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हमारे भीतर का रामपुर

उत्तर प्रदेश के रामपुर में दो लड़कियों के साथ घटी घटना का वीडियो देखने के बाद यकीन हो गया कि हम मानव इतिहास के सबसे बर्बर समय में जी रहे हैं। जिस तरह 14 लड़के सरेराह दो डरी हुई लड़कियों के जिस्म के साथ पाशविक खेल खेल रहे थे, वह खून जमा देने वाला वाकया था। कोई भी संवेदनशील व्यक्ति इस घटना के वीडियो को पूरा नहीं देख सकता। उस घटना से भी शर्मनाक यह था कि वहां मौजूद लोग महज तमाशबीन बने रहे।

वे शायद उस वीभत्सता में भी अपना मनोरजन ढूंढ़ रहे थे। उन दोनों लड़कियों की चीखों और मिन्नतों से किसी की भी संवेदना नहीं जगी। किसी के भी खून में उबाल नहीं आया। ऐसी घटनाएं बताती हैं कि प्रदेश की सरकारों ने पुलिस को किस कदर सियासी, कायर और श्रीहीन बना दिया है। अब वहां पुलिस से कोई नहीं डरता। दो टके के नेता भी उसे थप्पड़ मारकर चले जाते हैं और दो टके के अपराधी भी। 

बावजूद इसके रामपुर की यह घटना एक सवाल तो छोड़ ही जाती है कि क्या सड़कों पर, गलियों में, खेतों में और यहां तक कि घरों में भी स्त्रियों की इज्जत और अस्मिता की हिफाजत करना सिर्फ सरकार व पुलिस का दायित्व है? हम उनकी लुटती हुई इज्जत का तमाशा देखने और उसका वीडियो भर बनाने के लिए हैं?

 

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  • Web Title:Our inner Rampur