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27 नवंबर, 2020|4:33|IST

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वैक्सीन की खोज

यह खुशखबरी है कि भारत कोविड-19 की वैक्सीन तैयार करने की ओर कामयाबी के साथ बढ़ रहा है। कोवैक्सीन नाम की जो दवा भारत बना रहा है, उसे जानवरों में कारगर पाया गया है और अब मनुष्यों में भी परीक्षण की शुरुआत हो चुकी है। जब कोरोना की शुरुआत हुई थी, तब भी दुनिया भारत की ओर आशा भरी निगाहों से देख रही थी, लेकिन तब भारत में कोरोना का प्रकोप ज्यादा नहीं था। भारत में 48 लाख से ज्यादा लोग कोरोना संक्रमित हो चुके हैं और 78 हजार से ज्यादा की मौत हो चुकी है, इसलिए यह नितांत आवश्यक है कि देश अपनी विशाल आबादी के लिए खुद वैक्सीन विकसित करे। किसी भी अन्य देश की तुलना में आज भारत में वैक्सीन की सर्वाधिक जरूरत है। हमसे ज्यादा आबादी वाले चीन ने कोरोना पर शिकंजा कस लिया है, पर हम तेजी से सर्वाधिक पीड़ित देश होने की ओर बढ़ रहे हैं। सबसे ज्यादा पीड़ित होने के दाग को हम केवल वैक्सीन विकसित करके ही धो सकते हैं। 
वैक्सीन निर्माण में लगे इंडियन कौंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर), नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी और भारत बायोटेक के वैज्ञानिकों की तारीफ करनी चाहिए। उन्होंने अप्रैल महीने से ही वैक्सीन खोज अभियान छेड़ रखा है और 29 जून को ही वैक्सीन बना ली थी। इसी के आधार पर कभी यह घोषणा भी हो गई थी कि भारत में 15 अगस्त तक वैक्सीन आ जाएगी, लेकिन किसी भी वैक्सीन को हर तरह से सुरक्षित सिद्ध करने में समय तो लगता ही है। बहरहाल, खास यह कि कोवैक्सीन कोरोना स्ट्रेन से ही तैयार की गई है और शरीर में जाने के बाद कोरोना के खिलाफ एंटीबॉडी तैयार करती है। भारत बायोटेक के वैज्ञानिक इसी वैक्सीन की मदद से बंदरों में एंटीबॉडी विकसित करने में कामयाब रहे हैं। 20-20 बंदरों के चार समूहों पर अलग-अलग जगह वैक्सीन को आजमाया गया है। 14 दिनों के अंतराल पर बंदरों को दो बार वैक्सीन दी गई और उसके बाद उन्हें कोरोना संक्रमित करने की कोशिश हुई, मगर वैक्सीन की वजह से बंदरों के शरीर में एंटीबॉडी विकसित हो गई थी और उनमें निमोनिया या कोरोना लक्षण नहीं उभरे। 
अब दिल्ली स्थित एम्स में कोवैक्सिन का फेज 2 ट्रायल शुरू हो चुका है। एक वॉलंटीयर को वैक्सीन की पहली डोज दी गई है। सफलता मिल गई, तो 750 इंसानों पर उसे आजमाया जाएगा और उसके बाद फेज 3 ट्रायल में हजारों लोगों पर परीक्षण होगा। इस पूरी कवायद में कम से कम तीन महीने का वक्त लगेगा और सब कुछ ठीक रहा, तो अगले साल की पहली तिमाही में भारत अपने वैक्सीन का निर्माण कर लेगा। ध्यान रहे, भारत में वैक्सीन की खोज में अभी सात कंपनियां लगी हैं, भारत बायोटेक, कैडिला, सीरम इंस्टीट्यूट, मिनवेक्स, इंडियन इम्युनोलॉजिकल्स और बायोलॉजिकल ई। सब अलग-अलग वैक्सीन पर काम कर रही हैं। अभी तक रूस में विकसित वैक्सीन स्पुतनिक-वी को स्थानीय स्तर पर मंजूरी मिली है, लेकिन यह वैक्सीन फेज 3 ट्रायल से नहीं गुजरी है, इसलिए विवाद बना हुआ है। खैर, भारत में जो भी दवा आए, पूरी तरह से परखने के बाद आए। इस खोज में धन या संसाधन की कतई कमी नहीं आने देनी चाहिए। जो भी वैज्ञानिक और आम लोग इस परीक्षण में भागीदारी का जोखिम उठा रहे हैं, पूरी मानवता उनकी सदा आभारी रहेगी।

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  • Web Title:hindustan editorial column 14 september 2020