DA Image
27 नवंबर, 2020|4:11|IST

अगली स्टोरी

जरूरी परिपक्वता

राज्यसभा में रक्षा मंत्री ने भारत का पक्ष जिस तरह से पेश किया, उसकी सराहना होनी चाहिए। पड़ोसी देश के प्रति जहां दृढ़ता का स्वर स्वाभाविक था, वहीं ऐसे समय में भी सुधार के प्रति संवेदना साफ तौर पर सामने आई। तानाशाह पड़ोसी की मनमानियों के बावजूद भारतीय रक्षा मंत्री का बयान देश के बड़प्पन को ही जाहिर करता है। जहां स्वयं न झुकने की बात हुई, वहीं यह भी कह दिया गया कि हम दूसरे का मस्तक भी नहीं झुकाना चाहते। किसी भी पड़ोसी देश की संप्रभुता का इससे ज्यादा सम्मान नहीं हो सकता। ऐसे समय में भी हम जिस स्तर की शालीनता, संयम और समझदारी का परिचय दे रहे हैं, दुनिया देख रही है। चीन का लहजा सामने कुछ होता है व पीठ पीछे कुछ और। वह वार्ता में सहमति बनाने की बात करता है, लेकिन जमीन पर उग्रता बढ़ाने में कोई कसर नहीं छोड़ता। चीन के पूरे संदर्भ में रक्षा मंत्री का बयान एक लोकतांत्रिक और संतुलित देश की ओर से दिया गया माकूल जवाब है। ऐसे बयान की उम्मीद शायद चीन को भी नहीं होगी। उसे खासतौर पर अपनी कथनी और करनी के अंतर को दूर करने के कोशिश जरूर करनी चाहिए। पूरी दुनिया चीन का व्यवहार देख रही है, वह अपनी हरकतों से कतई यह आभास नहीं कराता कि वह संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में स्थाई सदस्यता वाला जिम्मेदार देश है। 
गुरुवार को राज्यसभा में रक्षा मंत्री का बयान जितना महत्वपूर्ण था, उससे कहीं ज्यादा जरूरी था राज्यसभा के सभापति एम वेंकैया नायडू का सुझाव। भारत-चीन संदर्भ में कुछ नेता अतिरिक्त प्रश्न पूछना चाहते थे, इस पर उप-राष्ट्रपति ने रक्षा मंत्री से कहा कि वह प्रमुख नेताओं को अपने कक्ष में बुलाकर जानकारी दें। उप-राष्ट्रपति का यह परिपक्व रुख सराहनीय है। आजकल हर तरह के सवाल पूछने का चलन हो गया है, अनावश्यक रूप से परेशान करने वाले या देश की सुरक्षा को खतरे में डालने वाले सवाल पूछने से भी कई लोगों को गुरेज नहीं रहा। ऐसे लोगों का संयम में रहना सबसे जरूरी है और इसके बावजूद अगर वे सवाल पूछना चाहते हैं, तो उप-राष्ट्रपति ने सार्वजनिक रूप से रास्ता बता दिया है।
इस अवसर पर उप-राष्ट्रपति ने सांसदों को जिस ढंग से समझाया, कायदे से उसकी जरूरत नहीं पड़नी चाहिए थी। उन्होंने याद दिलाया कि यह एक संवेदनशील मुद्दा है और सेना सीमा पर खड़ी है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दुष्प्रचार चल रहा है कि भारत में इस मुद्दे पर मतभेद है। उप-राष्ट्रपति ने उचित ही कहा कि हमें इस सदन के माध्यम से ऐसा संदेश देना चाहिए कि पूरा देश और संसद सेना के साथ एकजुट है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत की परंपरा और संस्कृति वसुधैव कुटुंबकम और सर्वेजना सुखिना भवन्तु पर आधारित रही है। हजारों साल के इतिहास में हमने कभी किसी देश पर हमला नहीं किया है। उप-राष्ट्रपति के ऐसे निवेदन भाषण से माहौल बदल गया। विपक्षी नेता भी देश की एकता और अखंडता की दुहाई देने लगे। राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष गुलाम नबी आजाद ने तो यहां तक कह दिया कि ‘उनकी पार्टी चीन के साथ विवाद सुलझाने के मुद्दे पर पूरी तरह से सरकार के साथ खड़ी है।’ राज्यसभा ने देश की राजनीतिक-विधाई एकजुटता का जो संदेश दिया है, उसी की रोशनी में हमें आगे बढ़ने की जरूरत है, तभी हम जल्द से जल्द किसी समाधान तक पहुंच पाएंगे।

  • Hindi News से जुड़े ताजा अपडेट के लिए हमें पर लाइक और पर फॉलो करें।
  • Web Title:hindustan editorial column 18 september 2020