DA Image
8 अप्रैल, 2020|2:35|IST

अगली स्टोरी

ट्रंप का आगामी दौरा

किसी भी विदेशी शासन प्रमुख की यात्रा का अपना ही एक महत्व होता है। और जब मामला दुनिया की सबसे बड़ी महाशक्ति अमेरिका के राष्ट्रपति की यात्रा का हो, तो इसमें संभावनाएं भी काफी तलाशी जाती हैं और इससे उम्मीदें भी काफी बांधी जाती हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की इस महीने की 24 और 25 तारीख की भारत यात्रा इस लिहाज से काफी महत्वपूर्ण है। भारत इसके लिए जो तैयारियां कर रहा है, वे तो जिक्र के काबिल हैं ही, लेकिन इसके साथ ही अमेरिकी राष्ट्रपति इसको लेकर जिस तरह का उत्साह दिखा रहे हैं, उससे भी दोनों देशों के रिश्तों का महत्व समझा जा सकता है। जाहिर है, इस यात्रा के दौरान आपसी रिश्तों, दुनिया की राजनीति और कारोबारी संबंधों को लेकर बहुत सी बातें होंगी, लेकिन फिलहाल चर्चा में सबसे ज्यादा ‘केम छो ट्रंप’ नाम का वह कार्यक्रम है, जो अहमदाबाद के स्टेडियम में होगा। यह एक तरह से अमेरिका में प्रधानमंत्री मोदी के स्वागत में हुए ‘हाउडी मोदी’ कार्यक्रम का भारतीय जवाब होगा। फर्क सिर्फ इतना होगा कि उस कार्यक्रम में 50 हजार लोगों की भीड़ थी (जो अमेरिका के लिहाज से बहुत ज्यादा थी), जबकि अहमदाबाद के कार्यक्रम में इससे कई गुना ज्यादा भीड़ होगी। ट्रंप इसी बात को लेकर सबसे ज्यादा उत्साहित हैं कि जब वह अहमदाबाद पहुंचेंगे, तो उनके स्वागत में एयरपोर्ट से लेकर स्टेडियम तक 50 से 70 लाख लोग होंगे। 
ट्रंप उस समय भारत आ रहे हैं, जब कुछ ही समय बाद उन्हें दोबारा राष्ट्रपति चुनाव के मैदान में उतरना है। महाभियोग मामले में जीत के बाद उन्हें लगने लगा है कि हवा अब पूरी तरह उनके पक्ष में है।

अमेरिकी चुनाव में वहां रहने वाले भारतीय महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। हालांकि मतदाताओं के रूप में भारतीयों का संख्या-बल अमेरिका में बहुत ज्यादा नहीं है, लेकिन वे कई महत्वपूर्ण पदों पर हैं। भले ही वे अमेरिकी यहूदी समुदाय की तरह प्रभावशाली न हों, लेकिन उनसे बहुत पीछे भी नहीं हैं। और सबसे बड़ी बात जो पिछले कई चुनावों में बार-बार साबित हुई है कि अमेरिका में रहने वाले भारतीय मूल के लोग राजनीतिक दलों को फाइनेंस करने में काफी आगे रहते हैं। इस दौरे से ट्रंप को अमेरिका में रह रहे भारतीय समुदाय पर छाप छोड़ने में मदद मिल सकती है। अगर हम इसे चुनाव से जोड़कर न भी देखें, तब भी यह एक सच है कि साल 2000 में बिल क्लिंटन की भारत यात्रा के बाद से हर अमेरिकी राष्ट्रपति भारत जरूर आया है। पिछले राष्ट्रपति बराक ओबामा तो दो बार भारत आए थे। यह भारत-अमेरिका रिश्तों की कहानी तो कहता ही है, साथ-साथ यह भी बताता है कि एक बड़ी अर्थव्यवस्था के रूप में और विश्व राजनय में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले देश के रूप में भारत को नजरंदाज करना अब अमेरिका के लिए मुमकिन नहीं रह गया है। ट्रंप के आगामी दौरे में एक महत्वपूर्ण मुद्दा व्यापार समझौते का होगा। यह सच है कि ट्रंप की आर्थिक नीतियों ने कई मौकों पर भारत को झटके भी दिए हैं। अब वह चाहते हैं कि भारत कई अमेरिकी उत्पादों से आयात शुल्क कम कर दे। जाहिर है, यह ऐसा मामला है, जिस पर भारत को फूंक-फूंककर कदम रखने होंगे। लेकिन ऐसे व्यापार समझौते की संभावनाएं भी काफी हैं, जिनसे अंत में दोनों देशों का लाभ हो।

  • Hindi News से जुड़े ताजा अपडेट के लिए हमें पर लाइक और पर फॉलो करें।
  • Web Title:Hindustan Editorial Column 13th February 2020