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30 मार्च, 2020|12:20|IST

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अन्न की बर्बादी

स्पेन का एक बहुत ही मशहूर पर्व है- ला टोमैटिना। जैसे हमारे यहां कुछ लोग कीचड़ की होली खेलकर उसका मजा लेते हैं, उसी तरह इस त्योहार में टमाटरों की होली खेली जाती है। लोग एक-दूसरे पर पके टमाटर फेंकते हैं, कुछ लोग टमाटरों से भरे हौज में नाचते-कूदते हैं और बाद में बहुत से लोगों को पकड़-पकड़कर इसी हौज में डुबोया जाता है। हर तरफ टमाटरों का लाल रंग दिखाई देता है और सड़कों पर उसके रस की नदियां बह रही होती हैं। यह त्योहार स्पेन के बडे़ आकर्षणों में से एक है, इस पर कई फिल्में भी बनी हैं और हर साल वहां टमाटरों की होली खेलने के लिए 25 हजार से ज्यादा लोग जमा होते हैं। लेकिन इसे देखने का एक और तरीका भी है। इस त्योहार के चलते वहां एक दिन में डेढ़ लाख किलोग्राम से ज्यादा टमाटर बर्बाद हो जाते हैं। एक दिन में किसी एक जगह पर इतने सारे खाद्य की बर्बादी का यह अकेला उदाहरण है। लेकिन दूसरी तरफ कुछ शोधकर्ता इस नतीजे पर पहुंचे हैं कि अकेले अमेरिका में जितने खाद्य पदार्थ बर्बाद होते हैं, उसके सामने तो यह कुछ भी नहीं। वैसे हमारे यहां भी शादी-सालगिरह जैसे समारोहों में खाद्य पदार्थों की बर्बादी के कई अनुमान लगाए गए हैं। जो आंकडे़ हैं, वे बताते हैं कि अमेरिका में खाद्य पदार्थों की बबार्दी के मुकाबले वे कुछ भी नहीं हैं।

अमेरिकन जर्नल ऑफ एग्रीकल्चर इकोनॉमिक्स  में छपे एक अध्ययन के अनुसार, अमेरिका में आम लोग जितनी खाद्य सामग्री बाजार से खरीदते हैं, उसकी लगभग 32 फीसदी बर्बाद कर देते हैं। इस सबकी कीमत जोड़ लें, तो पूरे अमेरिका में हर साल 240 अरब डॉलर की खाद्य सामग्री बर्बाद होती है, यानी प्रति परिवार हर साल लगभग 1.26 लाख रुपये का भोजन बर्बाद होता है। यह भी पाया गया कि अमीर परिवारों में यह बर्बादी ज्यादा होती है, जबकि गरीब परिवारों में काफी कम। लेकिन जिन परिवारों में बहुत कम भोजन बर्बाद होता है, वहां भी यह 8.7 फीसदी से ज्यादा होता है। खास बात यह है कि ज्यादातर बर्बाद होने वाले खाद्य पदार्थ ताजा होते हैं, प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों की उम्र लंबी होती है, इसलिए उनकी बर्बादी कम होती है। और हां, खाद्य पदार्थों की यह बर्बादी उस सिलसिले से अलग है, जिसमें खाने-पीने की चीजों के दामों को ऊंचा रखने के लिए कई कृषि कंपनियां बडे़ पैमाने पर उन्हें नष्ट करती हैं।

बर्बादी किसी भी तरह की हो, एक स्वाभाविक सा तर्क यही आता है कि इस बर्बादी को रोका जाना चाहिए, ताकि एक तो लोगों के धन की बचत हो, और फिर इसके इस्तेमाल से दुनिया भर में जगह-जगह पांव पसारे बैठी भुखमरी को दूर किया जाए। निश्चित तौर पर यह बर्बादी कम हो, तो अमेरिकी परिवारों की काफी आर्थिक बचत होगी। हालांकि विशेषज्ञ अभी ठीक से नहीं समझ पाए हैं कि अगर इतनी बचत हुई, तो बचे हुए पैसे को लोग कहां बर्बाद करेंगे। और जहां तक कई देशों की भुखमरी का मामला है, तो इसका सीधा सा कारण यह नहीं है कि अमेरिका में लोग भोजन बर्बाद करते हैं, इसलिए उन्हें भोजन नसीब नहीं होता। इसका कारण मूल रूप से उन अर्थव्यवस्थाओं की विफलता है, जिनमें वे बसते हैं। यानी एक जगह भोजन की बर्बादी और दूसरी जगह भुखमरी, दो अलग-अलग समस्याएं हैं। काश! हम इन दोनों के समाधान को आपस में जोड़ सकें।

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  • Web Title:Hindustan Editorial Column 10th February 2020