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23 सितम्बर, 2020|2:14|IST

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घर वापसी की शुरुआत

पराये प्रदेश में फंसे लोगों को उनके अपने प्रदेश पहुंचाने के लिए शुक्रवार को श्रमिक दिवस पर जो पहली श्रमिक स्पेशल ट्रेन चली, उसका न केवल स्वागत, बल्कि अनुकरण करना चाहिए। करीब 40 दिन के लॉकडाउन के उपरांत देश को फिर जोड़ने वाली जो ट्रेन तेलंगाना के लिंगमपल्ली से झारखंड के हटिया के लिए रवाना हुई है, वह देश के लिए किसी खुशखबरी से कम नहीं है। अब केरल से ओडिशा और महाराष्ट्र से बिहार, उत्तर प्रदेश के लिए ट्रेनों का जरूरी सिलसिला चल पड़ेगा। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे सहित कम से कम चार राज्यों के मुख्यमंत्री विशेष रेल की मांग करते आ रहे थे। 
केंद्र सरकार और रेलवे अब बहुत नियोजित तरीके से विशेष रेल चलाने की नीति पर चल पड़ा है, इससे देश में राहत का एहसास बढ़ना चाहिए। ऐसी रेल एक जगह से चलेगी और केवल अपनी मंजिल पर जाकर रुकेगी। बीच में कहीं रुकने का प्रावधान नहीं है। एक बॉगी में 54 ही यात्री 1.5 मीटर की परस्पर दूरी बनाकर यात्रा कर सकेंगे। उम्मीद है, बीच में न रुकने वाली ट्रेनों में पर्याप्त भोजन-पानी की व्यवस्था होगी। इसके अलावा लौट रहे लोगों की चिकित्सा जांच और कुछ दिन क्वारंटीन में रखने की व्यवस्था भी चाक-चौबंद होनी चाहिए। एक साथ 1,200 या 1,600 लोगों को अपने यहां लाने का खतरा उठा रहे राज्यों को अपनी ओर से भी पूरे इंतजाम रखने चाहिए। विशेष रूप से बिहार और उत्तर प्रदेश जैसे जनबहुल राज्यों में करीब 45 लाख लोगों के लौटने का अनुमान है, अत: इतनी बड़ी संख्या में लोगों को सुरक्षित रखना और उनकी यथोचित जांच करना एक बड़ा काम होगा। उन्हीं राज्य सरकारों को यह जोखिम मोल लेना चाहिए, जिनके पास पूरे संसाधन और इंतजाम हैं। केंद्र सरकार ने अगर इस घर वापसी योजना को मंजूरी दी है, तो उसकी भी जिम्मेदारी बनती है कि वह जरूरतमंद राज्यों की मदद करे और किसी भी संदिग्ध को यात्रा से रोका जाए। जो राज्य सक्षम नहीं हैं, उन्हें खुद को खतरे में नहीं डालना चाहिए और जो राज्य सक्षम हैं, उन्हें अपने यहां से श्रमिकों को जाने नहीं देना चाहिए।   
फंसे हुए पर्यटक, तीर्थयात्री, मजदूर, छात्र इत्यादि जब लौटने लगे हैं, तब सरकारों और विशेष रूप से रेलवे को अपनी नीतियां स्पष्ट रखनी चाहिए कि कहां से कहां के लिए किन परिस्थितियों में ट्रेन चलाना है। यह संदेश लोगों के बीच नहीं जाना चाहिए कि तेलंगाना से झारखंड के लिए यह ट्रेन तभी चलाई गई, जब वहां मजदूर विरोध प्रदर्शन पर उतर आए। पराये प्रदेशों से आई मजदूरों की आबादी रखने वाली सरकारों के लिए यह बहुत सावधानी और समझदारी का समय है, क्योंकि कुछ मजदूरों के लौटने से बाकी मजदूरों में भी बेचैनी बढ़ेगी। अत: घर लौटाने की नीति बहुत पारदर्शी और न्यायपूर्ण होनी चाहिए। फंसे हुए लोगों के बीच विशेष रेल को लेकर किसी प्रकार का असंतोष नहीं होना चाहिए। वापसी का यह अभियान बहुत बड़ा है, ऐसे लोगों की पूरी जानकारी रखना, उनकी पूरी जांच करना और उन्हें अपने-अपने घर तक फिजिकल डिस्टेंसिंग रखते हुए सुरक्षित पहुंचाना। यह केवल राज्य सरकारों, अधिकारियों और चिकित्सा समाज के लिए ही परीक्षा की घड़ी नहीं है, यह हम नागरिकों के लिए भी अपने कर्तव्य निभाने और सरकार की पहल की लाज रखने का समय है।

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  • Web Title:hindustan editorial column 2 may 2020