड़ने में काम आएंगे।

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