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नेताजी की अस्थियां

कुछ रहस्य कभी खत्म नहीं होते, वे चलते रहते हैं। उन्हें चाहे जितना सुलझाने की कोशिश करो, वे उलझते जाते हैं। चाहे जितना दबाने की कोशिश करो, वे गहराते जाते हैं। दुनिया भर में ऐसे बहुत से रहस्य हैं। भारत में ऐसा सबसे बड़ा रहस्य है नेताजी सुभाष चंद्र बोस का निधन। दशकों से यह कहा जाता रहा है कि उनका निधन 18 अगस्त, 1945 को ताईवान में हुई एक विमान दुर्घटना में हो गया था। इसके साथ ही यह बात भी जोड़ी जाती रही है कि उनकी अस्थियां आज भी जापान के रेनकोजी मंदिर में रखी हुई हैं। नेताजी जैसे जांबाज शख्स इतनी आसानी से विदा हो सकते हैं, यह बात बहुत से लोगों ने कभी स्वीकार नहीं की। नेताजी के सच का पता लगाने के लिए कभी खोसला आयोग का गठन किया गया था, जो इस नतीजे पर पहुंचा था कि उनका निधन ताईवान की विमान दुर्घटना में हुआ था। लेकिन बहुत से लोग इसे स्वीकार करने के लिए कभी तैयार नहीं हुए। यहां तक कि नेताजी को देखे जाने या उनके होने के बारे में बहुत से दावे भी समय-समय पर आते रहे। रहस्य और विवाद जब लगातार गहराता रहा, तो 1999 में जस्टिस मनोज कुमार मुखर्जी की अध्यक्षता में एक और आयोग इस रहस्य से परदा उठाने के लिए बना। इस आयोग की रिपोर्ट से रहस्य और गहरा गया, क्योंकि इसमें विमान दुर्घटना में उनके निधन की धारणा पर शक व्यक्त किया गया था। लेकिन सच यही है कि इससे भी रहस्य से परदा नहीं उठ सका। यह जरूर हुआ कि इस रिपोर्ट के बाद से सच को उजागर करने का दबाव लगातार बढ़ने लगा। खासकर सुभाष चंद्र बोस के वंशजों और परिवारी जनों की तरफ से।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार ने इस बारें में एक अच्छा फैसला यह किया कि उन्होंने इस मामले में जितने भी दस्तावेज हैं, उन्हें सार्वजनिक करने का सिलसिला शुरू किया। दूसरी तरफ, यह काम पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की सरकार ने भी किया। उन्होंने राज्य सरकार के पास ऐसे जितने भी दस्तावेज उपलब्ध थे, उन्हें सार्वजनिक करना शुरू कर दिया। अभी तक, कुछ एक अति गोपनीय फाइलों को छोड़कर ऐसे ज्यादातर दस्तावेज सार्वजनिक हो चुके हैं। लेकिन सच यही है कि विवाद कहीं नहीं पहंुचा। जितना हम शुरू में जानते थे, अभी भी उससे ज्यादा नहीं जानते। लेकिन अब जर्मनी में रह रहीं नेताजी की पुत्री अनीता बोस ने यह मांग करके इस मुद्दे को फिर चर्चा में ला दिया है कि सरकार को रेनकोजी मंदिर से नेताजी की अस्थियां भारत लाकर उन्हें गंगा में विसर्जित कर देना चाहिए।

यह ऐसी मांग है, जिसे मानना आसान नहीं होगा। इसे मानने का अर्थ है यह स्वीकार कर लेना कि नेताजी का निधन ताईवान की उस विमान दुर्घटना में हुआ था। हालांकि इससे पहले अनीता बोस एक और मांग कर चुकी हैं, जो इस पूरे प्रसंग में काफी महत्वपूर्ण साबित हो सकती है। उनका कहना है कि टोक्यो में नेताजी की जो अस्थियां रखी गई हैं, उनकी डीएनए जांच कराई जानी चाहिए, जिससे यह पता चल सके कि ये अस्थियां वाकई उन्हीं की हैं या नहीं। हमें पता नहीं है कि वे अस्थियां इस स्थिति में हैं भी या नहीं कि उनकी डीएनए जांच कराई जा सके, लेकिन अगर ऐसा हो सका, तो किसी भी नतीजे के बाद रहस्य कुछ हद तक तो सुलझ ही सकता है। पूरी तरह से तो शायद यह तब भी नहीं सुलझेगा, क्योंकि इसकी एक राजनीति भी है। 

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  • Web Title:Hindustan editorial article on 28 august