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भ्रष्ट अधिकारी

पहली नजर में यह एक सामान्य सी खबर ही है। सरकार ने राजस्व विभाग के 12 वरिष्ठ अधिकारियों को भ्रष्टाचार और यौन उत्पीड़न के आरोपों में बाहर का रास्ता दिखा दिया है। बेशक, यह जरूरी कदम है, और सराहनीय भी। इन अधिकारियों के खिलाफ लगे आरोपों के विस्तार में जाएं, तो पता चलता है कि ये सारे मामले न सिर्फ गंभीर हैं,  बल्कि पूरी व्यवस्था सारी जानकारी और मामलों की गंभीरता को समझते हुए भी लगातार चल रही थी। मसलन, इन 12 अधिकारियों में शामिल एक आयकर आयुक्त का मामला ही लें। उनके खिलाफ आय से अधिक संपत्ति के आरोप सही पाए गए थे और इन आरोपों के कारण उन्हें दस साल पहले ही निलंबित कर दिया गया था। उनके खिलाफ भ्रष्टाचार कानून के तहत मामला दर्ज कराया गया, जो अभी तक चल रहा है। यह अकेला मामला ही बता देता है कि भ्रष्टाचार रोकने की हमारी व्यवस्था में कितने छिद्र हैं। जब किसी कर्मचारी को निलंबित करके उसके खिलाफ मामला चलाया जाता है, तो उसे इस निलंबन के दौरान उसके वेतन का एक हिस्सा दिया जाता है और इसके अलावा उसे सेवा से संबंधित अन्य सुविधाएं भी पहले की ही तरह मिलती रहती हैं। यह व्यवस्था तब तक रहती है, जब तक कि इस मामले में कोई अंतिम फैसला न हो जाए। जाहिर है कि इस मामले में यह अंतिम फैसला पिछले दस साल से अटका हुआ था। कहावत है कि देर से हुआ न्याय, दरअसल न्याय न मिलना ही होता है, यानी ऐसे मामलों में फैसले का लंबे समय तक लटके रहना, उस जनता के साथ अन्याय ही है, भ्रष्टाचार मुक्त प्रशासन जिसका अधिकार है।
जिन अधिकारियों को सेवा मुक्त किया गया है, उनमें एक ऐसे अधिकारी भी हैं, जिन पर एक कारोबारी से दबाव डालकर धन उगाहने का आरोप है। एक ऐसे अधिकारी भी हैं, जिन्होंने अपने और अपने परिवारी जनों के नाम पर सवा तीन करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति जमा कर रखी थी, जबकि उनकी आमदनी के सारे स्रोतों से इतनी संपत्ति बनाना मुमकिन नहीं था। वैसे इन 12 में से ज्यादातर के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति के मामले ही हैं। इसके अलावा, इसी फेहरिस्त में एक ऐसे अधिकारी भी हैं, जिन पर अपने ही विभाग की दो महिला अधिकारियों के यौन उत्पीड़न का मामला चल रहा है। जिन महिला अधिकारियों का उत्पीड़न हुआ, वे आयुक्त स्तर की अधिकारी थीं। यह बताता है कि महिलाएं भले ही वरिष्ठ अधिकारी हो जाएं, पर वे सुरक्षित नहीं हैं, साथ ही यह भी कि कार्यस्थलों पर महिलाओं को यौन उत्पीड़न से बचाने के लिए अभी बहुत कुछ किए जाने की जरूरत है।
ये मामले राजस्व विभाग के हैं, लेकिन ये स्थितियां पूरे सरकारी तंत्र में ही हैं। ये मामले बता रहे हैं कि प्रशासन को भ्रष्टाचार और यौन उत्पीड़न से मुक्त बनाने का काम कितना जटिल है। ऐसे मामलों को निपटाने में कई बरस लगते हैं और न तो समय रहते सजा मिल पाती है और न सजा बाकी लोगों के लिए सबक बन पाती है। भ्रष्टाचार से मुक्ति के लिए सबसे जरूरी यह है कि मामलों का निपटारा जल्दी हो और भ्रष्टाचारियों के लिए सजा की पक्की व्यवस्था बने। अधिकारियों को सेवामुक्त किया जाना स्वागत योग्य है, पर प्रशासन से भ्रष्टाचार मिटरने के लिए इससे आगे बढ़कर बहुत कुछ करने की जरूरत है। 

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  • Web Title:Editorial Hindustan Column 12 june