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नए आसमान पर

पिछले साल के आखिरी दिन जब लोग नए साल के स्वागत की तैयारी कर रहे थे, कहीं नए साल की बधाइयां दी जा रही थीं और कहीं जश्न मनाए जा रहे थे। ठीक उसी समय आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा में उलटी गिनती शुरू हो...

नए आसमान पर
Pankaj Tomarहिन्दुस्तानMon, 01 Jan 2024 11:19 PM
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पिछले साल के आखिरी दिन जब लोग नए साल के स्वागत की तैयारी कर रहे थे, कहीं नए साल की बधाइयां दी जा रही थीं और कहीं जश्न मनाए जा रहे थे। ठीक उसी समय आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा में उलटी गिनती शुरू हो चुकी थी, और नए साल की नई सुबह 9.10 बजे जब यह उलटी गिनती खत्म हुई, तो भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन यानी इसरो ने 44.4 मीटर लंबा एक भारी-भरकम रॉकेट आसमान की ओर दागा। कुछ ही देर के अंदर धरती से 650 किलोमीटर दूर की कक्षा में एक्सपोसैट नाम का एक उपग्रह स्थापित हो चुका था। साल 2024 की शुरुआत के लिए इससे अच्छी कोई और खबर नहीं हो सकती थी। उपग्रह को लांच करना और उसे किसी कक्षा में स्थापित कर देना इसरो के लिए कोई नई बात नहीं है, पर एक्सपोसैट जिस तरह का उपग्रह है, उसे इसरो की सिर्फ एक और उपलब्धि कह देने भर से ही बात खत्म नहीं होती। वैज्ञानिक अध्ययन के लिए लॉन्च किया गया यह उपग्रह खगोलशास्त्र में भारत की महारत और उसकी महत्वाकांक्षा, दोनों को ही बताता है। इसे हम इससे भी समझ सकते हैं कि ऐसा उपग्रह अभी तक सिर्फअमेरिका के पास है। 
हम जब भारतीय अंतरिक्ष सगंठनों के उपग्रहों की चर्चा करते हैं, तो आमतौर पर ऐसे उपग्रहों का नाम लिया जाता है, जिनकी कोई सीधी उपयोगिता है। मसलन, वे उपग्रह, जो टेलीविजन प्रसारण के लिए थे, या वे उपग्रह, जो जीपीएस सेवा देते हैं, या वे उपग्रह, जो मौसम के अध्ययन और पूर्वानुमान के लिए लॉन्च किए जाते हैं, या फिर वे उपग्रह, जो सीमाओं की निगरानी करते हैं, शहरों-कस्बों-गांवों, खेतों, फसलों और नदियों-नहरों का हाल बताते हैं। लेकिन एक्सपोसैट इन सबसे जरा अलग किस्म का उपग्रह है। इसे शुद्ध रूप से वैज्ञानिक शोध के लिए तैयार किया गया है। इसका सीधा लाभ खगोलशा्त्रिरयों और खगोल-भौतिकविज्ञानियों को मिलेगा। इस उपग्रह में लगा एक्सरेपोलरीमीटर अंतरिक्ष में मौजूद एक्सरे किरणों का आकलन करके उनके स्रोत का पता लगाएगा। इससे खासकर ब्लैक होल के अध्ययन में मदद मिलेगी। इसके जारिये हम ब्रह्मांड की उत्पत्ति और धरती के लिए अंतरिक्ष में मंडराते खतरों के बारे में ज्यादा अच्छी समझ बना सकेंगे।
यह उपग्रह दरअसल उस सिलसिले की अगली कड़ी है, जो 1996 में शुरू हुआ था। इसे भारतीय एक्सरे एस्ट्रोनॉमी प्रयोग कहा गया था। इसी कड़ी में साल 2004 में एस्ट्रोसैट नाम का उपग्रह लॉन्च करने की योजना बनी थी। यह उपग्रह 2015 में लॉन्च किया गया था। अंतरिक्ष के अध्ययन के लिए तैयार किया गया यह भारत का पहला उपग्रह था। एक्सपोसैट इसी की अगली कड़ी है, जो एक बड़ी छलांग तो है ही, साथ ही, यह भारत के उपग्रह कार्यक्रम की निरंतरता का भी प्रतीक है। यहां इस बात का जिक्र भी जरूरी है कि भारत ने एस्ट्रोसैट का उपयोग किस तरह से किया। एकाधिकार की सोच से परे हटकर इससे मिले डाटा को पूरी दुनिया के वैज्ञानिकों के साथ साझा किया गया, ताकि सभी उनका अपने तरह से विश्लेषण कर सकें। इससे भारत की इस सोच का भी पूरी दुनिया को उदाहरण मिला कि ज्ञान और विज्ञान सभी के लिए हैं और ये बांटने से ही बढ़ते हैं। अब एक्सपोसैट के बारे में भी यही कहा जा रहा है। इससे मिले डाटा भी दुनिया के कई देशों के वैज्ञानिकों के साथ साझा किए जाएंगे। इस लिहाज से यह भारत ही नहीं, पूरी दुनिया के लिए एक उपलब्धि है। 

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