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नंबर वन टीम

क्या हमारी क्रिकेट टीम अब भी नंबर वन है, जब हम इंग्लैंड में टेस्ट सीरीज हार गए हैं? थोड़ा पहले दक्षिण अफ्रीका में भी सीरीज हारे थे। ऑस्ट्रेलिया में आज तक सीरीज जीते नहीं। अरसे से न्यूजीलैंड तक से उनके घर में नहीं जीत सके, लेकिन हैं नंबर वन। आंकड़े बताते हैं कि देश से बाहर हम कई सीरीज जीते हैं। यह अलग बात है कि उस बाहर में श्रीलंका और बांग्लादेश आते हैं। अपनी टीम के कोच रवि शास्त्री मानते हैं कि बाहर खेलने के मामले में यह पिछले 15 साल की बेहतरीन टीम है। दरअसल, यह टीम अपने घर में खूब खेलकर नंबर वन हुई है। हालांकि इस सीरीज को हारने के बाद भी अपने कोच और कप्तान यह मानने को तैयार नहीं हैं। अपने घर में शेर और बाहर ढेर। यह तो हर टीम ही करती है। दुनिया की नंबर वन टीम तो वह होगी, जो घर-बाहर, दोनों जगह बेहतरीन खेलती हो। उसे हर तरह के माहौल में जीतने की आदत हो। इस मायने में तो क्लाइव लॉयड की वेस्ट इंडीज और एक दौर की ऑस्टे्रलियाई टीम ही नंबर वन नजर आती है। आज तो नंबर वन भी एक छलावा है। आज जो भी टीम अपने घर में ज्यादा खेल लेती है, वह नंबर एक हो जाती है। टीम इंडिया का भी वही हाल है। बाहर जाते ही सब कुछ बदल जाता है। मजेदार बात है कि एक सीरीज से दूसरी सीरीज एक किस्म का ‘रिप्ले’ होता है। दक्षिण अफ्रीका की सीरीज याद कीजिए। काश, हम तैयारी के साथ वहां जाते। अगर अपने बल्लेबाजों ने थोड़ा बेहतर खेला होता। 

गेंदबाजों ने तो काफी हद तक अच्छा प्रदर्शन किया है। डुबोया कुल मिलाकर बल्लेबाजों ने ही। इंग्लैंड ने सीरीज 4-1 से जीती। इससे लगता है कि शायद पूरी सीरीज ही एकतरफा थी। इस सीरीज में कम से कम तीन टेस्ट तो ऐसे थे, जो इधर-उधर हो सकते थे। एक-एक टेस्ट जरूर दोनों टीमों ने आसानी से जीत लिया था। दोनों टीमों में बस यही फर्क था कि एक टीम ने मिले मौकों का फायदा उठाया और दूसरी टीम नहीं उठा सकी। कम से कम दो टेस्ट में अपनी टीम लड़ी तो सही, लेकिन जीत नहीं सकी। कुछ खास लम्हों पर बेहतर क्रिकेट खेलकर इंग्लैंड जीत गया। उन्हीं लम्हों में कुछ खराब खेलकर हम हार गए। दुनिया की बेहतरीन टीमों को देखने पर एक खास बात निकलकर आती है। बड़ी टीमें दूसरों के पुछल्लों को खेलने नहीं देतीं। और उनके पुछल्ले आसानी से अपना विकेट नहीं देते। इग्लैंड ने यह सीरीज तो अपने पुछल्लों की वजह से जीती। उनके सात, आठ और नौ ने हमारी टीम को उखाड़ दिया। उनके अहम बल्लेबाज तो लगभग चले ही नहीं। आखिरी टेस्ट से पहले उनकी तरफ से जो दो सेंचुरी लगी, वह पिछले बल्लेबाजों की थीं। उस लिहाज से यह टीम बेहद कमजोर थी, लेकिन अपनी टीम कमजोरी का फायदा नहीं उठा सकी। 

इसके बाद अब यह भी कहा जा सकता है कि इस सीरीज में कप्तान कोहली हार गए। लेकिन बल्लेबाज कोहली ने पूरी सीरीज में हार नहीं मानी। उनकी पिछली इंग्लैंड सीरीज बेहद खराब थी। इस सीरीज में उन्होंने कमाल की बैटिंग की। विराट ने जिस तरह अपनी बल्लेबाजी को बदला, उसी तरह के बदलाव से कोई टीम नंबर वन हो सकती है। लेकिन बाकी टीम उस बदलाव के आसपास भी नहीं पहुंची। इसीलिए विराट के नंबर वन बल्लेबाज होने पर कोई शक नहीं है। लेकिन टीम तो नंबर वन नहीं है। यही सच है।

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  • Web Title:Hindustan editorial article on 13 september