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भविष्य के रोजगार

शंकाएं इसे लेकर कुछ ज्यादा ही हैं। यह डर बहुत से लोगों का सता रहा है कि आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस यानी कृत्रिम बुद्धि आई, तो लाखों- करोड़ों लोग बेरोजगार हो जाएंगे। खासकर दुनिया के श्रमिक संगठन इसे लेकर खासे चिंतित हैं। भविष्य के बारे में कुछ भी कहना हमेशा जोखिम भरा होता है। भविष्य अक्सर हमारी पिछली उम्मीदों और आशंकाओं को धता बता देता है। हर जमाना कुछ ऐसी अच्छी-बुरी चीजें लेकर आता है, जिनके बारे में हमने पहले सोचा भी नहीं होता। इसलिए अगर हम भविष्य की चिंता छोड़ वर्तमान की बात करें, तो इस समय दुनिया के रोजगार बाजार में एकमात्र सबसे अच्छी खबर यह आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस ही है। इस समय दुनिया भर में कृत्रिम बुद्धि एकमात्र ऐसा क्षेत्र है, जिसमें सबसे ज्यादा काम हो रहा है। इसकी वजह से रोजगार के लाखों अवसर पैदा हुए हैं और लगातार हो रहे हैं। यह उस समय हो रहा है, जब संचार क्रांति एक ऐसे बिंदु पर पहुंच गई है, जहां इसकी विकास दर भले ही अभी कुछ हद तक बुलंद बनी हुई है, लेकिन इसकी भविष्य की उम्मीदें बहुत बड़ी नहीं बचीं। तरक्की तो यह क्षेत्र करता ही रहेगा, मगर तरक्की की रफ्तार सुस्त पड़ने के अंदेशे बन गए हैं। यह हाल हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर, दोनों ही तरह के बाजारों का है। माना जा रहा है कि आगे की यात्रा के लिए ये बाजार अब आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस पर ही निर्भर होंगे। सो दुनिया की ढेर सारी कंपनियां इसके विकास में लगी हैं। बाजार में इसके विशेषज्ञों की मांग इतनी ज्यादा है कि विश्व भर के विश्वविद्यालय इससे जुड़े विषयों की सीटें तेजी से बढ़ा रहे हैं। इस क्षेत्र में वेतन भी सबसे अच्छा है।

वैसे आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस को लेकर जो आशंकाएं हैं, वे पहली नजर में दमदार तो लगती ही हैं। जैसे अगर बाजार में खुद से चलने वाली गाड़ियां आ जाएंगी, तो ड्राइवरों पर बेरोजगारी का खतरा मंडराएगा ही। वैसे इस तरह की आशंकाएं तब भी थीं, जब कंप्यूटर आए थे। तब लगता था कि एक कंप्यूटर कई लोगों का काम कर सकता है, इसलिए जिनका वह काम करेगा, वे सब बेरोजगार हो जाएंगे। यह माना जा रहा था कि सबसे पहले तो क्लर्क, एकाउंंटेंट और मुनीम वगैरह बेरोजगार हो जाएंगे, क्योंकि कंप्यूटर उन सबके काम को बड़ी फुर्ती और कुशलता से कर देगा। बैंकों, बीमा कंपनियों और वित्तीय संस्थानों की ट्रेड यूनियनें तो सबसे ज्यादा परेशान थीं। यही हाल बाकी मजदूर संघों का था, क्योंकि कहा जा रहा था कि ज्यादातर उत्पादन अब कंप्यूटरों की देखरेख में ही होगा। वैसे यही बात तब भी सोची गई थी, जब औद्योगिक क्रांति हुई थी।

लेकिन ऐसा कुछ हुआ नहीं। एक तो आशंकाओं में बहुत ज्यादा अतिशयोक्ति थी और दूसरे, वे उन अवसरों को नजरअंदाज कर रही थीं, जो कंप्यूटर के आने के बाद पैदा होने वाले थे। कंप्यूटर के आने के बाद ऐसी दुनिया बनी, जिसमें सेवा क्षेत्र सबसे बड़ा रोजगारदाता हो गया, जबकि हम पुरानी उत्पादन व्यवस्था के हिसाब से ही सोच रहे थे। नया जमाना नई चीजें और नए उपकरण ही नहीं, ऐसे नए अवसर भी लेकर आता है, जिनके बारे में हम अभी नहीं सोच सकते। बेशक, कुछ उद्योग ऐसे भी हो सकते हैं, जिनका प्रबंधन यह सोचता हो कि मानव कर्मचारियों से छुट्टी मिल जाए, तो उनकी तरक्की काफी बढ़ सकती है, लेकिन अभी तक का इतिहास यही बताता है कि उन्हें कर्मचारियों से छुट्टी मिलने वाली नहीं है।

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  • Web Title:Hindustan editorial article on 22 october