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21 जनवरी, 2020|11:02|IST

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खतरनाक चूक

एक दिन पहले हमें पता पड़ा कि देश के हवाई अड्डों की सुरक्षा व्यवस्था में कई बहुत बड़ी खामियां हैं। नागरिक उड्डयन सुरक्षा ब्यूरो ने जब दिल्ली व पुणे के देश के दो व्यस्त हवाई अड्डों पर सुरक्षा अभ्यास किया, तो इसमें कई खामियां मिलीं। इस सुरक्षा अभ्यास में लगे ब्यूरो के लोग सुरक्षा के सभी चक्रों को पार करते हुए डमी बम को अंदर ले जाने में कामयाब रहे। और अगले ही दिन शुक्रवार को पता पड़ा कि सुरक्षा व्यवस्था की ये खामियां सिर्फ हवाई अड्डों तक नहीं हैं। उत्तर प्रदेश विधानसभा में सदन के भीतर घातक विस्फोटक पीईएनटी का बरामद होना बताता है कि सुरक्षा को लेकर हमें कितना गंभीर होने की जरूरत है। उत्तर प्रदेश विधानसभा भवन में जो हुआ, वह कोई सुरक्षा अभ्यास नहीं था, वह सचमुच का विस्फोटक था और विशेषज्ञों का कहना है कि इसकी मात्रा इतनी थी कि विधानसभा भवन का एक तिहाई हिस्सा तो उड़ाया ही जा सकता था। इससे हम यह आसानी से समझ सकते हैं कि विधानसभा के सभी सुरक्षा चक्रों को पार करता हुआ कितना बड़ा खतरा सदन तक पहुंच गया, जहां यह विस्फोटक सफाई के दौरान नेता विपक्ष की कुर्सी के करीब पड़ा मिला। यह सचमुच गंभीर होकर ठोस कदम उठाने का समय है, इसे केवल सुरक्षा की चूक कहकर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

किसी भी विधानसभा भवन में प्रवेश के कड़े मानक हमेशा से होते  रहे हैं। कोई भी व्यक्ति कभी भी विधानसभा भवन में प्रवेश नहीं कर सकता। और उससे भी बड़ी बात यह है कि सदन में प्रवेश की अनुमति तो किसी को भी नहीं होती। वहां या तो माननीय सदस्य जा सकते हैं या फिर सुरक्षा व रख-रखाव में लगे कर्मचारी। ऐसी जगह अगर विस्फोटक पहुंच रहा है, तो यह सिर्फ सुरक्षा में चूक का मामला नहीं है, बल्कि यह भी आशंका है कि इसे अंजाम देने वालों ने विधानसभा के व्यवस्था तंत्र में भी सेंध लगा ली हो। अगर ऐसा है, तो खतरा सचमुच बहुत बड़ा है और अभी पूरी तरह से टला नहीं है। सदन से जो विस्फोटक बरामद हुआ है, उसका ब्योरा भी परेशान करने वाला है।  यह आधुनिक पीढ़ी का सबसे खतरनाक और शक्तिशाली सिंथेटिक विस्फोटक है। दुनिया भर में ऐसी बहुत सारी वारदात हुई हैं, जिन्हें अंजाम देने के लिए आतंकवादियों ने पीईएनटी का इस्तेमाल किया। इसका अर्थ है कि न सिर्फ यह विस्फोटक भारत में सक्रिय आतंकवादियों के हाथ पहुंच गया है, बल्कि यह भी संभव है कि उन्होंने इसके इस्तेमाल का प्रशिक्षण भी प्राप्त कर लिया हो। वैसे इस विस्फोटक का इस्तेमाल भारत में खनन उद्योग और पहाड़ों में सुरंग बनाने आदि के लिए होता है। अगर इसकी कुछ मात्रा आतंकवादियों के हाथ लग गई, तो इसका अर्थ है कि सुरक्षा की जरूरत कई मोर्चों पर है। इससे इनकार नहीं किया जा सकता कि यह तस्करी के जरिये लाया गया हो, पर तस्करी भी सुरक्षा खामी का ही नतीजा होती है। 

जाहिर है कि अचूक सुरक्षा की जरूरत हमें एक-दो जगह, या कुछ खास इमारतों पर ही नहीं, बल्कि सभी जगह है। किसी भी एक जगह की चूक किसी भी दूसरी जगह या सभी जगहों के लिए बड़ा खतरा साबित हो सकती है। लेकिन सभी जगह सुरक्षा के इंतजाम करना या दूसरे शब्दों में कहें, तो सुरक्षा की संस्कृति बनाना एक काफी कठिन काम है। हमारे देश में सुरक्षा बढ़ाने का अर्थ होता है, आम लोगों की परेशानियां बढ़ाना। इस मामले में हमें उन देशों से सीखने की जरूरत हैं, जिन्होंने आम लोगों की परेशानी बढ़ाए बिना या उनके सुख चैन में किसी भी तरह की खलल डाले बगैर ऐसे इंतजाम किए कि आतंकवादी वारदात फिर न हो सकें। हमें भी ऐसे ही इंतजाम के लिए तैयार हो जाना चाहिए।