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नए आधार की ओर

आधार एक बार फिर नई जमीन हासिल करने की ओर बढ़ चला है। संसद के दोनों सदनों में पास होने के बाद अब नए आधार विधेयक को बस राष्ट्रपति की अनुमति का इंतजार है, इसके बाद यह कानून में बदल जाएगा। यह नया कानून मार्च में पास किए गए अध्यादेश की जगह ले लेगा। नए कानून की सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि अब किसी को कोई सेवा या सुविधा देने से इसलिए इनकार नहीं किया जा सकता कि उसके पास आधार कार्ड या नंबर नहीं है। नया कानून यह अधिकार भी देगा कि बचपन में बने आधार कार्ड को कोई भी शख्स वयस्क होने पर रद्द करा सकता है। एक और चीज जिसकी इस समय सबसे ज्यादा चर्चा है, पहचान पत्र के तौर पर आधार कार्ड का इस्तेमाल अब ऐच्छिक होगा, यानी अगर कोई चाहे, तो बैंक में खाता खुलवाने या नया टेलीफोन कनेक्शन लेने के लिए अपने पहचान पत्र के तौर पर आधार का इस्तेमाल कर सकता है। पहले यह जरूरी था कि ऐसी सेवाओं के लिए आधार से पहचान प्रमाणित की जाए। लेकिन पिछले साल सितंबर में सुप्रीम कोर्ट ने एक ऐतिहासिक निर्णय में ऐसी बाध्यता को खत्म कर दिया। इसी के बाद नए कानून की जरूरत थी।
पहचान पत्र के रूप में आधार का इस्तेमाल कई तरह से सुविधाजनक था, लेकिन शुरू से ही यह विवादास्पद रहा। खासकर इसलिए कि इसका अर्थ था इसके डाटा का निजी कंपनियों के पास पहुंच जाना। हालांकि जब सुप्रीम कोर्ट ने इसकी बाध्यता को खत्म किया, तो खासकर बैंकों और टेलीफोन कंपनियों के सामने इससे समस्याएं खड़ी होने लगी थीं। यह समस्या इसलिए भी थी कि देश में इस समय एक बहुत बड़ी आबादी ऐसी है, जिसके पास अपनी पहचान प्रमाणित करने का एकमात्र तरीका आधार कार्ड ही है। अब जब आधार का इस्तेमाल ऐच्छिक बनाया गया है, तो यह समस्या कुछ हद तक सुलझ सकती है। अच्छी बात यह है कि इसमें भी यह व्यवस्था की गई है कि आधार का दुरुपयोग न हो सके। इस्तेमालकर्ता को अब सीधे आधार नंबर देने की बजाय, हर मौके पर उसके लिए क्यूआर कोड लेकर देना होगा, जिससे संस्थाएं सीधे उसके आधार डाटाबेस तक नहीं पहुंच सकेंगी। ऐसे तरीके की जरूरत इसलिए भी थी कि आधार के इस्तेमाल को लगातार नया विस्तार मिल रहा है। हाल ही में पेश केंद्रीय बजट में यह प्रावधान किया गया है कि आयकर रिटर्न भरने का काम पैन कार्ड न होने की सूरत में आधार से भी किया जा सकता है। इसी के साथ सरकार ने यह विश्वास भी दिलाया है कि सरकार डाटा की सुरक्षा के विशेष उपाय करेगी।
नए कानून के बाद आधार के प्रावधान में लोगों का अधिकार केंद्रीय तत्व बन गया है। कानून यह भी कहता है कि कोई भी सरकारी सेवा या सुविधा हासिल करना नागरिक का अधिकार है, इसे आधार जैसी चीजों के होने या न होने के आधार पर रोका नहीं जा सकता। इसके बाद देश में जो आधार का इतना विस्तृत डाटाबेस बना है, उसके नए लक्ष्य तय करने का समय आ गया है। आज देश में एक नागरिक को आधार, पैन और मतदाता पहचान पत्र जैसे कई कार्ड रखने पड़ते हैं, इसे भी जल्द ही बदलने की जरूरत है। इसके लिए ‘एक देश, एक कार्ड’ जैसी व्यवस्था के बारे में भी सोचा जा सकता है। लेकिन इससे पहले डाटा सुरक्षा कानूनों की नींव मजबूत करनी होगी।

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  • Web Title:Editorial Hindustan Column on 10 july