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उम्मीद का विस्तार

ऑपरेशन-2019 शायद अब शुरू हो चुका है। हालांकि अगला आम चुनाव अभी लगभग 20 महीने दूर है, लेकिन केंद्रीय मंत्रिमंडल का जिस तरह से विस्तार और पुनर्गठन किया गया उससे यहीं संकेत उभर रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चीन यात्रा से पहले रविवार की सुबह किए गए इस इस विस्तार की सबसे बड़ी खासियत है कि इसमें राजनैतिक समीकरणों और संतुलन पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया गया। सहयोगी दलों को संतुष्ट करने की कोशिश भी इसमें कहीं नहीं है। रणनीति सिर्फ एक है- ऐसी टीम बनाना जो कुछ कर के दिखा सके और जिसके प्रदर्शन को अगली बार जनता के सामने जाते समय सरकार की सफलता के रूप में पेश किया जा सके। बात सिर्फ 2019 के आम चुनाव की ही नहीं है। उसके पहले गुजरात, कर्नाटक, हिमाचल प्रदेश, राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ वगैरह कई राज्यों में विधानसभा चुनाव होने हैं। ये सभी राज्य भारतीय जनता पार्टी के लिए महत्वपूर्ण हैं और इनमें से चार राज्यों में तो उसकी सरकार ही है। जाहिर है कि उन राज्य सरकारों के अलावा केंद्र सरकार के कामकाज का भी चुनाव नतीजों पर काफी असर पड़ेगा। भाजपा के लिए अच्छी चीज यह है कि विपक्ष केंद्र और इन सभी राज्यों में उसके मुकाबले कुछ कमजोर दिख रहा है। लेकिन केंद्रीय मंत्रिमंडल का विस्तार जिस तरीके से किया गया वह बताता है कि भारतीय जनता पार्टी और नरेंद्र मोदी किसी तरह की कोई कसर नहीं छोड़ना चाहते हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की राजनैतिक दबावों के आगे न झुकने और चौंकाने वाली शैली इस विस्तार और पुनर्गठन में भी दिखाई दी है। एक चीज स्पष्ट है कि जिन केंद्रीय मंत्रियों का अच्छा प्रदर्शन पिछले काफी समय से चर्चा में था उन्हें पदोन्नति दी गई है या उनके कार्यभार को बढ़ाया गया है। इसी तरह जिनका रिपोर्ट कार्ड अच्छा नहीं रहा उनसे या तो त्यागपत्र ले लिया गया है या फिर उनके दायित्व में कटौती की गई है। मंत्रियों के अच्छे और बुरे रिपोर्ट कार्ड कभी सार्वजनिक नहीं होते, इसलिए इस बारे में महज अटकल ही लगाई जा सकती है। अच्छे रिपोर्ट कार्ड वालों में निर्मला सीतारमन को न सिर्फ पदोन्नति मिली है बल्कि रक्षा जैसे अहम मंत्रालय का कार्यभार भी दिया गया है। पहली बार किसी महिला को इस मंत्रालय की बागडोर सौंपी गई है। इससे सुरक्षा मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति में अब एक साथ दो महिलाओं की मौजूदगी रहेगी- विदेश मंत्री सुषमा स्वराज और रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमन। प्रधानमंत्री ने अपने मंत्रिमंडल में जिन नौ चेहरों को शामिल किया है उनमें से चार नौकरशाह रहे हैं। विस्तार यह भी बताता है कि प्रधानमंत्री के लिए राजनैतिक संतुलन से ज्यादा महत्वपूर्ण है उन्हें आगे लाना जो सरकार की मशीनरी को चलाने की समझ और क्षमता रखते हों।

पिछले आम चुनाव में गुजरात के मुख्यमंत्री के तौर पर नरेंद्र मोदी के कामकाज और सफलताओं की अक्सर चर्चा हुआ करती थी। लेकिन ये चीजें उस चुनाव का मुख्य मुद्दा नहीं थीं। नरेंद्र मोदी ने मनमोहन सिंह सरकार की ‘असफलताओं’ को चुनाव का मुद्दा बनाया था। और पिछली सरकार की इस व्याख्या को वे लोगों के दिल-दिमाग तक पहुंचाने में कामयाब भी रहे। उन्हें पता है कि अगले चुनाव में यह काम नहीं आएगा। तब महत्वपूर्ण होगा उनकी सरकार का कामकाज। इसलिए वे न सिर्फ सरकार के कामकाज को सुधारने में बल्कि उसका संदेश लोगों तक पहुंचाने में अभी से जुट जाना चाहते हैं। साथ ही उनकी यह भी कोशिश होगी कि इस बीच होने वाले ज्यादातर विधानसभा चुनावों में उन्हीं की पार्टी की जीत हो।

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