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फलस्तीनियों की मदद का बढ़ा भरोसा

इजरायल और हमास के बीच हुए चार दिवसीय संघर्ष-विराम समझौते से इस युद्ध के खत्म होने की संभावना जगने लगी है। 45 से अधिक दिन हो गए और दोनों पक्षों के लड़ाके व सैनिक आमने-सामने हैं। इसका सबसे ज्यादा...

फलस्तीनियों की मदद का बढ़ा भरोसा
Amitesh Pandeyहिन्दुस्तानFri, 24 Nov 2023 10:55 PM
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इजरायल और हमास के बीच हुए चार दिवसीय संघर्ष-विराम समझौते से इस युद्ध के खत्म होने की संभावना जगने लगी है। 45 से अधिक दिन हो गए और दोनों पक्षों के लड़ाके व सैनिक आमने-सामने हैं। इसका सबसे ज्यादा नुकसान आम लोगों को हो रहा है। पहले हमास के आतंकियों ने आम इजरायलियों को निशाना बनाया और बाद में इजरायल ने गाजा पर हमला करके आम लोगों के नरसंहार को अंजाम दे दिया। करीब 1,400 इजरायलियों के कत्लेआम के प्रतिशोध में इजरायली फौज अब तक लगभग 15,000 फलस्तीनियों को मार चुकी है, जिनमें आधे से ज्यादा महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग हैं।
बहरहाल, कतर की मध्यस्थता के बाद यह संघर्ष-विराम हुआ है, जिसमें दोनों पक्ष एक-दूसरे के बंधकों व कैदलोगों को रिहा करने पर सहमत हो गए हैं। मगर इससे भी बड़ा जो फायदा होगा, वह यह कि राहत सामग्री व दवाइयां लेकर सैकड़ों ट्रक गाजा में दाखिल हो सकेंगे। ईंधन, भोजन-पानी और दवाओं के अभाव में गाजा की क्या स्थिति हो गई है, यह बताने की जरूरत नहीं है। माना जा रहा है कि फलस्तीनियों को महज 10 प्रतिशत भोजन उपलब्ध है और अस्पतालों में बिजली एवं दवा की कमी के कारण मरीजों का हाल बेहाल है। ऊपर से इजरायली सेना चुन-चुनकर अस्पतालों को निशाना बना रही है, क्योंकि उसका मानना है कि अस्पतालों के नीचे बंकर में हमास के आतंकी छिपे हो सकते हैं। हालांकि, इसकी पुष्टि किसी ने नहीं की है कि वहां आतंकियों के ठिकाने हैं। वहां पर ऐसे हालात बन गए हैं कि जो लोग गोलियों से नहीं मरेंगे, वे संभवत: भूख और बीमारी से मर जाएंगे और तब शायद पूरे गाजा पर कब्जा करने की इजरायली मंशा पूरी हो पाए। मगर फिलहाल संघर्ष-विराम के कारण इजरायल की यह मंशा पूरी होती नहीं दिख रही है। फलस्तीनियों तक राहत सामग्री व जरूरी मदद पहुंचने की उम्मीदें बढ़ गई हैं।
हालांकि, इस पूरी कवायद में अमेरिका के हित भी जुड़े हुए हैं। इससे पहले संयुक्त राष्ट्र ने युद्ध-विराम की जितनी भी कोशिशें कीं, अमेरिकी रवैये के कारण वे कामयाब न हो सकीं, मगर अब यह इसलिए संभव हो सका है, क्योंकि 7 अक्तूबर की घटना के बाद दस के करीब अमेरिकी सैनिक भी लापता हैं, और माना जा रहा है कि हमास के आतंकियों ने उन्हें भी बंधक बना लिया है। खैर, वजह जो भी हो, पर इस संघर्ष-विराम की फिलहाल सख्त जरूरत थी। अगर इस संघर्ष-विराम के बहाने हमास और इजरायल के बीच कुछ विश्वास पैदा होता है, तो आम लोगों को काफी राहत मिल सकेगी। अब उनकी मुश्किलों का अंत होना ही चाहिए।
विनीत सरावगी, टिप्पणीकार

