टीके का इंतजाम
यह अब स्पष्ट हो गया है कि कोविड नियंत्रण में व्यापक टीकाकरण कार्यक्रम का महत्व सबसे ज्यादा है। वैज्ञानिक कह रहे हैं, अगर किसी देश में लगभग सत्तर प्रतिशत जनसंख्या को टीका लग जाए, तो यह लगभग तय है कि...

यह अब स्पष्ट हो गया है कि कोविड नियंत्रण में व्यापक टीकाकरण कार्यक्रम का महत्व सबसे ज्यादा है। वैज्ञानिक कह रहे हैं, अगर किसी देश में लगभग सत्तर प्रतिशत जनसंख्या को टीका लग जाए, तो यह लगभग तय है कि उस देश से कोविड का उन्मूलन हो जाएगा। कई देश इस दिशा में तेजी से बढ़ रहे हैं। कुछ देश जल्दी ही पूरी जनसंख्या को टीका लगाने का लक्ष्य पा लेंगे। ग्रेट ब्रिटेन ने तो लोगों को तीसरी खुराक देने की योजना बनाना भी शुरू कर दिया है। कई साधनहीन देश जरूर इस दौड़ में पिछड़ रहे हैं, क्योंकि साधन संपन्न देशों ने पहले अपने नागरिकों को टीके मुहैया कराने को प्राथमिकता दी है। भारत में हालांकि खुद दुनिया की सबसे ज्यादा वैक्सीन बनाने वाली संस्थाएं हैं, लेकिन इस दौड़ में यह काफी पिछड़ गया है। इसकी वजह यह रही कि हमारी सरकार ने वैक्सीन की जरूरत के मुताबिक योजना बनाकर पहले ऑर्डर नहीं दिए। अब जब भारत में कोरोना की ताजा लहर भयावह रूप ले चुकी है, तब तेजी से टीके लगाने की जरूरत और ज्यादा बढ़ गई है। सरकार ने यह एक अच्छा काम किया है कि दुनिया के कई टीकों को भारत में लगाने की मंजूरी दे दी है। अमेरिकी सरकार ने कोरोना की गंभीर स्थिति के मद्देनजर इस दौरान वैक्सीन को बौद्धिक संपदा अधिकार के दायरे से बाहर रखने की बात कही है। इन वजहों से भारत में टीकाकरण की रफ्तार तेज होगी, लेकिन इन सबका असर जमीन पर दिखने में अभी कुछ वक्त लगेगा। टीकों की भारत में उपलब्धता आसान करने के लिए सरकार एक और कदम उठा सकती है कि टीका निर्माताओं को टीकों के संभावित दुष्प्रभावों के लिए कानूनी बाध्यता से मुक्त कर दे। टीका निर्माताओं की हिचकिचाहट का एक बड़ा कारण इससे खत्म हो जाएगा। अगर किसी पर दुष्प्रभाव पड़ते हैं, तो उसके लिए सरकार अपने स्तर पर नुकसान भरपाई और मुआवजे का इंतजाम कर सकती है। इसके लिए सरकार चाहे, तो किसी बीमा कंपनी से करार कर सकती है। इस मामले में खतरे या फिक्र की बात इसलिए भी नहीं है कि दुनिया भर में करोड़ों लोगों को टीके लग चुके हैं और ऐसी कोई खबर नहीं आई है, जिससे किसी गंभीर खतरे का आभास हो। जाहिर है, कोई भी दवा या वैक्सीन शत-प्रतिशत निरापद नहीं होती, लेकिन अभी जो वैक्सीन लगाए जा रहे हैं, उनसे दुष्प्रभावों की संख्या नगण्य है। इसलिए वैक्सीन की सुरक्षा की गारंटी सरकार ले, तो उसमें कुछ भी गलत नहीं होगा ।
भारत जैसे देश में इस बात का ज्यादा महत्व इसलिए है कि यहां सरकार की विशेष विश्वसनीयता होती है। अगर लोग यह जानेंगे कि सरकार सुरक्षा की गारंटी ले रही है और किसी आकस्मिक मुश्किल के वक्त वह हमारी मदद करेगी, तो वैक्सीन के प्रति अगर कुछ हिचक है भी, तो वह कम होगी। वैसे भी आम भारतीयों के लिए किसी कंपनी के बजाय अपनी सरकार से शिकायत करना ज्यादा आसान होगा। इस तरह, यह स्थिति वैक्सीन निर्माताओं के लिए भी ठीक होगी और हमारे नागरिकों के लिए भी। यह देखा जा रहा है कि कोविड राहत से जुडे़ कई मामलों में बहुत छोटे-छोटे तकनीकी या प्रशासनिक मुद्दों की वजह से देर हो रही है, जो कि ऐसी आपात स्थिति में बिल्कुल नहीं होनी चाहिए। इसीलिए सरकार को टीकों की उपलब्धता तेजी से बढ़ाने के लिए जो भी करना जरूरी हो, तुरंत करना चाहिए।


