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साख पर आंच का खतरा

इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन से संबंधित विवाद इस समय सबसे अधिक गरमाया हुआ है, क्योंकि इसमें गड़बड़ी के आरोप एक नहीं, कई राजनीतिक पार्टियों की ओर से लगे हैं। बहरहाल, आरोपों-प्रत्यारोपों का सिलसिला तो चलता रहेगा, मगर अब चुनाव आयोग के लिए इस विवाद को केवल अपने दावों के आधार पर दबाना मुश्किल होगा। उसे इन मशीनों के बारे में प्रकट किए जा रहे संदेह को पूरी तरह से मिटाना होगा, वरना भारतीय चुनाव प्रणाली की साख पर आंच आने का खतरा है। पूरे विश्व की निगाह भारत में होने वाले चुनावों पर लगी रहती है और उनकी विश्वसनीयता को दांव पर नहीं लगाया जा सकता। निर्वाचन आयोग पर समय-समय पर आरोप लगते रहे हैं। किसी समय ऐसे आरोप लगाने वालों में भाजपा सबसे आगे हुआ करती थी। इसके बावजूद अभी तक आयोग की निष्पक्षता व स्वतंत्रता अक्षुण्ण बनी रही है और उसकी विश्वसनीयता पर किसी को भी शंका नहीं है। अन्य देश भी भारत की चुनाव-व्यवस्था की तारीफ करते हैं। ऐसे में, राजनीतिक दलों, निर्वाचन आयोग और केंद्र सरकार, सभी का यह फर्ज बनता है कि वे इस विश्वसनीयता को बरकरार रखने के हरसंभव प्रयास करें। यह बात अब सभी स्वीकार करने लगे हैं कि चुनाव सुधारों की जरूरत बढ़ती जा रही है। ऐसे में, सभी पक्षों को अपेक्षित इच्छाशक्ति दिखानी होगी।

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