इस युद्ध का अंत अभी कुछ दूर
गाजा के साथ भले ही इजरायल ने संघर्ष-विराम समझौता कर लिया है, पर इसका यह मतलब नहीं है कि वह शिथिल पड़ गया है या इस युद्ध का अब अंत होने जा रहा। खुद इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने साफ कहा है कि संघर्ष-विराम के बाद हमास को खत्म करने के लिए युद्ध चलता रहेगा। उन्होंने तो अपनी खुफिया एजेंसी मोसाद को स्पष्ट रूप से कह दिया है कि वह हमास के कमांडरों को ढूंढ़ने का काम अनवरत करती रहे, ताकि उनके खिलाफ तत्काल कार्रवाई हो सके। उन्होंने यह भी कहा है कि संघर्ष-विराम का यह मतलब नहीं कि हमास के प्रमुखों के खिलाफ इजरायल अपनी कार्रवाई रोक देगा। जाहिर है, इस संघर्ष-विराम के बहाने अमन के जो सपने देखे जा रहे हैं, वे सिर्फ दिवास्वप्न हैं। इस तर्क के पीछे एक वजह और है। इजरायल के रक्षा मंत्री भी हमास के कमांडरों के खिलाफ हरसंभव कार्रवाई करने की बात कह रहे हैं। उनके मुताबिक, हमास के आतंकी उधार के समय में जी रहे हैं, उन्होंने चूंकि महिलाओं और बच्चों को मारा है, इसलिए उनका अंत भी तय है। अब जब इजरायल के प्रधानमंत्री और रक्षा मंत्री की ऐसी सोच है, तो भला शांति की उम्मीद कैसे पाली जा सकती है?
वास्तविकता यही है कि संघर्ष-विराम, बंधकों की रिहाई और फंसे हुए फलस्तीनी नागरिकों तक राहत पहुंचाने का वैश्विक दबाव बेशक दोनों पक्षों पर पड़ रहा था, लेकिन इजरायली सैन्य कमांडरों का स्पष्ट कहना है कि वे अपने लक्ष्य की तरफ तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। चूंकि हमास के आतंकी घनी आबादी वाले गाजा में घुस गए हैं, इसलिए उनको पकड़ने या बाहर निकालने के लिए वे हर मुमकिन तरकीब आजमाते रहेंगे। स्पष्ट है, इस कवायद में उन्हें उन आम फलस्तीनियों की कतई परवाह नहीं, जो इस बर्बर युद्ध में मारे जा रहे हैं। तेल अवीव के मुताबिक, हमास मानव कवच के रूप में महिलाओं और बच्चों का इस्तेमाल कर रहा है, इसलिए उनको इसकी कीमत चुकानी ही होगी।
एक अन्य वजह यह भी है कि हमास को इजरायल किसी भी कीमत पर कमतर नहीं समझ रहा। अभी संघर्ष-विराम में भले ही उसने अपने कदम कुछ पीछे खींच लिए हैं, लेकिन वह पूरी ताकत से फिर आगे बढ़ेगा। इतिहास उसकी इस रणनीति की पुष्टि करता है। जब-जब इजरायल और फलस्तीन आमने-सामने आए हैं, नुकसान फलस्तीन का ही हुआ है और हर बार उसे अपनी जमीन का कुछ हिस्सा इजरायल के हाथों गंवाना पड़ा है। इस बार चूंकि हमास ने सैकड़ों इजरायलियों को मारा है, इसलिए मुमकिन है, पूरा गाजा ही इजरायल अपने कब्जे में ले ले, इसके लिए वह कुछ भी करने को तैयार दिख रहा है।
अमृतेश मिश्र, टिप्पणीकार 

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