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नई उड़ान पर इसरो

लगातार कामयाबी की दास्तान लिखते आ रहे भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने एक और बड़ी उड़ान भरने की तैयारी कर ली है। यह उड़ान न सिर्फ इसरो की सफलता का बड़ा पैमाना साबित होगी, बल्कि ‘गगनयान मिशन’ के जरिए पहली बार अंतरिक्ष में अपनी मानव शक्ति भेजकर भारत को रूस, अमेरिका और चीन के बराबर में खड़ा कर देगी। गगनयान मिशन का मकसद महज तीन सदस्यीय चालक दल को अंतरिक्ष में भेजने और उन्हें सकुशल वापस पृथ्वी पर लाने का ही नहीं है, बल्कि यह मिशन इसलिए भी विशिष्ट होने जा रहा है कि भारत इस टीम में किसी महिला को भेजना चाहता है। इस मिशन को सारी दुनिया इसलिए भी पैनी नजर से देखेगी कि ऐसे किसी मिशन में इसरो की विफलता की दर दुनिया के किसी भी देश या अंतरिक्ष एजेंसी से काफी कम है, और यह भी कि इसकी सफलता असंदिग्ध है।
भारत की इस महत्वाकांक्षी उड़ान की जानकारी देते हुए इसरो के चेयरमैन के सिवन ने भारत के दूसरे चंद्र अभियान चंद्रयान-2 को भी इस साल के मध्य में प्रक्षेपित करने की घोषणा की, पहले इसे जनवरी से फरवरी के बीच छोड़ा जाना था। इस अभियान पर 800 करोड़ रुपये की लागत आएगी और इसे चंद्रयान-1 का खासा उन्नत संस्करण माना जा रहा है। यानी माना जाना चाहिए कि 2018 में कामयाबी के कई झंडे गाड़कर तारीफें बटोर चुका इसरो अगले कुछ वर्षों में वैश्विक स्तर पर ऐसी उड़ान भरने की तैयारी में है, जिसके बाद भारत को पीछे मुड़कर देखने की जरूरत नहीं होगी। गगनयान मिशन के यात्रियों को शुरुआती प्रशिक्षण भारत में ही दिया जाएगा, जबकि एडवांस टे्रनिंग के लिए रूस भेजने की योजना है। ऐसा नहीं है कि भारत अपने अंतरिक्ष यात्रियों को खुद बेहतर प्रशिक्षण देने की स्थिति में नहीं है। भारत तो तकनीकी दक्षता के साथ ही बाकी सब कुछ अपने दम पर करने में सक्षम है। इन अंतरिक्ष यात्रियों को शुरुआती प्रशिक्षण भी भारत में ही दिया जाएगा, लेकिन समय कम होने के कारण रूस के अनुभव का लाभ लेना व्यावहारिक भी है, तार्किक भी। इससे सहयोग की और भी कई संभावनाओं के द्वार खुल सकते हैं।
गगनयान मिशन को भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम का टर्निंग प्वॉइंट माना जा रहा है। यह अनायास नहीं है कि इसरो ही नहीं, उससे जुड़े पूर्व वैज्ञानिक भी इस मिशन की सफलता के प्रति खासे उत्साहित हैं। ऐसे समय में, जब विज्ञान की दुनिया में नई तकनीक और नए प्रयोग वैश्विक स्तर पर हर दिन नई चुनौती पेश कर रहे हों, गगनयान मिशन न सिर्फ भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम का एक नया प्रस्थान बिंदु साबित होगा, बल्कि इसरो के सभी केंद्रों को तकनीकी दक्षता देने के साथ ही यह देश को एक नए मुकाम पर खड़ा करने में सफल होगा। अब इतना तो तय ही है कि सब कुछ समय से हुआ, तो दिसंबर 2020 और जुलाई 2021 में मानवरहित यान छोड़े जाएंगे, जबकि दिसंबर 2021 में महिला क्रू मेंबर के साथ मानव मिशन अंतरिक्ष में भेजा जाएगा। इसरो ने अतीत से अब तक भारत को आसमान की तमाम बुलंदियों पर पहुंचाया है। फिलहाल इसके लिए ऐसा कुछ भी नहीं, जो असंभव दिखता हो। इसरो यूं भी असंभव को संभव बनाने का नाम है। इस बार तो बस परियोजना को तय समय सीमा में लक्ष्य तक पहुंचाना है। इस सफलता के प्रति हम सब पूरी तरह से आश्वस्त हैं।

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  • Web Title:Editorial Hindustan Column for 12 january