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गरमी और आगजनी

ताप का असर चहुंओर दिखने लगा है। नौतपा के दिन शुरू हो गए हैं। माना जाता है कि सूर्य इन नौ दिनों में पृथ्वी के सबसे करीब आ जाता है। यह क्रम आगामी 2 जून तक चलेगा, पर जून के महीने में उत्तर भारत में...

गरमी और आगजनी
Pankaj Tomarहिन्दुस्तानSun, 26 May 2024 09:26 PM
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ताप का असर चहुंओर दिखने लगा है। नौतपा के दिन शुरू हो गए हैं। माना जाता है कि सूर्य इन नौ दिनों में पृथ्वी के सबसे करीब आ जाता है। यह क्रम आगामी 2 जून तक चलेगा, पर जून के महीने में उत्तर भारत में गरमी से राहत की उम्मीद नहीं है। आगजनी की घटनाएं अचानक से बढ़ गई हैं। देश के अनेक शहरों में आगजनी के मामले कई गुना बढ़ गए हैं। इसी कड़ी में गुजरात के राजकोट में शनिवार को बहुत दुखद हादसा हुआ है। एक गेमिंग जोन में भीषण आग लगने से कई बच्चों समेत 30 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई है। आग लगने का कारण जांच में चाहे जो भी सामने आए, पर इसमें मौसमी तापमान की बड़ी भूमिका है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इस घटना पर गहरा दुख जताया है। गुजरात सरकार की ओर से मृतकों के परिजन को चार लाख और घायलों को 50 हजार रुपये देने की घोषणा ही पर्याप्त नहीं है, जो लोग दोषी हैं या जिन लोगों ने आग से बचने के पूरे इंतजाम नहीं रखे थे, उनके प्रति कतई नरमी बरतने की जरूरत नहीं है। 
इधर दिल्ली में भी मुंडका इलाके में शनिवार को एक कार एसेसरीज फैक्टरी में ऐसी भीषण आग लगी कि बचाव कार्य के लिए रोबोट का इस्तेमाल करना पड़ा। फायर ब्रिगेड की 26 गाड़ियां भी मिलकर जल्दी आग नहीं बुझा पाईं। यहां भी आग का कारण तुरंत पता नहीं चला है, पर मौसम का असर साफ है। दरअसल, अनेक ऐसे कारखाने हैं, जहां गरमी के दिनों में भी काम को धीमा नहीं किया जाता है। चूंकि इन दिनों व्यावसायिक गतिविधियों में तेजी आई है, इसलिए तमाम कारखाने दिन-रात काम कर रहे हैं और आगजनी जैसी दुर्घटना की आशंका बढ़ जा रही है। क्या ऐसे कारखानों को कम से कम दिन के समय रोका जा सकता है, जहां आगजनी की आशंका ज्यादा है? जहां बचाव के इंतजाम पूरे नहीं हैं, वहां तो विशेष रूप से दिन के समय काम रोक देने में ही भलाई है। ध्यान देने की जरूरत है, आगजनी की घटनाएं नोएडा में भी सामने आई हैं, और बाजारों में भी लोगों को सावधानी से रहना सिखाया जा रहा है। उधर, गुरुवार को ही महाराष्ट्र के डोंबिवली के औद्योगिक क्षेत्र में आग लगने से कम से कम दस लोगों की मौत हो गई और 60 से अधिक घायल हो गए। क्या इस रासायनिक कारखाने को भीषण गरमी के समय बिना सुरक्षा इंतजाम के चलाना जरूरी था? दरअसल, ऐसे मामलों में दोषियों को पर्याप्त सजा नहीं मिलती है, इसलिए औद्योगिक क्षेत्रों में आगजनी का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। 
वास्तव में, भीषण गरमी में आगजनी के इतने ज्यादा मामले हैं कि आप गिनते चले जाएंगे। इसके साथ ही चिंता की बात यह भी है कि बिजली की मांग बहुत बढ़ गई है। बड़े पैमाने पर वातानुकूलित यंत्रों का इस्तेमाल हो रहा है। मिसाल के लिए, दिल्ली में अब बिजली की मांग रिकॉर्ड 8,000 मेगावाट के पार चली जा रही है। नतीजा साफ है, जिस दिन मांग ने रिकॉर्ड तोड़ा, उस दिन राष्ट्रीय राजधानी में आगजनी के अनेक मामले सामने आए। अकेले एक शहर दिल्ली की शिकायतों पर गौर कीजिए, तो मई के पहले 20 दिनों में ही आग लगने की कॉल की संख्या पिछले साल की तुलना में दोगुनी से अधिक, 2,280 तक पहुंच गई। दिल्ली का अनुभव यह बताता है कि आग लगने के पचास प्रतिशत से ज्यादा मामलों में विद्युत संबंधी गड़बड़ी या कोताही ही जिम्मेदार होती है। अत: यह समय घर-घर सावधानी बरतने का है और प्रशासन को भी चौबीस घंटे सचेत रहना चाहिए। 

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