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नॉटी बॉय कामयाब

मौसम विज्ञान के क्षेत्र में अपनी पकड़ मजबूत बनाने की दिशा में भारतीय अंतरिक्ष संस्थान इसरो ने नई कामयाबी हासिल की है। शनिवार की शाम श्रीहरिकोटा से तीन चरण वाले जीएसएलवी ने उड़ान भरने के लगभग 18 मिनट...

नॉटी बॉय कामयाब
Pankaj Tomarहिन्दुस्तानSun, 18 Feb 2024 10:54 PM
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मौसम विज्ञान के क्षेत्र में अपनी पकड़ मजबूत बनाने की दिशा में भारतीय अंतरिक्ष संस्थान इसरो ने नई कामयाबी हासिल की है। शनिवार की शाम श्रीहरिकोटा से तीन चरण वाले जीएसएलवी ने उड़ान भरने के लगभग 18 मिनट बाद इन्सैट-3डीएस को जियोसिंक्रोनस ट्रांसफर ऑर्बिट (जीटीओ) में तैनात कर दिया। यह ऑर्बिट या कक्षा पृथ्वी से 35,786 किलोमीटर ऊपर स्थित है। इस ऊंचाई पर एक सैटेलाइट या उपग्रह उतने ही समय में एक कक्षा पूरी करता है, जितने समय में हमारा ग्रह अपनी धुरी पर एक चक्कर लगाता है, यह पृथ्वी के एक दिन के समान है। यह दूरसंचार और मौसम उपग्रहों के लिए एक लोकप्रिय कक्षा है, जहां से लगभग स्थिर भाव से उपग्रह अपने लक्ष्य पर निगाह बनाए रख सकता है। यह मौसम पूर्वानुमान और आपदा चेतावनी के लिए उन्नत मौसम संबंधी अवलोकन और भूमि व महासागरों की निगरानी के लिए डिजाइन किया गया है। मौसम विज्ञान एक ऐसा क्षेत्र है, जिसमें भारत को तेज तरक्की करने की जरूरत है, क्योंकि अपनी विविध भौगोलिक स्थिति की वजह से यह अनगिनत प्रकार की चुनौतियों से जूझ रहा है।
सैटेलाइट को कक्षा में स्थापित करने की जिम्मेदारी जिस विमानन वाहन पर थी, उसे नॉटी बॉय कहा जा रहा है। इसरो के एक दिग्गज वैज्ञानिक ने लॉन्चिंग की सफलता के बाद खुशी से कहा है कि शरारती लड़का अब आज्ञाकारी हो गया है। दरअसल, इस लॉन्चिंग रॉकेट को पुख्ता करने में बहुत समस्या आ रही थी। इसी वजह से इसे शरारती लड़का या नॉटी बॉय कहा गया। अगर भारतीय अंतरिक्ष वैज्ञानिकों ने इस शरारती लड़के को अनुशासित बना दिया है, तो यह अपने आप में बड़ी कामयाबी है। तरह-तरह के उपग्रह विकसित कर लेने से कहीं ज्यादा चुनौतीपूर्ण है, उपग्रहों को उचित कक्षाओं में स्थापित करने की क्षमता हासिल करना। वास्तव में, इस समग्र लॉन्चिंग वाहन से यह 16वां प्रक्षेपण था और इसका सफल होना बहुत जरूरी था। मौसम संबंधी उपग्रहों में लगातार विकास हो रहा है और नए-नए उपग्रहों को कक्षाओं में स्थापित करना जरूरी है, ताकि सही भविष्यवाणियों की स्थिति बनी रहे। इसरो के लिए यह बहुत अच्छा समय है। विगत महीनों में इसरो ने कुछ बड़ी सफलताएं हासिल की हैं। उदाहरण के लिए, अगस्त 2023 में देश अपने चंद्रयान-3 लैंडर-रोवर मिशन के साथ चंद्रमा-लैंडिंग क्लब में शामिल हो गया। इसके बाद भारत ने आदित्य-एल1 को भी लॉन्च किया है। इसी वर्ष 1 जनवरी को देश ने ब्लैक-होल का अध्ययन करने वाले एक्स-रे पोलारिमीटर उपग्रह को लॉन्च किया है। 
कोई शक नहीं है कि भारतीय अंतरिक्ष विज्ञान ने एक लंबा सफर तय कर लिया है, दो साल बाद भारत के पहले उपग्रह आर्यभट्ट को पचास साल हो जाएंगे। 19 अप्रैल, 1975 को रूस ने भारत के आर्यभट्ट को कक्षा में स्थापित किया था। उसके बाद से भारत इस यात्रा में दुनिया के अनेक देशों से आगे निकल गया है। भारत अभी तक 130 से ज्यादा उपग्रह लॉन्च कर चुका है। वह दूसरे देशों की मदद में भी आगे है। मौसम विज्ञान की बात करें, तो साल 2002 में सफलता के साथ लॉन्च हुआ कल्पना-1 भारत का पहला मौसम संबंधी उपग्रह था। आज इसरो इस स्थिति में पहुंच गया है कि नासा आगे बढ़कर उसके साथ अभियान पर काम कर रहा है। संदेश स्पष्ट है कि भारतीय अंतरिक्ष विज्ञान का भविष्य उज्ज्वल है। 

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