इफको ने नैनो उर्वरकों को बढ़ावा देने के लिए 560 जिलों में अभियान शुरू किया
भारतीय कृषक उर्वरक सहकारी लि. (इफको) ने नैनो तरल उर्वरकों के बारे में जागरूकता पैदा करने और पारंपरिक मिट्टी के पोषक तत्वों के उपयोग को कम करने के लिए एक राष्ट्रव्यापी अभियान शुरू किया है…

नई दिल्ली, हिन्दुस्तान ब्यूरो। भारतीय कृषक उर्वरक सहकारी लि. (इफको) ने नैनो तरल उर्वरकों के बारे में जागरूकता पैदा करने और पारंपरिक मिट्टी के पोषक तत्वों के उपयोग को कम करने के लिए एक राष्ट्रव्यापी अभियान शुरू किया है। लॉन्च कार्यक्रम इफको सदन, नई दिल्ली में आयोजित हुआ, जिसमें इफको के माननीय अध्यक्ष दिलीप संघाणी ने उद्घाटन किया। इफको के प्रबंध निदेशक के. जे. पटेल ने भी इस अवसर पर उपस्थित थे।
शुक्रवार को सहकारी संगठन ने कहा कि उसने भारतीय किसानों के बीच नैनो उर्वरकों को अपनाने के लिए 'इफको नैनो उर्वरक जागरूकता महाअभियान' शुरू किया है। यह अभियान 19 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 560 जिलों और 3,477 तहसीलों को अपने दायरे में लेगा। यह अभियान माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और माननीय केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह की प्रेरणा से आरंभ हुआ है और 'आत्मनिर्भर भारत' तथा 'सहकार से समृद्धि' के राष्ट्रीय मिशनों के अनुरूप है। इस पहल को माननीय केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान और माननीय केंद्रीय स्वास्थ्य, परिवार कल्याण, रसायन एवं उर्वरक मंत्री जे. पी. नड्डा का भी विशिष्ट समर्थन प्राप्त है।
इफको के चेयरमैन दिलीप संघानी ने कहा, ''भारत आज एक ऐतिहासिक चौराहे पर खड़ा है जहां परंपरा तकनीक से मिलती है, और यह संगम है जो भारतीय कृषि के लिए एक नई दिशा बना रहा है।'' संघानी ने बताया कि इस अभियान का मकसद नैनो यूरिया प्लस, नैनो डीएपी, नैनो एनपीके, नैनो जिंक और नैनो कॉपर का बड़े पैमाने पर प्रचार करना है, किसानों को सही तरीके से इस्तेमाल करने का प्रशिक्षण देना, खासकर पत्तियों पर छिड़काव करना, पुराने उर्वरक पर निर्भरता कम करना और सहकारिता नेटवर्क के जरिए आखिरी आदमी तक पहुंच पक्का करना है।
उन्होंने नैनो उर्वरक क्रांति को भारतीय कृषि के लिए एक परिवर्तनकारी क्षण बताया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि नैनो यूरिया प्लस की एक 500 मिली की बोतल पारंपरिक यूरिया की तुलना में कहीं बेहतर पोषक तत्व दक्षता प्रदान करती है, साथ ही मृदा स्वास्थ्य क्षरण, जल प्रदूषण और भारत की उर्वरक आयात निर्भरता की गंभीर चुनौतियों को भी संबोधित करती है। उन्होंने जोर देकर कहा कि नैनो उर्वरक कोई अस्थायी उपाय नहीं हैं - ये एक स्थायी, वैज्ञानिक रूप से सिद्ध समाधान हैं जो कम लागत, अधिक उत्पादकता, स्वस्थ मिट्टी और सार्थक पर्यावरण संरक्षण प्रदान करते हैं। उन्होंने आगे कहा कि ये उत्पाद सहकारी पारिस्थितिकी तंत्र को भी मजबूत करेंगे, जिसमें पैक्स और सहकारी नेटवर्क उनके वितरण और किसान शिक्षा में और अधिक महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
इफको ने 218 लाख से अधिक बोतलें नैनो यूरिया प्लस लिक्विड और 64.26 लाख से अधिक बोतलें नैनो डीएपी लिक्विड की बिक्री हासिल की। इफको के नैनो जिंक और नैनो कॉपर उत्पादों ने भी पहले वर्ष में क्रमशः 57 लाख और दो लाख बोतलों की प्रभावशाली बिक्री दर्ज की। यह उल्लेखनीय है कि नैनो यूरिया प्लस की 208.26 लाख बोतलें पारंपरिक यूरिया के 9.37 लाख मीट्रिक टन के बराबर हैं, और नैनो डीएपी की 57.89 लाख बोतलें डीएपी के 2.89 लाख मीट्रिक टन के बराबर हैं, जो देश के लिए रसद, ऊर्जा और आयात लागत में भारी बचत को दर्शाती हैं।
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