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10 अप्रैल, 2020|6:31|IST

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क्षितिज से कौन पुकारे

बात करीब 13 साल पुरानी है, ऑस्ट्रेलिया के दो खगोल वैज्ञानिक टेलीस्कोप से मिले पुराने आंकड़ों के रिकॉर्ड खंगाल रहे थे। अचानक उनकी नजर 2001 के एक आंकड़े पर गई। उन्होंने पाया कि उस समय सुदूर क्षितिज के किसी कोने में अचानक रेडियो किरणों का बहुत तेज विस्फोट सा हुआ था, जो महज एक सेकंड के सौवें हिस्से तक रहा, लेकिन टेलीस्कोप के आंकड़ों में वह दर्ज हो गया। उन्होंने इसे फास्ट रेडियो बर्स्ट, संक्षेप में एफआरबी का नाम दिया। वे नहीं जानते थे कि यह विस्फोट कहां हुआ? और सबसे बड़ी बात कि कैसे हुआ? वैज्ञानिकों ने इसके कारण ढूंढ़ने शुरू किए। सही कारण तो अभी तक पता नहीं चला, लेकिन कई तरह की परिकल्पनाएं की जाने लगीं। इनमें सबसे दिलचस्प परिकल्पना यही थी कि दूर आकाश में कहीं कोई विकसित सभ्यता है, जो या तो हमें संदेश भेज रही है, या फिर पूरे ब्रह्मांड को अपने अस्तित्व का संकेत देने की कोशिश कर रही है। हमारी दुनिया में सुदूर आकाश में रहने वाले एलियन की कल्पना का एक बहुत बड़ा बाजार है, जिसने इस तरह की खोज को तुरंत हाथों-हाथ लिया। हमेशा की तरह विज्ञान की एक अबूझ पहेली कहानियों और फिल्मों में पहंुचकर दुनिया की ऐसी समस्याओं को हल करती दिखी, जो हकीकत से ज्यादा फसानों और फंतासियों में ही हैं।

बाद में जब नए और अच्छे टेलीस्कोप बनने लगे, तो वैज्ञानिकों ने इस पर ध्यान दिया और पाया कि इस तरह के विस्फोट आसमान में यदा-कदा होते रहते हैं। क्या वे एलियन द्वारा भेजे गए संदेश हैं? वैज्ञानिकों ने जब रेडियो किरणों के इस विस्फोट का आकलन किया, तो पाया कि ऐसे एक विस्फोट के लिए उतनी ऊर्जा की जरूरत होगी, जितनी हमारा अपना सूर्य हजारों बरस में पैदा करता है। जाहिर है, सुदूर क्षितिज में बसी कोई सभ्यता, चाहे वह कितनी भी विकसित क्यों न हो, सिर्फ अपने अस्तित्व का संदेश देने के भर के लिए इतनी ज्यादा ऊर्जा तो खर्च नहीं ही करेगी। वैज्ञानिकों ने इसके लिए तारों की टक्कर से लेकर ब्लैक होल और ग्रे मैटर जैसी कई परिकल्पनाएं दी हैं, लेकिन कोई भी पूरी तरह आश्वस्त नहीं करती।

इस बीच कनाडा के कुछ खगोल वैज्ञानिकों ने जो पता लगाया, वह और भी ज्यादा हैरत में डालने वाला है। उन्होंने पाया कि सुदूर अंतरिक्ष के एक कोने पर हर कुछ समय बाद रेडियो किरणों के ऐसे विस्फोट हो रहे हैं। जब इन्हें दर्ज करना शुरू किया गया, तो पता लगा कि ऐसे हर दो विस्फोट के बीच ठीक 16 दिनों का अंतराल है। एक नियमित अंतराल पर हो रहे ऐसे विस्फोट का एक अर्थ यह भी हो सकता है कि यह मामला किसी आकस्मिक दुर्घटना का नहीं, बल्कि वहां कोई प्रक्रिया चल रही है। यह प्रक्रिया क्या है, कोई नहीं जानता। हमारे मौजूदा उपकरण इससे ज्यादा पता लगा पाने में सक्षम नहीं हैं। इस बीच एक पुरानी व्याख्या वापस आ गई है। हॉर्वर्ड के खगोलशास्त्री एंड ऐवी लोएब का कहना है कि ये किसी एलियन सभ्यता के ही संकेत हैं और हो सकता है कि कोई सभ्यता ताकतवर रेडियो किरणों के जरिए किसी चीज को अंतरिक्ष में धकेलने की कोशिश कर रही हो, हम उसे एफआरबी की तरह देख रहे हों। उन्होंने इसकी पूरी वैज्ञानिक व्याख्या भी दे डाली है, जिससे भले ही सभी सहमत न हों, लेकिन उन्होंने कल्पनाओं को नए पर तो दे ही दिए हैं।

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  • Web Title:Hindustan Editorial Column 17th February 2020