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चरणबद्ध रियायत

हिन्दुस्तानRohit
Mon, 27 Apr 2020 08:05 PM
चरणबद्ध रियायत

किसी भी देश-समाज को बहुत ज्यादा समय तक लॉकडाउन नहीं रखा जा सकता, इसलिए यदि सरकारें लॉकडाउन को चरणबद्ध तरीके से घटाने की सोच रही हैं, तो उनका स्वागत है। प्रधानमंत्री के नेतृत्व में मुख्यमंत्रियों का ध्यान इस विषय पर गया है और उन्होंने परस्पर यथोचित चर्चा की है। कोई आश्चर्य नहीं, अगर 3 मई के बाद देश में एक साथ लॉकडाउन की बजाय क्षेत्रीय आधार पर लॉकडाउन हों और उनकी बागडोर राज्य सरकारों के हाथों में हो। अभी तक लॉकडाउन का जो अनुभव रहा है, उसके अनुसार, ज्यादातर राज्य सरकारों ने केंद्र के फैसलों का ही अनुसरण किया है। क्षेत्रीय आधार पर लॉकडाउन की रियायत को कम या ज्यादा करने का अधिकार पहले भी राज्य सरकारों के पास ही था और 3 मई के बाद उनकी जिम्मेदारी निस्संदेह बढ़ जाएगी। देश के नौ मुख्यमंत्रियों के साथ लाइव वीडियो-बैठक में प्रधानमंत्री ने स्पष्ट कर दिया कि राज्य सरकारें अपने-अपने राज्य को रेड, ऑरेंज और ग्रीन जोन में बांट लें। यह तरीका उचित भी है और इसकी चर्चा न केवल विशेषज्ञ, बल्कि कुछ राज्यों के मुख्यमंत्री भी करते रहे हैं। इस पर केंद्र सरकार का सहमत होना भविष्य के लॉकडाउन की रूपरेखा तय करेगा। 
विशेष रूप से भारत में आर्थिक बेचैनी बढ़ रही है। आर्थिक रूप से टूटने वाला भारत सामाजिक और सांस्कृतिक रूप से भी कमजोर पड़ जाएगा, इसलिए 40 दिन के लॉकडाउन के बाद यह जरूरी है कि लोग अपनी कमाई की और सरकारें राज्य-देश के विकास की चिंता करें। यह एक और अच्छी बात है कि प्रधानमंत्री अर्थव्यवस्था के प्रति भी सकारात्मक भाव दर्शा रहे हैं, वरना जनता को अपने सीधे संबोधनों में वह कुछ साल ‘पीछे चले जाने’ को लेकर चेताते रहे हैं। बेशक, प्रतिकूल परिस्थितियों में भी प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्रियों को सकारात्मक सोच बनाए रखने की जरूरत है। जो समाज एक महीने से भी ज्यादा समय से लॉकडाउन भुगत रहा है, वहां लोग यही चाहेंगे कि सरकारें उम्मीद से भरी रहें और कुशल अभिभावक की तरह अर्थव्यवस्था में फिर तेजी लौटाने के सारे प्रबंध करें। 
कुछ मुख्यमंत्रियों ने लॉकडाउन को जारी रखने की वकालत की है। कहना न होगा, आज सावधानी के साथ साहस की भी जरूरत है। जो सरकार दोनों के बीच तालमेल बिठा सकेगी, वह न केवल अपनी जनता को सुरक्षित रखने में कामयाब होगी, बल्कि अपनी अर्थव्यवस्था को भी मजबूती दे सकेगी। केंद्र सरकार चाहती है कि कोरोना के जो हॉट स्पॉट्स हैं, वहां राज्य सरकारें सख्ती से लॉकडाउन रखें और जो इलाके ग्रीन जोन में आ गए हैं, वहां सावधानी से लोगों को अपने कामकाज में सक्रिय होने दें। उन कंपनियों से भी हमें सीखना चाहिए, जो भविष्य में ज्यादातर काम अपने कर्मचारियों को घर बैठाकर ही लेंगी। सरकारों के काम कम नहीं हुए हैं, बड़ी संख्या में लोग जगह-जगह फंसे हुए हैं। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने ऐसे लोगों के लिए विशेष ट्रेन की मांग की है, कुछ राज्य बस चलाने के पक्ष में हैं। सुरक्षा के तमाम उपायों और शर्तों के साथ इन सुझावों पर केंद्र सरकार को फैसला लेना चाहिए। ताजा बैठक में एक संकेत साफ मिल गया है, यह राज्य सरकारों के लिए भी परीक्षा की घड़ी है, यह सिद्ध हो जाएगा कि उनका शासन-प्रशासन कितना कुशल और सक्षम है।

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