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जी-20 की चिंता

भारत की अध्यक्षता में आयोजित आखिरी जी-20 शिखर सम्मेलन का आयोजन जितना सुखद है, उससे भी ज्यादा स्वागतयोग्य है कि इस समूह के देश इजरायल-हमास संघर्ष के जल्दी खत्म होने की उम्मीद रखते हैं। भारत की...

जी-20 की चिंता
Amitesh Pandeyहिन्दुस्तानWed, 22 Nov 2023 10:48 PM
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भारत की अध्यक्षता में आयोजित आखिरी जी-20 शिखर सम्मेलन का आयोजन जितना सुखद है, उससे भी ज्यादा स्वागतयोग्य है कि इस समूह के देश इजरायल-हमास संघर्ष के जल्दी खत्म होने की उम्मीद रखते हैं। भारत की प्रेरणा से बुधवार को आयोजित वर्चुअल या आभासी शिखर सम्मेलन में दुनिया के अनेक दिग्गज नेताओं ने हिस्सा लिया। सम्मेलन की अध्यक्षता करते हुए भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दोटूक कहा है कि यह सुनिश्चित करना जरूरी है, गाजा में इजरायल और हमास के बीच छिड़ा संघर्ष क्षेत्रीय युद्ध में न बदलने पाए। वाकई जी-20 के नेताओं के लिए युद्ध रोकना प्राथमिकता होनी चाहिए। नई दिल्ली में 9-10 सितंबर को आयोजित मुख्य शिखर सम्मेलन में भी रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध का तनाव साफ तौर पर दिखा था। बहुत मुश्किल से एक बीच की राह निकाली गई थी, पर अब जब वर्चुअल सम्मेलन हुुआ है, तब गाजा में छिड़े युद्ध की चर्चा का अहम होना कदापि नहीं चौंकाता। जी-20 के देश अगर अपने आर्थिक प्रभाव से युद्ध को रोक सकें, तो इससे बेहतर कुछ नहीं हो सकता। युद्ध के खिलाफ भारत की टिप्पणियों और प्रयासों के लिए भी भारतीय अध्यक्षता को याद किया जाएगा। ध्यान रहे, जी-20 की स्थापना दुनिया के विकसित और विकासशील देशों के बीच आर्थिक समन्वय बढ़ाने के मकसद से हुई थी। जब आर्थिक समन्वय बढ़ता है, तब देशों के बीच सामरिक या कूटनीतिक तनाव भी कम होता है। 
वैसे तो जी-20 का 18वां शिखर सम्मेलन सितंबर में ही संपन्न हो गया था, पर भारत के प्रयासों से यह विशेष आभासी सम्मेलन हुआ है। इसमें अमेरिकी और चीनी राष्ट्रपति को छोड़ लगभग सभी देशों के प्रमुख नेताओं ने भाग लिया। भारत की अध्यक्षता का समय 30 नवंबर को समाप्त हो जाएगा और उसके बाद 1 दिसंबर से ब्राजील के नेता लूला डी सिल्वा के पास कमान औपचारिक रूप से चली जाएगी। यह कहने में हर्ज नहीं कि अगर रूस-यूक्रेन युद्ध न छिड़ा होता, तो भारत में जी-20 का आयोजन और शानदार होता। जिस धूमधाम से भारत में आयोजन हुआ है, उसका कोई सानी नहीं है। दुनिया में अनेक जगह प्रतिकूल स्थितियों के बावजूद नई दिल्ली के घोषणापत्र को सर्वसम्मति से अपनाया गया है। बहुत महत्वाकांक्षी, समावेशी, निर्णायक और कार्रवाई-उन्मुख तरीके से वैश्विक चुनौतियों के समाधान के लिए जी-20 के तमाम नेता प्रतिबद्ध दिखे हैं। 
बुधवार को जी-20 का वर्चुअल सम्मेलन अपने आप में विरल आयोजन है। इसमें भी इतने आला नेताओं का शामिल होना एक बड़ी कामयाबी है और संकेत भी कि ये नेता परस्पर सहयोग बढ़ाने के पक्ष में हैं। वास्तव में, भारत ने 150 से अधिक विश्व नेताओं की भागीदारी के साथ एक ही वर्ष में चार ऐसी बैठकें आयोजित की हैं, जो वैश्विक स्तर पर भारत की संयोजन शक्ति का प्रमाण है। भारत जी-20 देशों की चिंताओं के साथ ही ग्लोबल साउथ के देशों की समस्याओं को भी पर्याप्त महत्व दे रहा है। कई बड़े फैसले हैं, जो भारत की अध्यक्षता में लिए गए हैं। 2030 तक वैश्विक स्तर पर अक्षय ऊर्जा क्षमता को तीन गुना करने और 2030 तक ऊर्जा दक्षता सुधार की वैश्विक दर को दोगुना करने पर भी सहमति बनी है। भारत की अध्यक्षता के समय ही अफ्रीकी संघ को जी-20 में शामिल किया गया, इसे भी प्रधानमंत्री मोदी ने बुधवार को याद किया है। भारत ने समन्वय व सार्थक प्रयासों को आगे बढ़ाया है और आगे यही काम ब्राजील को करना है। 

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