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2 जुलाई, 2020|12:51|IST

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लहूलुहान बार्सिलोना

स्पेन के दो शहरों में हुए आतंकी हमलों ने न सिर्फ पश्चिम को दहलाया, बल्कि पूरब की पेशानी पर भी बल डालने का काम किया है। यह वह दौर है, जब कमोबेश पूरा विश्व आतंकवाद से पीड़ित है, इसकी प्रकृति भले ही अलग-अलग क्षेत्र में अलग दिखे। इस बार निशाना स्पेन के दो बड़े शहर बने हैं। पहले स्पेन का सबसे बड़ा व खूबसूरत शहर बार्सिलोना और आठ घंटे बाद ही 120 किलोमीटर दूर का शहर कैंब्रिल्स। ये दोनों शहर पर्यटक बहुल स्पेनिश क्षेत्र कातोलोनिया में आते हैं। दोनों शहरों में भीड़ पर वाहन चढ़ा दिए गए। आतंकी हमलों की यह बिल्कुल नई प्रकृति भले न हो, मगर यह अभी उतना आम भी नहीं हुआ है। हाल के दिनों में फ्रांस, जर्मनी और बेल्जियम जैसे कई बड़े यूरोपीय देशों में वाहन को भीड़भाड़ वाले इलाके में घुसाकर लोगों की हत्या करने के मामले सामने आए, लेकिन स्पेन पहली बार इस प्रवृत्ति का निशाना बना है। 

इस वारदात को भी आईएसआईएस का कारनामा माना जा रहा है। साजिश की गंभीरता बताने के लिए इतना ही पर्याप्त है कि हमलावरों ने विस्फोटक भरी बेल्ट पहन रखी थी, ताकि वाहन को रोके जाने की स्थिति में वे खुद को उड़ा सकें। हमला पर्यटकों वाले इलाके में हुआ, जहां काफी विदेशी मौजूद थे। इनमें जर्मनी, रोमानिया, इटली, अल्जीरिया और चीन जैसे देशों के लोग भी मारे गए। हालांकि किसी भारतीय के हताहत होने की सूचना नहीं है। बदलते वैश्विक संदर्भों में इस हमले को नए अर्थों में लेने की जरूरत है। इन दिनों आतंकवादी, खासकर इस्लामिक स्टेट के आतंकी जैसे नए तरीके ईजाद कर रहे हैं, उसमें सभी देशों को सतर्क होकर सोचना होगा। पिछले दिनों ये आतंकी कई नए मुखौटों में दिखाई दिए। आईएस के मनसूबे इसलिए भी और खतरनाक होते गए हैं,  क्योंकि इस वैश्विक समस्या का हल तलाशने को दुनिया अभी तक एक नहीं हुई है। ताजा हमला नई तरह से सोचने को मजबूर कर रहा है। 

बार्सिलोना हमले के कई सबक हैं। इसने वाहनों के इस्तेमाल की आतंकवादी रणनीति की ओर ध्यान दिलाया है। फ्रांस, जर्मनी, स्वीडन और ब्रिटेन में बीते एक साल की घटनाएं इसकी तस्दीक कर रही हैं। हालांकि ऐसे हमलों के बाद के दावे अब बहुत विश्वसनीय नहीं रह गए हैं और पश्चिमी सोशल मीडिया में आईएस समर्थकों के जश्न को भी सीधे-सपाट रूप में न लेकर, उसके पीछे छिपे इरादों को देखने की जरूरत है। आवश्यकता इस बात की भी है कि हमलावरों और ऐसे समूहों के रिश्ते फिर से खंगाले जाएं, ताकि आने वाले वक्त में धोखे की कोई नई इमारत अचानक सामने न आ जाए। वाहनों को हथियार के रूप में इस्तेमाल करने की नई रणनीति के सामने आने के बाद अब भारत जैसे भीड़-भाड़ वाले देश को नए तरह से सोचना होगा।

हमें पश्चिमी विशेषज्ञों की उस सलाह को भी समझना होगा, जो इस नई इजाद को पूरी गंभीरता से लेने का हिमायती है, क्योंकि यह आतंक फैलाने और नुकसान पहुंचाने का सबसे आसान व सस्ता विकल्प बनकर जगह बना सकता है। दूसरी बात कि ऐसे हमलों के लिए किसी तकनीकी दक्षता की बहुत जगह नहीं है और इस नई इजाद का इस्तेमाल कोई सिरफिरा अपने पागलपन के लिए भी कर सकता है। ऐसे वक्त में, जब भारत में वाहन पर खास तरह का टैग लगाकर बड़े-बड़े राजमार्गों को टोल फ्री करने की शुरुआत हो रही हो, तब क्यों नहीं इसी तकनीक के सहारे ऐसे टैग या डिवाइस विकसित किए जाए, जो किसी भी शहर या प्रमुख बाजारों या पर्यटक स्थलों की ओर जाने वाले वाहनों को स्वत: स्कैन करके किसी खतरे से बचाने का जरिया बन सकें। 
 

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  • Web Title:Editorial of Daily Hindustan Daily Newspaper 19th of August