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औद्योगिक क्रांति की एक बड़ी उपलब्धि

फेक हमेशा बुरा नहीं होता। इसके बारे में यह गलत धारणा बन चुकी है कि यह वर्तमान समय की सबसे बड़ी चुनौती है, जबकि सच तो यह है कि वर्तमान सदी फेक की ही सदी है। इसमें जितनी संभावनाएं हैं, उतनी वास्तविक...

औद्योगिक क्रांति की एक बड़ी उपलब्धि
Pankaj Tomarहिन्दुस्तानMon, 20 Nov 2023 12:16 AM
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फेक हमेशा बुरा नहीं होता। इसके बारे में यह गलत धारणा बन चुकी है कि यह वर्तमान समय की सबसे बड़ी चुनौती है, जबकि सच तो यह है कि वर्तमान सदी फेक की ही सदी है। इसमें जितनी संभावनाएं हैं, उतनी वास्तविक में न कभी संभव थी और न हो सकने की संभावना है। फेक का परिमार्जित स्वरूप चौथी औद्योगिक क्रांति की एक बड़ी उपलब्धि है। हम फेक बुद्धिमत्ता (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, यानी कृत्रिम बुद्धिमत्ता), फेक वास्तविकता (वर्चुअल रियलिटी) और फेक तथ्य (पोस्ट ट्रुथ ) के युग में जी रहे हैं। ऐसे में, यह जरूरी है कि फेक के एक परिवर्धित स्वरूप यानी ‘डीपफेक’ के बारे में जाना जाए।
दरअसल, उत्तर आधुनिक चिंतन के साथ एक समस्या यह भी आई कि इसमें सत्य और असत्य के बीच दीवार झीनी हो गई। उत्तर आधुनिक चिंतन किसी सार्वभौमिक सत्य जैसी अवधारणा पर विश्वास नहीं करता। इस चिंतन के अनुसार, दुनिया में कोई भी अवधारणा सार्वभौमिक रूप से सत्य नहीं होती, बल्कि तुलनात्मक रूप से सत्य होती है। जो तर्क किसी एक के लिए सत्य है, वह दूसरे के लिए असत्य हो सकता है। या, जो किसी के लिए असत्य हो, वह दूसरे के लिए सत्य हो सकता है। चौथी औद्योगिक क्रांति की तकनीकों ने इस अवधारणा को मूर्त स्वरूप देने में अहम भूमिका निभाई। 
पोस्ट ट्रुथ के इस दौर में जब हर किसी को अपने हिसाब से सत्य चुनने या कहने की स्वतंत्रता है, ऐसे में अब व्यक्ति अपने चयन के हिसाब से ही सत्य को ‘विजुअलाइज’ भी करना चाहता है। अब यदि कोई व्यक्ति किसी नेता या अभिनेता को पसंद करता है, तो वह चाहता है कि वह सभी फिल्में उसी की आवाज और अभिनय में देखे, या उसका पसंदीदा उसकी अपनी स्थानीय भाषा में अपनी बात रखे, तो यह संभव है। वर्तमान आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तथा मशीन लर्निंग जैसी तकनीकों के मेल ने सत्य के इस स्वरूप को भी संभव कर दिया है। आज व्यक्ति अपने हिसाब से किसी वीडियो के पात्र, आवाज अथवा दृश्य में बदलाव कर बिल्कुल मूल वीडियो की साम्यता में उसे देख अथवा दिखा सकता है। विजुअलाइजेशन की दुनिया में यह जिस तकनीक के माध्यम से संभव हुआ है, उसी का नाम है- डीपफेक तकनीक। स्वाभाविक है, यह पोस्ट ट्रुथ दुनिया के लिए एक क्रांतिकारी तकनीक है। हालांकि, इसके खतरे भी कम नहीं हैं, जिनसे पार पाने की दिशा में अनवरत काम हो रहा होगा। उम्मीद है, जल्द ही इन सबमें हमें सफलता मिल जाएगी।
पुरुषोत्तम प्रतीक, टिप्पणीकार

दुरुपयोग की आशंका ज्यादा गहरी
एआई, यानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (कृत्रिम बुद्धिमत्ता) के माध्यम से आज-कल डीपफेक अशालीन और गलत वीडियो बनाए जा रहे हैं। डीपफेक अशालीन का मतलब है कि ऐसा कोई भी अश्लील वीडियो या चित्र, जो हमारा नहीं है, मगर उस पर हमारा चेहरा लगा दिया जाता है। और, यह सब इतनी कुशलता से किया जाता है कि आम व्यक्ति इसे पहचान भी नहीं सकता कि यह नकली है या असली? इन दिनों एक के बाद दूसरी अभिनेत्रियों के ऐसे ही वीडियो बनाए जा रहे हैं, और उनको वायरल किया जा रहा है, जबकि असलियत में वह वीडियो किसी और का है। स्पष्ट है, आपके किसी अपने का फोटो किसी गलत वीडियो में इस्तेमाल किया जा सकता है और उसे वायरल किया जा सकता है। चिंता की बात यह है कि तकनीक के जानकर लोगों के अलावा कोई समझ भी नहीं पाएगा कि यह सब नकली है, डीपफेक है। जब तक सच सामने आएगा, तब तक बहुत कुछ बिगड़ चुका होगा। ऐसे में, तत्काल आवश्यक है कि एआई को रोका जाए। अगर इसे रोका नहीं गया, तो यह भविष्य में खतरनाक साबित होगा। यह परिवार और समाज के लिए सबसे बड़ा खतरा है। मगर जब तक इस पर कोई कार्रवाई नहीं होती, इसे रोकने की कोई नीति नहीं बनती, तब तक आप अपने और परिजनों के वास्तविक फोटो सोशल मीडिया पर अपलोड करने से बचें। 
समिधा झा, टिप्पणीकार


बचाव ही उपाय
डीपफेक मौजूदा समय की एक बड़ी चुनौती है। अब अपने फोटो या वीडियो सोच-समझकर ही अपलोड करें, अन्यथा साइबर अपराधी आपके ऐसे ही फोटो और वीडियो बनाकर आपकी इज्जत और फैन फॉलोइंग बढ़ाने की हवा निकाल देंगे। आप आज जितने प्रसिद्ध हुए, कल उतने ही बदनाम हो जाएंगे। यह तकनीक लड़कियों या महिलाओं के लिए ही नहीं, लड़कों और पुरुषों के लिए भी खतरनाक साबित होगी। इससे बचने के कुछ उपाय हैं- सोशल मीडिया पर अनजान लोगों को अपनी लिस्ट में न जोड़ें। अपनी प्रोफाइल और फोटो पर सुरक्षा के जुड़े उपाय करें। ज्यादा प्रसिद्धि या फॉलोअर के लालच में अंधे न बने। हालांकि, यह भी समझ लें कि इंटरनेट की दुनिया में कुछ भी सुरक्षित या बंद नहीं होता, तो बेहतर है कि अपने, परिजनों या दोस्तों के फोटो कतई अपलोड न करें। केंद्र सरकार से यही गुजारिश है कि इस तरह की तकनीक को भारत में तत्काल प्रतिबंधित करे, ताकि देश में नए तरह के अपराधी पैदा न हो सकें। इससे देश का भला होगा।
सुरेश कुमार, टिप्पणीकार 

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