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अग्निवीरों पर होती राजनीति गलत

आए दिन विपक्षी दलों द्वारा अग्निपथ योजना को खत्म करने की बात कही जा रही है। उनको इस योजना की तह में नहीं जाना, बस इसकी आलोचना करनी है, क्योंकि एनडीए सरकार द्वारा शुरू की गई यह योजना है और राजनीतिक...

अग्निवीरों पर होती राजनीति गलत
Pankaj Tomarहिन्दुस्तानSun, 26 May 2024 09:32 PM
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आए दिन विपक्षी दलों द्वारा अग्निपथ योजना को खत्म करने की बात कही जा रही है। उनको इस योजना की तह में नहीं जाना, बस इसकी आलोचना करनी है, क्योंकि एनडीए सरकार द्वारा शुरू की गई यह योजना है और राजनीतिक पैंतरेबाजी के तहत उनके लिए इसका विरोध अनिवार्य है। यही कारण है कि सत्ता में आते ही विपक्ष द्वारा इसे कूड़े के ढेर में फेंक देने की बात कही जा रही है। बार-बार यही कहा जा रहा है कि अग्निपथ योजना बीते दिनों की बात हो जाएगी, जबकि चुनाव आयोग ने भी ऐसे विषयों को संज्ञान में लिया है। इन सबसे जनता की नजर में विपक्ष की छवि खराब हो रही है। ऐसा लगता है कि सिर्फ कुरसी पाना ही विपक्षी दलों का एकमात्र मकसद है, जनता का कल्याण अथवा देशहित की बात वे नहीं कर रहे। अग्निपथ योजना की खासियत अगर उनको समझ नहीं आ रही, तो पहले वे इसे समझें, फिर इसके खात्मे की बात करें। आखिर कोई नेता आम नागरिकों के हित की या देश को तरक्की के पथ पर कैसे आगे बढ़ाना है, इस पर बात क्यों नहीं करता? क्या कुछ नेताओं का एकमात्र मकसद चुनाव को किसी भी हाल में जीतना ही है।
शैलबाला कुमारी, गृहिणी


एक विचार है यह
अग्निपथ योजना आखिर है क्या? क्यों विपक्ष के लोग इसका विरोध करते रहते हैं? कांग्रेस ने तो अपने घोषणापत्र में इसे खत्म करने का भी एलान कर दिया है। यदि हमें इस योजना को समझना है, तो इसकी गहराई में जाना पड़ेगा। फौज में आमतौर पर पढ़े-लिखे गरीब नौजवान भर्ती होना चाहते हैं। सेना को अगर 5,000 जवानों की भर्ती करनी है, तो वह करीब 20,000 नौजवानों को बतौर अग्निवीर चयनित करती है, जिनके चार साल के कार्यकाल को प्रशिक्षण ही मानिए और उसके बाद सबसे सफल 5,000 जवानों को फौज अपने में समाहित कर लेती है। इससे निश्चित तौर पर सेना को सबसे अच्छे जवान मिलते हैं। हालांकि, ऐसा नहीं है कि जो 15,000 अग्निवीर पीछे रह जाते हैं, वे खाली हाथ रह जाते हैं। उनको भी बहुत फायदा होता है। एक तो उन्हेें एकमुश्त एक रकम मिल जाती है, जिससे भविष्य में वह कोई भी अपना काम कर सकते हैं। फिर, चार साल का फौजी जीवन उन्हें एक काबिल इंसान बनाने में मददगार साबित होता है। ऐसे में, भला कोई कैसे इस योजना की अलोचना कर सकता है? जाहिर है, जो अभी विरोध कर रहे हैं, वे इस योजना के मूल मकसद से अनजान हैं। उनको बुनियादी जानकारी हासिल करनी चाहिए, फिर इसके पक्ष या विपक्ष में अपनी राय बनानी चाहिए।
बजरंग, टिप्पणीकार

नौजवानों के साथ एक भद्दा मजाक
किसी भी सरकार की यह पहली जिम्मेदारी होती है कि वह अपने नागरिकों को सुरक्षा व सम्मानजनक नौकरी दे। बेशक, सरकार सभी जरूरतमंदों को सरकारी पद नहीं दे सकती, लेकिन कम से कम ऐसी व्यवस्था तो कर ही सकती है कि हर योग्य हाथ को वाजिब काम मिले। अग्निपथ योजना ऐसे हाथों को बेकाम बनाती है। इसमें चार साल तक सरकार नौजवानों की प्रतिभा का इस्तेमाल करती है और फिर उनमें से चंद जवानों को फौज में शामिल करके शेष को वापस घर भेज देती है। इस तरह, जवानी के  बहुमूल्य चार साल देश को देने के बाद अग्निवीरों को कुछ हासिल नहीं होता और वे खाली हाथ रह जाते हैं। हां, अगर चार साल के बाद उनको किसी अन्य सेवा में रोजगार की गारंटी मिले, तो इस योजना को सराहा जा सकता है, लेकिन ऐसा करने की कोई नीयत नहीं दिखाई गई, इसलिए इस योजना का विरोध वाजिब जान पड़ रहा है। इसलिए इसकी आलोचना होनी चाहिए, क्योंकि फौज की जरूरतें चार साल की इस कॉन्ट्रेक्ट वाली नौकरी से शायद ही पूरी होती हैं। वह तो नौकरी की शुरुआत में नौजवानों पर इसलिए निवेश करती है, क्योंकि वह उनकी संभावनाओं का अपने हित में इस्तेमाल करना चाहती है। अग्निवीरों के साथ ऐसा नहीं होता। इसीलिए, यदि इस बार आम चुनाव में अग्निपथ योजना सुर्खियों में है और यह गलत नहीं है। इस योजना को कूड़ेदान में ही फेंकना चाहिए। देश के नौजवानों को स्थायी और सुरक्षित रोजगार मिलना चाहिए। उनको अग्निवीर बनाना उनके हितों के साथ समझौता करना है।
चंदन कुमार, टिप्पणीकार


नुकसान है इसका
अभी ज्यादा दिन नहीं हुए, जब यह खबर आई थी कि अग्निपथ योजना की वजह से नेपाल अपने गोरखा जवानों को भारतीय सेना में भेजने में हीला-हवाली कर रहा है। दूसरी ओर, भारत को सबसे बड़ा खतरा चीन से है, जो सीमावर्ती इलाकों पर नजर गड़ाए बैठा हैै। बीजिंग अब इन गोरखा लोगों को अपनी फौज में लेने के लिए उतावला हो रहा है। जाहिर है, अग्निपथ योजना के रूप में एक बचकानी नीति ने हमारे सामने गोरखा योद्धाओं के नुकसान का संकट खड़ा कर दिया है, जबकि उनकी बहादुरी की चर्चा पूरी दुनिया में रही है और दुर्गम पहाड़ी इलाकों के लिए वे काफी दक्ष माने जाते रहे हैं। इन सब मुश्किलों को देखते हुए हमें अग्निपथ योजना की फिर से समीक्षा करनी चाहिए। अगर हम आने वाले दिनों में अपनी फौज को अधिक ताकतवर बनाना चाहते हैं, तो हमें सही विकल्प ढूंढ़ना होगा। अग्निपथ योजना फायदा कम और नुकसान ज्यादा करती दिख रही है।
दीपक, टिप्पणीकार