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संपादकीय

अभी भी दूसरी लहर

हिन्दुस्तानPublished By: Naman Dixit
Thu, 09 Sep 2021 10:45 PM
अभी भी दूसरी लहर

भारत में कोरोना के मामले फिर बढ़ते दिख रहे हैं। देश में कुल कोरोना मरीजों की संख्या में इजाफा हुआ है, क्योंकि जहां बुधवार को 40,567 मरीज ठीक हुए, वहीं नए मामलों की संख्या 43,263 रही है। मरीजों की संख्या क्यों बढ़ रही है, इसका जवाब खोजना बहुत मुश्किल नहीं है। हर जगह बढ़ती भीड़ और बचाव के प्रति लापरवाही जवाब दे रही है। भारत ही नहीं, प्रसिद्ध बायोबबल में रहकर इंग्लैंड में क्रिकेट खेल रहे खिलाड़ी और टीम स्टाफ भी संक्रमण के साये में हैं। मतलब हर जगह लापरवाही बढ़ी है, नतीजा सामने है। गृह मंत्रालय के निर्देश पर नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ डिजास्टर मैनेजमेंट की तरफ से एक रिपोर्ट तैयार की गई है, जिसमें अक्तूबर में तीसरी लहर की आशंका जताई गई है। रिपोर्ट में बताया गया है कि अगर टीकाकरण की रफ्तार को नहीं बढ़ाया गया, तो तीसरी लहर में प्रतिदिन मामले छह लाख तक पहुंच सकते हैं। सभी को कोशिश करनी चाहिए कि वह नौबत न आए। 

हमें सोचना होगा। विशेष रूप से केरल और महाराष्ट्र को राहत का एहसास नहीं हो रहा है। स्वास्थ्य मंत्रालय ने गुरुवार को जानकारी दी है कि पिछले सप्ताह आए कोरोना वायरस के कुल मामलों में करीब 70 फीसदी (68.59 प्रतिशत) मामले अकेले केरल के थे। यह कहने में कोई हर्ज नहीं कि विशेष रूप से केरल को कोरोना की दूसरी लहर से अभी भी मुक्ति नहीं मिली है। केंद्र सरकार के साथ मिलकर केरल सरकार को इस पर पूरा फोकस करना चाहिए। अभी देश के 35 जिलों में साप्ताहिक कोविड संक्रमण दर 10 प्रतिशत से अधिक और 30 जिलों में 5 से 10 प्रतिशत के बीच है। अभी भले ही देश के 38 जिलों से ही सौ से अधिक मामले आ रहे हैं, लेकिन तब भी हमें इन मामलों और इन इलाकों को गंभीरता से लेना चाहिए। केरल में युद्ध स्तर पर कोशिश की जरूरत है। यह अपेक्षाकृत विकसित राज्य पूरे देश को चिंता में डाल रहा है। क्या केरल के लिए कोई विशेष योजना बनाई जा सकती है? क्या केरल में सौ प्रतिशत टीकाकरण युद्ध स्तर पर पूरा नहीं करना चाहिए? क्या चिकित्सा जगत से केरल को पूरी मदद मिल रही है? केरल खुद को संभाल ले, तो कुल मामलों में 60 प्रतिशत से भी ज्यादा कमी आ जाएगी।
विशेषज्ञों ने बच्चों को लेकर सावधानी बरतने की ताजा चेतावनी दी है, तो बच्चों के टीकाकरण में समय लगेगा, अत: स्कूल खोलने की जल्दी करने से पहले सोच-विचार लेना चाहिए। भ्रम की स्थिति दूर होनी चाहिए। एक ओर कहा जाता है कि बच्चों से कोरोना फैलने का प्रमाण नहीं है, तो दूसरी ओर चेताया जाता है कि बच्चों को बचाकर रखें। टीकाकरण में वाकई तेजी आई है, मई में हम प्रतिदिन 20 लाख टीके ही लगा पा रहे थे, लेकिन सितंबर में करीब 78 लाख टीके प्रतिदिन लग रहे हैं। कोई शक नहीं, इस रफ्तार को दो से तीन गुना कर देना चाहिए, ताकि जल्दी से जल्दी सबको सुरक्षित किया जा सके।अफसोस, अभी हम 60 प्रतिशत लोगों को भी टीके की पहली डोज और 20 प्रतिशत लोगों को भी दूसरी डोज नहीं दे पाए हैं, तो हमें लंबा रास्ता तय करना है, अत: रफ्तार बढ़ जानी चाहिए। विशेषज्ञों की सलाह को गौर से सुनना चाहिए। खुद को और दूसरों को भी संक्रमण से बचाने की फिक्र बनी रहनी चाहिए, क्योंकि 18 से कम उम्र की हमारी आबादी का तो अभी टीका ही नहीं आया है।
 

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