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26 नवंबर, 2020|1:50|IST

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जरूरी रियायत

देश की एक बड़ी आबादी को रोजी-रोटी के संकट से बचाने के लिए केंद्र सरकार ने जो रियायती दिशा-निर्देश जारी किए हैं, उनका स्वागत है। दिहाड़ी मजदूर और स्व-रोजगार करने वाले मेहनतकश बड़ी उम्मीद लगाए बैठे थे और सरकार ने उन्हें निराश नहीं किया है। यह भी अच्छी बात है कि सरकार ने जितने भी व्यवसायों या सेवाओं को रियायत दी है, उन सभी में ‘सोशल डिस्टेंसिंग’ को बुनियादी शर्त करार दिया है। सभी को यह साफ समझ लेना चाहिए, कहीं भी भीड़ जुटाने या पास-पास रहकर काम करने को मंजूरी नहीं दी गई है। सरकार के दिशा-निर्देश सिर्फउन मजदूरों, कामगारों के हित में हैं, जिनके लिए लॉकडाउन के दिनों में पेट पालना मुश्किल हो रहा था। विशेषज्ञ यही आशा करेंगे कि 21 अप्रैल से लागू होने वाली इन रियायतों का लाभ सिर्फ वही लोग उठाएं, जो वाकई बहुत जरूरतमंद हों। जिन प्लंबर, बढ़ई, आईटी और इलेक्ट्रॉनिक्स मैकेनिक, मोटर मैकेनिक इत्यादि को छूट दी गई है, वे स्थानीय प्रशासन से मंजूरी या कफ्र्यू पास प्राप्त करने के बाद ही काम पर निकल सकेंगे। ई-कॉमर्स ऑपरेटरों द्वारा उपयोग की जाने वाली कूरियर सेवाओं और उनके वाहनों को भी अनुमति दी गई है। यह भी अच्छी बात है कि राज्य सरकारें अपने हिसाब से रियायतों को घटा-बढ़ा सकेंगी। दूध, सब्जी, दवा, राशन आदि जरूरी वस्तुओं की आपूर्ति शृंखला और पैकेजिंग उद्योग को भी रियायत देना जरूरी था। भवन निर्माण उद्योग में जो रियायत दी गई है, उसके अनुसार, ग्रामीण इलाकों में निर्माण गतिविधियां शुरू हो सकती हैं। दूसरी ओर, शहरों में सिर्फ वही बिल्डर निर्माण कर सकेंगे, जो मजदूरों को निर्माण स्थल पर ही रख सकते हैं। यह सरकार की मजबूरी है कि बैंक, एटीएम, पोस्टल सेवा, पोस्ट ऑफिस खुले रहेंगे। मांग के अनुरूप ही सेबी और बीमा कंपनियों को भी अनुमति दे दी गई है।
ताजा रियायतों से सर्वाधिक लाभ ग्रामीण अर्थव्यवस्था और उन मैन्युफैक्चरिंग इकाइयों को होगा, जो शहर के बाहर स्थित हैं। सेज (स्पेशल इकोनॉमिक जोन) और औद्योगिक नगरों में स्थित इकाइयों को काम फिर शुरू करने में सहूलियत होगी। सेज के तहत निर्मित इकाइयों के लिए यह दोहरी परीक्षा की घड़ी है। एक ओर, जहां वे आबादी से दूर रहकर अपनी उपयोगिता साबित कर सकती हैं, वहीं दूसरी ओर उन्हें बेहतर निर्माण क्षमता से देश को भी संबल देना है। कृषि और कृषि उद्योगों को काम शुरू करने के लिए रियायत दी गई है, तो आश्चर्य नहीं। कृषि देश की बुनियाद है। सबसे बड़ी खुशखबरी तो मनरेगा के तहत कार्यों को दी गई मंजूरी है। गांवों में रहने वाले जरूरतमंद भारत को इससे बहुत सहारा मिलेगा। 
सरकार ने रियायत देते हुए एक जोखिम भी उठाया है। अत: जरूरतमंद लोगों को इनका सदुपयोग करना चाहिए, ताकि रियायतें कायम रहें और बढ़ें भी। उनके सामने जिम्मेदारी न केवल अपने जीवन और परिवार के संरक्षण की है, बल्कि उस सरकार की लाज भी रखनी है, जिसने उन्हें रोजी-रोटी के संकट से निकालने का जतन किया है। आने वाले दिनों में संभव है, लॉकडाउन अचानक खत्म न हो। कोरोना वायरस की दवा के आने तक जीवन सामान्य न चले। अत: यह हर नागरिक का कर्तव्य है कि वह सरकारों के दिशा-निर्देशों की पालना करे। ध्यान रहे, हमें जान भी बचाना है और जहान भी।

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  • Web Title:hindustan editorial column 16 april 2020