DA Image
6 मार्च, 2021|1:33|IST

अगली स्टोरी

फिर डोका ला विवाद

Doka La Dispute Between India and China

डोका ला विवाद एक बार फिर गरम हो रहा है। डोका ला मूल रूप से भूटान का हिस्सा है, इसी के साथ यह हिमालय पर्वत का वह इलाका है, जहां भारत, चीन और भूटान की सीमाएं मिलती हैं। सामरिक भाषा में ऐसी जगहों को ‘ट्राई जंक्शन’ कहा जाता है। अब खबर आई है कि चीन की लाल सेना यानी पीपुल्स लिबरेशन आर्मी ने वहां स्थाई रूप से डेरा डाल दिया है। वैसे पहले भी चीन की गश्ती टुकड़ियां इस इलाके में आती-जाती रही हैं। इस तरह की गश्त पर न भारत ने और न ही भूटान ने कभी आपत्ति की है। लेकिन पहली बार ऐसा हुआ है कि चीनी सेना ने वहां पूरी सर्दियां बिताने के लिए डेरा डाल दिया है। वहां डेरा डालने वाली टुकड़ी में 1,800 सैनिक हैं। उनके लिए सड़क बनाई गई है, दो हैलीपैड बनाए गए हैं, सैनिकों के रहने के ठिकाने भी बनाए गए हैं और भंडार भी, ताकि लंबे बर्फीले मौसम में उनके लिए किसी जरूरी सामान की कमी न पडे़। वह सीमावर्ती इलाका है और अभी यह स्पष्ट नहीं है कि घुसपैठ किस हद तक और कितने अंदर तक हुई है? खबरों में इतना ही बताया गया है कि चीन की सेना उस छंबी घाटी तक पहुंच गई है, जो भूटान को सिक्किम से जोड़ती है। इससे भारतीय थल सेना प्रमुख की इस आशंका को बल मिलता है कि चीन धीरे-धीरे इस इलाके के सामरिक संतुलन में बदलाव लाना चाहता है। कुछ भी हो, सीमा पर इस तरह का सैनिक जमाव आपत्तिजनक तो है ही, साथ ही चीन के इरादों पर संदेह भी पैदा करता है। 

डोका ला का मुद्दा कुछ महीने पहले उस समय गरमाया था, जब चीनी सेना ने वहां पर सड़क बनानी शुरू कर दी थी, जिसे मूल रूप से भूटान का क्षेत्र माना जाता है। चीन के इस दुस्साहस ने सभी को हैरत में डाल दिया था, क्योंकि उससे पहले तक यह ऐसी सरहद मानी जाती थी, जिसे लेकर कोई आपसी तनाव नहीं था। इस अचानक कार्रवाई से यह समझना भी मुश्किल था कि चीन उस इलाके पर कब्जा जमाना चाहता है या वह भड़काने के लिए यह कार्रवाई कर रहा है? तनाव उस समय काफी भड़क गया था, जब भारतीय सैनिकों ने आगे बढ़कर सड़क बनाने वाले कर्मचारियों का रास्ता रोक दिया था। यह तनाव कुछ समय तक काफी गरम रहा और उसके बाद चीनी सेना पीछे हट गई। माना जाता है कि चीन की सेना के तब पीछे हटने का कारण था वहां हो रहा ब्रिक्स सम्मेलन। उस सम्मेलन में चीन ऐसे संकेत नहीं देना चाहता था कि वह सीमा पर तनाव पैदा कर रहा है। दूसरे, यह आशंका भी दिख रही थी कि अगर तनाव बना रहता है, तो भारत सम्मेलन का बहिष्कार भी कर सकता है। उस समय इसे भारत की कूटनीतिक विजय भी माना गया था। लेकिन अब लगता है कि वह वक्त जरूरत के हिसाब से इस विवाद को चीन द्वारा दिया गया अल्प विराम भर था।

जब यह विवाद चल रहा था, तो कुछ विशेषज्ञों ने कहा था कि यह सब कुछ महीने की ही बात है और जब सर्दियों में इस इलाके में बर्फ गिरनी शुरू होगी, तो सेनाओं को पीछे हटना ही होगा। लेकिन लगता है कि डोका ला में इसका ठीक उल्टा हो रहा है। भारतीय फौज भले ही पीछे हट गई हो, लेकिन चीन की सेना ने भीषण सदिर्यों में वहां टिके रहने के हिसाब से डेरे डाल दिए हैं। शायद वह ठंडे मौसम में भी इस तनाव को गरमाए रखना चाहता है। यह विवाद उस समय गरमा रहा है, जब नई दिल्ली में भारत, चीन और रूस के विदेश मंत्रियों की बैठक चल रही है। जाहिर है, यह विवाद इस वार्ता के नतीजों पर भी भारी पड़ सकता है। हालांकि विदेश मंत्रियों का सम्मेलन और डोका ला विवाद दो अलग-अलग चीजें हैं। पर यह तय है कि भारत को अभी इस पर लंबी कूटनीतिक लड़ाई लड़नी होगी।
 

  • Hindi News से जुड़े ताजा अपडेट के लिए हमें पर लाइक और पर फॉलो करें।
  • Web Title:Editorial of Hindustan Hindi Newspaper 12th of December 2017