DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

हताशा का खेल

 

नियंत्रण रेखा पर पाकिस्तानी सेना जो खेल खेल रही है, वह हास्यास्पद भी है और डराने वाला भी। हास्यास्पद इसलिए कि मंगलवार को भारत ने पाकिस्तान की सीमा में घुसकर बालकोट के आतंकी शिविरों को ध्वस्त करने का जो काम किया था, उसके जवाब में पाकिस्तानी वायु सेना के विमान बुधवार की सुबह भारतीय वायु सीमा में घुसकर वापस भाग जाने की ‘लुका-छिपी’ खेलते दिखाई दिए। लेकिन यह डराने वाला इसलिए है कि इस तरह से बात बिगड़ना लगभग तय है। पाकिस्तानी विमानों द्वारा भारतीय आकाश को छूते ही भारत की वायु सेना के विमान भी सक्रिय हो गए और वह शुरू हो गया, जिसे सैनिक भाषा में डॉग फाइट कहा जाता है। उन्होंने इस कवायद में लगे पाकिस्तान के एफ-16 को मार गिराया। इस दौरान एक भारतीय विमान भी क्षतिग्रस्त हुआ, जो नियंत्रण रेखा के उस पार पाकिस्तान के कब्जे वाले क्षेत्र में जा गिरा। विदेश मंत्रालय का आधिकारिक बयान बताता है कि इस विमान का पायलट लापता है। इस बीच पाकिस्तान ने न सिर्फ भारतीय पायलट को पकड़ने का दावा किया, बल्कि उसका वीडियो भी जारी कर दिया। हालांकि पाकिस्तान का दावा यह है कि उसने दो भारतीय पायलटों को पकड़ा है, जिनमें से एक ज्यादा घायल होने के कारण अस्पताल में भर्ती है। हालांकि उसके इस दावे पर संदेह ही व्यक्त किया जा रहा है।
यह सब उस समय हो रहा है, जब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पाकिस्तान अलग-थलग पड़ता दिख रहा है। मंगलवार से पाकिस्तान लगातार यह कह रहा है कि भारत ने उसकी वायु सीमा का उल्लंघन किया है, लेकिन दिक्कत यह है कि दुनिया का कोई भी देश अभी उसके समर्थन में खड़ा नहीं दिखाई दिया। ज्यादातर जगहों से पाकिस्तान को यह नसीहत ही मिली है कि वह आतंकवादियों का समर्थन करना बंद करे। यहां तक कि वह जिसे अपना सबसे विश्वसनीय और सदाबहार दोस्त कहता था, वह चीन भी पाकिस्तान के साथ नहीं आया। मंगलवार को भारतीय सर्जिकल स्ट्राइक पर टिप्पणी करते हुए चीन ने सिर्फ इतना कहा कि भारत और पाकिस्तान, दोनों देशों को संयम से काम लेना चाहिए, जबकि पाकिस्तान यह उम्मीद कर रहा था कि वायु सीमा का उल्लंघन करने के लिए वह भारत की आलोचना करेगा। इतना ही नहीं, बुधवार को चीन में जब भारत, रूस और चीन के विदेश मंत्री मिले, तो तीनों ने मिलकर आतंकवाद को शह देने के लिए पाकिस्तान की ही निंदा कर डाली। कभी अमेरिका में पाकिस्तान के राजदूत रहे हुसैन हक्कानी ने भी इस बात पर हैरत जताई है कि ऐसे मौके पर कोई भी पाकिस्तान के साथ नहीं खड़ा है। 
माना जा रहा है कि भारतीय सर्जिकल स्ट्राइक और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खुद के अलग-थलग पड़ने से ही उसमें वह खीझ पैदा हुई, जिसके चलते वह नियंत्रण रेखा पर ‘लुका-छिपी’ की नीति अपना रहा है। इस समय कुछ करते हुए दिखना उसकी मजबूरी भी है, क्योंकि पाकिस्तान के भीतर से यह दबाव लगातार बढ़ रहा है कि सर्जिकल स्ट्राइक का बदला लिया जाए। एक धारणा यह भी है कि बुधवार को जो हुआ, उसे अपनी उपलब्धि बताते हुए पाकिस्तान अब शांत हो जाएगा। पर दूसरी सोच यह कह रही है कि पाकिस्तान के भीतर से बदले का जो दबाव है, अगर वह बना रहा, तो ऐसी हरकतें और भी होंगी। ऐसा हुआ, तो हालात को युद्ध की ओर बढ़ने से रोक पाना शायद मुमकिन न हो। यह हुआ तो युद्ध से होने वाले व्यापक नुकसान का पूरा जिम्मेदार भी पाकिस्तान ही होगा। 

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:Editorial Hindustan Column for 28 february