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अब आठ-आठ बच्चे

युद्ध में जुटे रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने रूसी महिलाओं से आठ या उससे अधिक बच्चे पैदा करने का आह्वान कर पूरी दुनिया को फिर चौंका दिया है। पुतिन ने दोटूक कह दिया कि देश की जनसंख्या बढ़ाना...

अब आठ-आठ बच्चे
Amitesh Pandeyहिन्दुस्तानFri, 01 Dec 2023 10:23 PM
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युद्ध में जुटे रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने रूसी महिलाओं से आठ या उससे अधिक बच्चे पैदा करने का आह्वान कर पूरी दुनिया को फिर चौंका दिया है। पुतिन ने दोटूक कह दिया कि देश की जनसंख्या बढ़ाना आने वाले दशकों का लक्ष्य होगा। एक समय था, जब रूस में छोटे परिवारों को तरजीह दी जाती थी, लेकिन अब रूसी राष्ट्रपति बड़े परिवारों के पैरोकार हो गए हैं। पिछले साल भी उन्होंने दस-दस बच्चे पैदा करने का आह्वान किया था। अब वह छोटे परिवारों के बजाय बड़े परिवारों को आदर्श बनाने पर जोर दे रहे हैं। रूस दुनिया के उन देशों में शामिल है, जहां आबादी घट रही है। प्रति महिला दो बच्चे भी पैदा नहीं हो रहे हैं। ऐसे में, आठ या उससे अधिक बच्चे पैदा करने का आह्वान सोचने पर मजबूर कर देता है। पहली नजर में जो विवेचना हुई है, उसके अनुसार, युद्ध की वजह से करीब तीन लाख रूसियों की मौत हो चुकी है। इसमें कोई शक नहीं कि अगर कोई देश युद्ध लड़ना चाहे और उसके पास जवानों की कमी हो जाए, तो ऐसे आह्वान की जरूरत आन खड़ी होती है। दुर्भाग्य से, रूस के साथ ऐसा ही हो रहा है।
तेज विकास के लिए अगर कोई आबादी बढ़ाने का आह्वान करे, तो समझ में आता है, पर युद्ध के समय ऐसा आह्वान किन्हीं अर्थों में अमानवीयता भी है। बहुत मेहनत व चिंतन से विकासशील समाज बनाकर आबादी को नियंत्रित किया गया है, पर अब आर्थिक प्रलोभन के माध्यम से आबादी बढ़ाना कहां तक उचित है? सरकारी मदद से जो परिवार बड़े होंगे, उनकी सांस्कृतिक-सामाजिक अवस्था क्या होगी? पुतिन ने अपने लोगों को प्रेरित करते हुए याद दिलाया है कि हमारे रूसी परिवारों में दादी और परदादी के सात-आठ बच्चे होते थे। अब उसी परंपरा को संरक्षित और पुनर्जीवित करने की जरूरत है। क्या पुतिन को कामयाबी मिलेगी? क्या पिछले साल के उनके आह्वान का कोई असर दिखा है? पुतिन को रूसी जातीयता की भी चिंता सताने लगी है। वह चाहते हैं कि रूसी मूल के लोगों की ही आबादी बढ़े। हालांकि, पुतिन को रूसियों के प्रति ज्यादा संवेदनशील होना चाहिए। अगर तीन लाख रूसी मारे गए हैं, तो नौ लाख से ज्यादा देश छोड़ गए हैं। मतलब, जो रूसी अपनी जमीन पर शेष हैं, उनका सम्मान और जीवन-मूल्य बढ़ना चाहिए।
वैसे ज्यादा बच्चे पैदा करने का आह्वान दुनिया में नया नहीं है। जापान प्रति संतान प्रति माह 8,500 रुपये से ज्यादा का भुगतान करता है। चीन भी अपनी एकल संतान नीति को साल 2015 में ही इतिहास बना चुका है। दक्षिण कोरिया, ताइवान, सिंगापुर में जन्म दर बहुत गिर गई है। दुनिया में अब करीब दस देश हैं, जो संतान उत्पत्ति बढ़ाने के लिए अपने लोगों को किसी न किसी प्रकार से प्रोत्साहन दे रहे हैं। अगर ज्यादा जन्म दर वाले देशों की बात करें, तो दस में से नौ देश अफ्रीका के हैं। सर्वाधिक जन्मदर 6.73 नाइजर में है। मतलब, जो लक्ष्य पुतिन ने अपने देश की महिलाओं को दिया है, वह अविश्वसनीय रूप से बहुत ज्यादा या कामकाजी महिलाओं के नजरिये से बड़ी ज्यादती है। क्या महिलाएं बच्चे पैदा करने को ही जीवन का लक्ष्य बना लें? सबसे बड़ा सवाल यह है कि अफ्रीका जैसे गरीब और रूस जैसे युद्धरत इलाके में भला कौन खुशी से जन्म लेना चाहेगा? अगर पुतिन को अपने लोगों की चिंता है, तो उन्हें युद्ध रोकना चाहिए। आज विश्व में जीवन की संख्या नहीं, गुणवत्ता ज्यादा महत्वपूर्ण है। सभी शांति से खुशहाल रहें और कहीं भी जीवन पर संकट के बादल न आएं। 

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