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बढ़ती नफरत का दौर

हर आतंकी वारदात सिर्फ हमारे भरोसे को ही नहीं हिलाती, बल्कि उन सारी सच्चाइयों को हमारे सामने ला खड़ी करती है, जिनसे चाहे-अनचाहे हम मुंह चुराते रहे हैं। न्यूजीलैंड के शहर क्राइस्टचर्च में शुक्रवार को जो आतंकी वारदातें हुईं, उनमें ये सारे सच बहुत साफ-साफ देखे जा सकते हैं। ये वारदातें एक ऐसे देश के ऐसे शहर में हुईं, जो आतंकवाद की ताजा काली आंधी के कहर से बहुत कुछ बचा रहा है। इन वारदात ने यह बता दिया कि जब तक नफरत, उन्माद और उनके आस-पास चलने वाली सक्रियताएं इस दुनिया में हैं, कोई भी पूरी तरह सुरक्षित नहीं है। किसने सोचा था कि न्यूजीलैंड के दक्षिणी द्वीप का वह खूबसूरत शहर भी आतंकवाद की वजह से सुर्खियों में आ जाएगा, जिसका जिक्र हमारे मीडिया में अक्सर क्रिकेट मैच के समय ही होता है। साथ ही यह अब इस दुनिया में कुछ जगहों पर ही नहीं है, किसी भूगोल विशेष या समाजशास्त्र विशेष से जुड़ी नफरत ही नहीं है, और इसका दायरा लगातार फैल रहा है। अब सिर्फ क्रिया की नफरत ही नहीं, प्रतिक्रिया की नफरत भी है और यह भी उतनी ही खतरनाक है। दोनों ही तरफ की नफरत न सिर्फ लगातार बढ़ रही है, बल्कि एक-दूसरे को ज्यादा खतरनाक होने का बहाना          भी दे रही है। 
शुक्रवार की सुबह जब क्राइस्टचर्च की दो मस्जिदों में गोलीबारी और इसकी वजह से लोगों के मरने की खबर आई, तो इन्हें लेकर जो प्रतिक्रियाएं आईं, उन्हें हमें गंभीरता से लेना होगा। शुरुआती खबरों में हमलावर को श्वेत सिरफिरा बताया गया। यह भी बताया गया कि हमलावर एक गोरा विक्षिप्त था, जिसने न सिर्फ सरेआम नरसंहार किया, बल्कि श्वेत नस्ल की श्रेष्ठता का एक घोषणापत्र भी जारी किया। पहली प्रतिक्रिया उसे सिरफिरा और विक्षिप्त कहने को लेकर हुई। सोशल मीडिया पर ऐसे कई संदेश आए, जो कह रहे थे कि वैसे तो यह कहने का फैशन रहा है कि आतंकवाद का कोई धर्म नहीं होता, लेकिन जब इसे साबित करने का समय आया, तो लोग इससे मुकर क्यों गए? क्या इसका अर्थ है कि किसी नस्ल विशेष, या भूगोल विशेष या धर्म विशेष के लोगों को ही आतंकवादी कहा जाएगा और बाकी के लिए सिरफिरा व विक्षिप्त जैसी संज्ञाए इस्तेमाल की जाएंगी? यह प्रतिक्रिया बहुत तेज और तीखी थी, जो जल्द ही पूरे मीडिया पर छा गई। अच्छी बात यह हुई कि इसका असर भी दिखा। न्यूजीलैंड की प्रधानमंत्री जेसिंडा अर्डर्न ने जब इसे आतंकवादी वारदात बताया, तो न सिर्फ यह विवाद थोड़ा ठंडा हुआ, बल्कि यह भी स्पष्ट हो गया कि न्यूजीलैंड की सरकार किसी भी तरह की नफरत के खिलाफ खड़ी है। इसका जिक्र इसलिए जरूरी है कि खबरें बताती हैं कि शुक्रवार की आतंकवादी वारदात का अभियुक्त जिस दक्षिणपंथी विचारधारा से जुड़ा है, उसका प्रभाव न्यूजीलैंड और पड़ोसी ऑस्ट्रेलिया में लगातार बढ़ रहा है।
वैसे यह हाल किसी न किसी रूप में पूरी दुनिया का है। क्रिया और प्रतिक्रिया की नफरत हर जगह लगातार बढ़ रही है। यह सच है कि मानव सभ्यता ने इसके पहले भी नफरत के कई खतरनाक दौर देखे हैं, लेकिन यह भी सच है कि ऐसे हर दौर में प्यार, शांति, सद्भाव और विवेक की भी इतनी ही बड़ी ताकतें उम्मीद बंधाती हुई हमेशा सक्रिय रही हैं। लेकिन इस मोर्चे पर अब शांति है, इन ताकतों को बड़े पैमाने पर सक्रिय करना सबसे बड़ी चुनौती है।

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  • Web Title:Editorial Hindustan Column for 16 march